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Prayagraj : हाईकोर्ट बार ने अतिक्रमण हटाने के लिए दाखिल की अर्जी, कोर्ट ने पक्षकारों से मांगा जवाब

Wed, 07 Aug 2024 04:47 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 07 Aug 2024 04:47 PM IST
सार

मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने इस पर पक्षकारों से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई दो सितंबर को होगी। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने अर्जी दाखिल कर इंडियन बैंक चौराहे से पानी टंकी तक, इंडियन बैंक चौराहे से न्यायदेवी मूर्ति तक व पत्थर गिरजाघर से पानी की टंकी तक अतिक्रमण हटाने की मांग की है।

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High Court Bar filed an application to remove encroachment, court sought response from the parties.
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट के पास स्थित न्यायविद हनुमान मंदिर के पास हो रहे अवैध निर्माण को हटाने के संबंध में दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई सोमवार को हुई। इस दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने एक अर्जी दाखिल पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। साथ ही कहा कि हाईकोर्ट के आसपास अतिक्रमण को हटाया जाना चाहिए।

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मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने इस पर पक्षकारों से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई दो सितंबर को होगी। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने अर्जी दाखिल कर इंडियन बैंक चौराहे से पानी टंकी तक, इंडियन बैंक चौराहे से न्यायदेवी मूर्ति तक व पत्थर गिरजाघर से पानी की टंकी तक अतिक्रमण हटाने की मांग की है।
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वहीं, न्यायालय के आदेश पर पीडीए ने हलफनामा दाखिल कर खंडपीठ को बताया कि न्यायविद मंदिर के पास अवैध निर्माणाधीन कार्य को हटा दिया गया है। इस दौरान याची सुनीता शर्मा व अन्य की ओर से अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि पीडीए ने अभी अवैध निर्माण का मलबा नहीं हटाया है। जबकि, पीडीए की ओर से दाखिल हलफनामे में मलबा हटाने की बात कही गई है।
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वादी अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को इस मामले में बोलने का अधिकार नहीं है। क्योंकि, वह इसमें पक्षकार नहीं है। न्यायविद हनुमान मंदिर दो सौ साल पुराना है और यह पूजा स्थल अधिनियम के तहत इसके स्वरूप में छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है।


हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन के सचिव विक्रांत पांडेय ने बताया कि न्यायविद मंदिर को हटाने को लेकर हो रही चर्चाएं गलत हैं। बार एसोसिएशन को सिर्फ अतिक्रमण हटाने से मतलब है। मंदिर हटाने के संबंध में कोई अर्जी दाखिल नहीं की है। 

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