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High Court : ट्रायल से भागने वाले आरोपी को नहीं मिल सकती धारा-256 में राहत
Thu, 12 Feb 2026 01:55 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 12 Feb 2026 01:55 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आरोपी स्वयं न्यायालय में उपस्थित होकर मुकदमे का सामना नहीं कर रहा है तो केवल शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति के आधार पर उसे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-256 के तहत बरी नहीं किया जा सकता।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आरोपी स्वयं न्यायालय में उपस्थित होकर मुकदमे का सामना नहीं कर रहा है तो केवल शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति के आधार पर उसे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-256 के तहत बरी नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में बरी करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने चेक बाउंस के आरोपी राय अनूप प्रसाद की आठ याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज कर आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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मामला आगरा की एक अदालत में लंबित परिवाद (कम्प्लेंट केस) से जुड़ा है। मजिस्ट्रेट ने 29 सितंबर 2014 को शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति के आधार पर धारा-256 सीआरपीसी के तहत आरोपी को बरी कर दिया था। जबकि, रिकॉर्ड से स्पष्ट था कि आरोपी कभी भी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ और न ही ट्रायल शुरू हुआ था। ब्यूरो
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फ्लैट सौदे से जुड़ा था विवाद
मामले के अनुसार शिकायतकर्ता गोपाल प्रसाद शर्मा ने अपने परिचित राय अनूप प्रसाद से नोएडा में 80 लाख रुपये में एक फ्लैट का सौदा किया था। 30 लाख रुपये एडवांस दिए गए थे। बाद में सौदा पूरा नहीं हो सका। आरोपी ने रकम लौटाने के लिए आठ चेक दिए, लेकिन सभी बाउंस हो गए। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत में परिवाद दायर किया।