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High Court : श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में गलत रिपोर्टिंग पर होगी अवमानना की कार्यवाही
Sun, 01 Feb 2026 04:57 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 01 Feb 2026 04:57 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े मुकदमों की सुनवाई के दौरान मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर चेतावनी दी है।
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मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े मुकदमों की सुनवाई के दौरान मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर चेतावनी दी है। कहा है कि अदालती कार्यवाही या आदेशों के बारे में किसी भी तरह की भ्रामक या गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसा करने वालों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जा सकती है। लिहाजा, मीडिया अदालत की मर्यादा बनाए रखे।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष व वादी आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर दिया है। उन्होंने कोर्ट का ध्यान मीडिया के लिए पूर्व में जारी दिशानिर्देशों की ओर आकर्षित करते हुए दलील दी कि संवेदनशील मामले में कुछ संस्थानों की ओर से भ्रामक खबरें प्रकाशित की जा रही हैं। इस संबंध में उन्होंने 24 जनवरी को भी अर्जी दाखिल कर भ्रामक खबरों की जानकारी उच्च न्यायालय को भेजी है।
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इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया कि वे पूर्व में जारी दिशानिर्देशों को फिर से प्रसारित करें। कोर्ट ने कहा कि उम्मीद करते हैं कि मीडिया इस मामले की कार्यवाही की रिपोर्टिंग करते समय संयम बरतेगी और अदालत की गरिमा व आदेशों की पवित्रता बनाए रखेगी। श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़ी अन्य सभी अर्जी पर अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी। इस दौरान सभी पक्ष लंबित अर्जियों पर अपनी आपत्तियां दाखिल कर सकेंगे। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि अगली तारीख तक आपत्तियां दाखिल नहीं की गईं तो उनकी योग्यता के आधार पर फैसला किया जाएगा।
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अदालत के समक्ष लंबित मांग
1.शाही ईदगाह परिसर के सर्वे और वहां सुरक्षा-निरीक्षण की मांग।
2.परिसर में स्थित कृष्ण कूप पर पूजा और बासोड़ा पूजा की अनुमति।
3.विभिन्न मुकदमों को एक साथ सुनने या किसी एक को आधार मानकर कार्यवाही आगे बढ़ाने की मांग।
4.सोशल मीडिया रिकॉर्ड और पेनड्राइव की जांच ।