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आनंद गिरि का दावा : महंत नरेंद्र गिरि को किसी दूसरे व्यक्ति ने खुदकुशी के लिए उकसाया था
Thu, 11 Aug 2022 12:39 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 11 Aug 2022 12:39 AM IST
सार
याची की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी ने तर्क दिया कि खुदकुशी के पहले लिखे नोट में महंत ने दूसरे व्यक्ति के हवाले से याची पर उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया है।
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Prayagraj News : योग गुरु आनंद गिरि।
- फोटो : प्रयागराज
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की खुदकुशी मामले में उकसाने के आरोपी शिष्य आनंद गिरी की जमानत अर्जी की सुनवाई जारी है। सुनवाई बृहस्पतिवार को भी होगी। अर्जी की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह कर रहे हैं।
याची की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी ने तर्क दिया कि खुदकुशी के पहले लिखे नोट में महंत ने दूसरे व्यक्ति के हवाले से याची पर उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया है। उनकी अपनी व्यक्तिगत जानकारी में बातें नहीं लिखी गई है। सुनी हुई बातों को लेकर आरोप लगाया गया है। याची का महंत से हुआ विवाद समाप्त हो गया था । उन्होंने माफ कर दिया था। कोई दुराव नहीं रह गया था।
याची घटना के दिन से दो माह पहले से हरिद्वार में रह रहा था । स्वामी नरेंद्र गिरी से खुदकुशी से पहले फोन पर बात करने और भयभीत करने का कोई साक्ष्य नहीं हैं। वह घटना स्थल से काफी दूर था। किसी दूसरे व्यक्ति ने उन्हें गलत जानकारी देकर खुदकुशी की ओर धकेला है। जिसमें याची की कोई भूमिका नहीं है। उनकी मौत से उसे कोई फायदा न होकर नुकसान ही हुआ है। बहस जारी है। समय की कमी के चलते पूरी नहीं हो सकी। सीबीआई की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश व संजय यादव पक्ष रखेंगे।
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याची की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी ने तर्क दिया कि खुदकुशी के पहले लिखे नोट में महंत ने दूसरे व्यक्ति के हवाले से याची पर उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया है। उनकी अपनी व्यक्तिगत जानकारी में बातें नहीं लिखी गई है। सुनी हुई बातों को लेकर आरोप लगाया गया है। याची का महंत से हुआ विवाद समाप्त हो गया था । उन्होंने माफ कर दिया था। कोई दुराव नहीं रह गया था।
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याची घटना के दिन से दो माह पहले से हरिद्वार में रह रहा था । स्वामी नरेंद्र गिरी से खुदकुशी से पहले फोन पर बात करने और भयभीत करने का कोई साक्ष्य नहीं हैं। वह घटना स्थल से काफी दूर था। किसी दूसरे व्यक्ति ने उन्हें गलत जानकारी देकर खुदकुशी की ओर धकेला है। जिसमें याची की कोई भूमिका नहीं है। उनकी मौत से उसे कोई फायदा न होकर नुकसान ही हुआ है। बहस जारी है। समय की कमी के चलते पूरी नहीं हो सकी। सीबीआई की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश व संजय यादव पक्ष रखेंगे।
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