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हेल्प लाइन में घनघनाते रहे फोन, अपनों के लिए परेशान रहे शहरी
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Thu, 29 Dec 2016 01:08 AM IST
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कानपुर के निकट सियालदाह-अजमेर के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर मिलते ही ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों के परिजन परेशान हो गए। सुबह तमाम लोग इलाहाबाद जंक्शन पहुंच गए। यहां रेलवे अफसरों से लोग अपनों की खैर खबर पूछने लगे। इस बीच रेलवे द्वारा जारी की गई हेल्प लाइन पर यात्रियों के फोन घनघनाते रहे।
मंगलवार को गाड़ी संख्या 12987 सियालदाह-अजमेर एक्सप्रेस 11.25 घंटे की देरी से रात 11.25 बजे इलाहाबाद पहुंची। पांच मिनट के ठहराव के बाद ट्रेन कानपुर की ओर रवाना हुई। इलाहाबाद से ट्रेन में 93 यात्रियों का रिजर्वेशन था। इसमें 60 पुरुष एवं 32 महिला एवं एक बच्चा शामिल रहा।
ट्रेन के सेकंड एसी में 04, थर्ड एसी में 09 एवं स्लीपर में कुल 80 यात्रियों की बुकिंग रही। करेली के अबरार अहमद के पुत्र अबसार अहमद और उनकी पत्नी गुलफ्शा, जिनकी शादी 23 दिसंबर को हुई थी, का रिजर्वेशन अजमेर के लिए था। सुबह जब अबरार अहमद और उनके बड़े बेटे अनवार अहमद ने ट्रेन हादसे की खबर सुनी तो उनके पैरों तले जमीन ही खिसक गई। नेटवर्क न होने की वजह से फोन से संपर्क भी नहीं हो पा रहा था। सुबह सात बजे के आसपास अबसार ने जब फोन कर अपनी सलामती के बारे में बताया तो उनके जान में जान आई।
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बेटा ट्रेन पलट गई है, मैं जख्मी हूं, तुम्हारी मां और बहन सुरक्षित हैं
कानपुर में सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस हादसे में जख्मी हुए झूंसी के एजीकर्मी
हादसे में घायल होने वालों में सिविल लाइंस और नैनी की भी एक-एक महिला
इलाहाबाद/झूंसी। बेटा अमित हमारी ट्रेन पलट गई है, मुझे थोड़ी चोट लगी है लेकिन तुम्हारी मां और बहन सुरक्षित हैं। मुझे कानपुर के हास्पिटल ले जाया जा रहा है। घबराने की कोई बात नहीं है। बुधवार को कानपुर के रूरा के पास हुए ट्रेन हादसे में झूंसी के नेचर विला इलाके में रहने वाले एजीकर्मी, पत्नी और बेटी भी जख्मी हुए हैं। बुधवार की सुबह जख्मी पिता के आए फोन से परिवार के अन्य सदस्यों में कोहराम मच गया। हालांकि सभी के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने पर परिजनों ने राहत की सांस ली।
एडीए की त्रिवेणीपुरम कालोनी के पास नेचरविला निवासी 54 वर्षीय राजकृष्ण ओझा एजी आफिस में एकांउटेंट हैं। मंगलवार की रात में वह पत्नी कल्याणी ओझा और बेटी रूपाली के साथ अजमेर जाने के लिए सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस में सवार थे। मंगलवार की रात उनके दोनों बेटे अमित और प्रांजल इलाहाबाद जंक्शन छोड़ने भी आए थे। सभी एसी थ्री कोच में सवार थे। भोर में कानपुर के रूरा इलाके में ट्रेन की 15 बोगियां अचानक पलट गईं। हादसे में राजकृष्ण ओझा भी जख्मी हुए हैं। पत्नी कल्याणी और बेटी रूपाली को मामूली चोट आई है। बुधवार की सुबह राजकृष्ण ने झूंसी स्थित घर पर मौजूद बेटे अमित को घटना की जानकारी फोन पर दी तो कोहराम मच गया।
उन्होंने बेटे को फोन कर बताया कि ट्रेन की कई बोगियां पलट गई हैं। उन बोगियों में उनकी भी बोगी शामिल है। बताया कि हादसे में वह जख्मी हुए हैं। इतना सुनते ही अमित के होश उड़ गए। वह बदहवास हो गया। तभी पिता ने बताया कि घबराने की कोई बात नहीं है। थोड़ी चोट लगी है। उन्हें कानपुर के एक हास्पिटल ले जाया जा रहा है। हादसे में मां और बहन के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने पर अमित और उसके भाई प्रांजल ने राहत की सांस ली। हादसे में एलगिन रोड सिविल लाइंस की खुशनुमा बेगम पत्नी सलाउद्दीन एवं नैनी छिवकी की राजकुमारी भी घायल हुईं।
