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हाईकोर्ट इलाहाबाद ने अपने आदेश पर पुनर्विचार कर तीन एडीओ को दी राहत

Fri, 10 Apr 2020 08:57 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 10 Apr 2020 08:57 PM IST
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High Court Allahabad reconsidered its order and granted relief to three ADOs
court - फोटो : court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने पूर्व पारित आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार अर्जी को स्वीकार कर कोआपरेटिव विभाग में तैनात तीन सहायक विकास अधिकारियों को बड़ी राहत दी। इन तीनों सहायक विकास अधिकारियों ने वर्ष 1990 में याचिका दायर कर सहायक विकास अधिकारी (कोआपरेटिव) के पद से पदावनत करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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2 दिसम्बर 1988 को तीनों का 90 दिन के लिए सहायक विकास अधिकारी के पद पर प्रमोशन किया गया था। बाद में 25 नवम्बर 90 के आदेश से डिप्टी सहायक रजिस्ट्रार कोआपरेटिव सोसाइटी ने प्रमोशन आदेश वापस लेकर तीनों को पदावनत कर दिया था। जिसके खिलाफ इनकी याचिका पर कोई राहत नहीं मिली। जिस कारण यह पुनर्विचार अर्जी दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने अपने पूर्व के आदेश में कहा था कि इनका प्रमोशन सबार्डिनेट कोआपरेटिव सर्विस रूल्स 1979 के विपरीत था तथा जिस शासनादेश के आधार पर प्रोन्नति मिली थी, वह बाद में वापस ले लिया गया था। 
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लव प्रसाद अन्य की अर्जी पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने सुनवाई की। हाईकोर्ट ने कहा कि पूर्व के आदेश में यह विचार नहीं किया जा सका था कि याचीगण की प्रोन्नति 10 अप्रैल 1980 के शासनादेश के तहत हुई थी और इस शासनादेश को 7 अप्रैल 1999 को वापस लिया गया था। जबकि याचीगण की एडीओ कोआपरेटिव पद पर प्रोन्नति 2 दिसम्बर 88 को हुई थी। उस समय 10 अप्रैल 80 का शासनादेश प्रभाव में था। इस कारण यह नहीं कहा जा सकता है कि इनका प्रमोशन गलत था।
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सभी याची 17 दिसम्बर 90 को हाईकोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेश से काम कर रहे थे। इस बीच याची संख्या एक व दो को उसी पद पर नियमित भी कर दिया गया। ऐसे में बाकी याचियों के साथ भेदभाव अनुचित होगा। कोर्ट ने पुनर्विचार अर्जी को स्वीकार कर कोआपरेटिव विभाग में तैनात इन तीन सहायक विकास अधिकारियों को उनकी तदर्थ सेवा भी जोड़ कर सभी प्रकार के पोस्ट रिटायरमेंट राशि देने के लिए तीन माह का विभाग को समय दिया है। यह आदेश जस्टिस सिद्धार्थ ने लव प्रसाद द्विवेदी व दो अन्य की पुनर्विचार अर्जी को स्वीकार करते हुए दिया है।
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