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High Court : हाईकोर्ट ने 40 साल पुराने हत्या के मामले में जीवित बचे एकमात्र आरोपी को बरी किया

Fri, 03 Apr 2026 07:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 03 Apr 2026 07:07 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 40 साल पुराने हत्या के मामले में जीवित बचे एकमात्र अपीलकर्ता जहर सिंह को संदेह का लाभ देेते हुए बरी कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने दिया है।

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High Court acquits the only surviving accused in a 40-year-old murder case.
अदालत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 40 साल पुराने हत्या के मामले में जीवित बचे एकमात्र अपीलकर्ता जहर सिंह को संदेह का लाभ देेते हुए बरी कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने दिया है। एटा जिले के जैथरा थाने में अप्रैल 1982 में हत्या के मामले में एफआईआर दर्ज की गई। अभियोजन के अनुसार, रंजिश के चलते अमीरातपुर गांव में जोगराज, महाराज सिंह और अन्य हथियारबंद आरोपी अमर सिंह के घर में घुस गए। अमर सिंह का भाई राम नारायण जान बचाकर बाहर भागा।

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आरोपियों ने उसका पीछा किया और गोली मारकर हत्या कर दी। ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 1984 में आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए जहर सिंह व अन्य ने अपील दायर की। हालांकि अपील के लंबित रहने के दौरान अन्य अपीलकर्ताओं की मौत के चलते उनकी अपील समाप्त कर दी। सिर्फ जीवित बचे जहर सिंह की अपील पर सुनवाई हुई।
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अपीलकर्ता के अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने दलील दी अपीलकर्ता निर्दोष है। उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। जहर सिंह की राम नारायण के साथ हत्या का कोई रंजिश या हत्या का कोई मकसद सामने नहीं आया है। अन्य दलीलें दीं।
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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि एफआईआर में जहर सिंह की ओर से गोली चलाने का कोई उल्लेख नहीं था। मुख्य गवाह ने भी जहर सिंह भूमिका का जिक्र नहीं किया। ट्रायल कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 313 के तहत दर्ज बयान पर विचार नहीं किया। इन्हीं तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने जीवित बचे एक मात्र अपीलकर्ता को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

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