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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court comment It is not right to reject bail to give the accused the taste of imprisonment as a lesson

हाईकोर्ट की टिप्पणी : आरोपी को सबक के तौर पर कारावास का स्वाद चखाने के लिए जमानत खारिज करना ठीक नहीं

Sat, 26 Oct 2024 03:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 26 Oct 2024 03:54 PM IST
सार

न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने यह टिप्पणी कर धोखाधड़ी मामले में जौनपुर की महिला की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। सराय ख्वाजा थाने में माया तिवारी पर धोखाधड़ी, आईटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

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High Court comment It is not right to reject bail to give the accused the taste of imprisonment as a lesson
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी की जमानत याचिका सबक के तौर पर कारावास का स्वाद चखाने के लिए खारिज नहीं करनी चाहिए। जमानत आवेदनों पर विचार करते समय आरोपों व सजा की गंभीरता के अलावा इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि क्या आरोपी की ओर से फरार होने या दावों के साथ छेड़छाड़ करने या उन्हें धमकाने की संभावना है।

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न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने यह टिप्पणी कर धोखाधड़ी मामले में जौनपुर की महिला की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। सराय ख्वाजा थाने में माया तिवारी पर धोखाधड़ी, आईटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोप है कि आवेदक ने स्वयं को पीएमओ में उच्च अधिकारी बताकर टेंडर दिलाने के नाम पर 10 लाख की ठगी की है। हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदक ने याचिका दाखिल की है।

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याची के वकील ने दलील दी कि संबंधित राशि का बड़ा हिस्सा 8,70,000 रुपये पहले ही शिकायतकर्ता के खाते में स्थानांतरित कर दिया गया है। याची स्वयं धोखे का शिकार हुई है। सह-आरोपी संतोष सेमवाल, जो जांच में मुख्य आरोपी पाया गया है। उसने याची को धोखा दिया है। आवेदक एक महिला है और वह 12 सितंबर 2023 से जेल में है। जमानत मिलती है तो उसका दुरुपयोग नहीं करेगी। अपर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का विरोध किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के लिए जमानत अर्जी मंजूर कर ली।

अदालतें याद रखें जमानत नियम है और जेल अपवाद

न्यायालय ने कहा-ट्रायल कोर्ट और उच्च न्यायालय कानून के एक स्थापित सिद्धांत को भूल गए हैं कि सजा के रूप में जमानत को रोका नहीं जाना चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है कि ट्रायल कोर्ट और उच्च न्यायालय जमानत देने के मामलों में हमेशा सुरक्षित रहने का प्रयास करते हैं। ऐसे में इस न्यायालय में बड़ी संख्या में जमानत याचिकाएं बढ़ गई हैं। ऐसे में लंबित मामले बढ़ गए हैं। अब समय आ गया है कि ट्रायल अदालतों और उच्च न्यायालयों को इस सिद्धांत को पहचानना चाहिए कि जमानत नियम और जेल अपवाद है।

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