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मंगलवार को गाड़ी संख्या 12987 सियालदाह-अजमेर एक्सप्रेस 11.25 घंटे की देरी से रात 11.25 बजे इलाहाबाद पहुंची। पांच मिनट के ठहराव के बाद ट्रेन कानपुर की ओर रवाना हुई। इलाहाबाद से ट्रेन में 93 यात्रियों का रिजर्वेशन था। इसमें 60 पुरुष एवं 32 महिला एवं एक बच्चा शामिल रहा।
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ट्रेन के सेकंड एसी में 04, थर्ड एसी में 09 एवं स्लीपर में कुल 80 यात्रियों की बुकिंग रही। करेली के अबरार अहमद के पुत्र अबसार अहमद और उनकी पत्नी गुलफ्शा, जिनकी शादी 23 दिसंबर को हुई थी, का रिजर्वेशन अजमेर के लिए था। सुबह जब अबरार अहमद और उनके बड़े बेटे अनवार अहमद ने ट्रेन हादसे की खबर सुनी तो उनके पैरों तले जमीन ही खिसक गई। नेटवर्क न होने की वजह से फोन से संपर्क भी नहीं हो पा रहा था। सुबह सात बजे के आसपास अबसार ने जब फोन कर अपनी सलामती के बारे में बताया तो उनके जान में जान आई।
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बेटा ट्रेन पलट गई है, मैं जख्मी हूं, तुम्हारी मां और बहन सुरक्षित हैं
कानपुर में सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस हादसे में जख्मी हुए झूंसी के एजीकर्मी
हादसे में घायल होने वालों में सिविल लाइंस और नैनी की भी एक-एक महिला
इलाहाबाद/झूंसी। बेटा अमित हमारी ट्रेन पलट गई है, मुझे थोड़ी चोट लगी है लेकिन तुम्हारी मां और बहन सुरक्षित हैं। मुझे कानपुर के हास्पिटल ले जाया जा रहा है। घबराने की कोई बात नहीं है। बुधवार को कानपुर के रूरा के पास हुए ट्रेन हादसे में झूंसी के नेचर विला इलाके में रहने वाले एजीकर्मी, पत्नी और बेटी भी जख्मी हुए हैं। बुधवार की सुबह जख्मी पिता के आए फोन से परिवार के अन्य सदस्यों में कोहराम मच गया। हालांकि सभी के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने पर परिजनों ने राहत की सांस ली।
एडीए की त्रिवेणीपुरम कालोनी के पास नेचरविला निवासी 54 वर्षीय राजकृष्ण ओझा एजी आफिस में एकांउटेंट हैं। मंगलवार की रात में वह पत्नी कल्याणी ओझा और बेटी रूपाली के साथ अजमेर जाने के लिए सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस में सवार थे। मंगलवार की रात उनके दोनों बेटे अमित और प्रांजल इलाहाबाद जंक्शन छोड़ने भी आए थे। सभी एसी थ्री कोच में सवार थे। भोर में कानपुर के रूरा इलाके में ट्रेन की 15 बोगियां अचानक पलट गईं। हादसे में राजकृष्ण ओझा भी जख्मी हुए हैं। पत्नी कल्याणी और बेटी रूपाली को मामूली चोट आई है। बुधवार की सुबह राजकृष्ण ने झूंसी स्थित घर पर मौजूद बेटे अमित को घटना की जानकारी फोन पर दी तो कोहराम मच गया।
उन्होंने बेटे को फोन कर बताया कि ट्रेन की कई बोगियां पलट गई हैं। उन बोगियों में उनकी भी बोगी शामिल है। बताया कि हादसे में वह जख्मी हुए हैं। इतना सुनते ही अमित के होश उड़ गए। वह बदहवास हो गया। तभी पिता ने बताया कि घबराने की कोई बात नहीं है। थोड़ी चोट लगी है। उन्हें कानपुर के एक हास्पिटल ले जाया जा रहा है। हादसे में मां और बहन के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने पर अमित और उसके भाई प्रांजल ने राहत की सांस ली। हादसे में एलगिन रोड सिविल लाइंस की खुशनुमा बेगम पत्नी सलाउद्दीन एवं नैनी छिवकी की राजकुमारी भी घायल हुईं।