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हाईकोर्ट ने पूछा : ट्रायल कोर्ट और डीजीपी बताएं लंबित मुकदमों के लिए जिम्मेदार कौन, जवाब तलब
Mon, 30 Sep 2024 04:53 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 30 Sep 2024 04:53 PM IST
सार
यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने एटा के आरोपी मनोज की चौथी जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि यह उसकी चौथी जमानत अर्जी है। इससे पूर्व उसकी तीन अर्जियां खारिज हो चुकी हैं।
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अदालत का आदेश
- फोटो : istock
विस्तार
अभियोजन की लापरवाह कार्यशैली से खफा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीजीपी से व्यक्तिगत हलफनामा और ट्रायल कोर्ट से मुकदमे की स्थिति की जानकारी तलब की है। डीजीपी से पूछा है कि गंभीर अपराधों में अभियोजन गवाहों को समय से क्यों नहीं पेश करता है? वहीं, ट्रायल कोर्ट से सवाल किया है कि लंबित मुकदमों के लिए जिम्मेदारा कौन है?
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यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने एटा के आरोपी मनोज की चौथी जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि यह उसकी चौथी जमानत अर्जी है। इससे पूर्व उसकी तीन अर्जियां खारिज हो चुकी हैं। याची 2017 से जेल में बंद है। साढ़े सात साल में अभियोजन ने मात्र तीन गवाह पेश किए हैं। निकट भविष्य में मुकदमे के ट्रायल की उम्मीद नहीं दिख रही है। ऐसे में यह सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन है।
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इस पर कोर्ट का कहना था कि यह लगातार देखने में आ रहा है कि गंभीर मामलों में भी अभियोजन गवाहों को समय से पेश नहीं करता है। इससे तमाम मुकदमों के ट्रायल लंबित हैं। अगर अभियोजन गवाहों को पेश करने और ट्रायल पूरा करने में दिलचस्पी नहीं ले रहा है तो किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता है।
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कोर्ट ने डीजीपी से हलफनामा तलब कर कहा कि पुलिस विभाग का प्रमुख होने के नाते वह बताएं कि उन्होंने इस दिशा में क्या कदम उठाए हैं। क्या किसी मामले में उन्होंने दोषी पुलिस अधिकारी या व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की है। इसी के साथ कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से भी रिपोर्ट तलब कर मुकदमे के ट्रायल में अब तक हुई प्रक्रिया की जानकारी देने को कहा है। साथ ही यह भी बताया जाए कि ट्रायल क्यों नहीं पूरा हो सका। इसके लिए कौन जिम्मेदार है।