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Health : बवासीर-भगंदर के उपचार में लेजर तकनीक कारगर, चिकित्सकों को बताई गईं बारीकियां

Sat, 06 Apr 2024 10:53 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 06 Apr 2024 10:53 AM IST
सार

नागपुर के डॉ.प्रदीप शर्मा ने बताया कि लंबे समय तक बैठने की वजह से यह बीमारी होने की संभावना रहती है। वहीं, बवासीर पर श्रीनगर से आए डॉ.निसार चौधरी ने बताया कि अगर लीवर में कोई समस्या है या फिर गर्भावस्था है तो बवासीर का ऑपरेशन नहीं किया जाना चाहिए।

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Health: Laser technology is effective in the treatment of piles and fistulas, details told to doctors
मेडिकल कॉलेज परिसर में फेलोशिप प्रोग्राम के तहत व्याख्यान देते विशेषज्ञ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगंदर और बवासीर के इलाज में लेजर विधि का सही तरीके से उपयोग काफी कारगर है। लेकिन, इसका उपयोग सही ढंग से न किया जाए तो इन्सान की त्वचा को नुकसान होने का खतरा रहता है। इस विधि से बवासीर-भगंदर का ऑपरेशन करने से रक्तस्राव कम होता है और घाव भी जल्दी भरता है। लेकिन, अधिक इस्तेमाल करने से मरीज की त्वचा भी जल जाती है। ऐसे में उपचार से पहले इसकी जानकारी कर लेनी चाहिए।

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ये बातें शुक्रवार को मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज परिसर में पाइल्स, फिस्टुला पिलोनाइडल साइनस एवं एनोरेक्टल रीजन की अन्य बीमारियों के रोकथाम और इलाज को लेकर पांच दिवसीय फेलोशिप कोर्स के तीसरे दिन डॉ. वैभव श्रीवास्तव ने कहीं।
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एसोसिएशन ऑफ कोलोरेक्टल सर्जन ऑफ इंडिया, एसोसिएशन सर्जन ऑफ इंडिया के उत्तर प्रदेश चैप्टर, इलाहाबाद सर्जन एसोसिएशन एवं सर्जरी के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे कोर्स में पूरे देश से करीब 150 चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया। शुक्रवार को पांच सत्रों में चर्चा हुई। इसके अलावा लेजर से ऑपरेशन पर कार्यशाला भी हुई। इसमें पाइलो निडल साइनस के संबंध में जानकारी दी गई।

नागपुर के डॉ.प्रदीप शर्मा ने बताया कि लंबे समय तक बैठने की वजह से यह बीमारी होने की संभावना रहती है। वहीं, बवासीर पर श्रीनगर से आए डॉ.निसार चौधरी ने बताया कि अगर लीवर में कोई समस्या है या फिर गर्भावस्था है तो बवासीर का ऑपरेशन नहीं किया जाना चाहिए। इस दौरान दवा से ही बवासीर का इलाज किया जाना बेहतर है। वहीं, लखनऊ से आए डॉ.अरशद अहमद ने बवासीर के ऑपरेशन की विधि के बारे में जानकारी दी।









मुंबई से डॉ. कुशल मित्तल मुंबई, डॉ.निरंजन अग्रवाल, जालंधर से डॉ.कमल गुप्ता व औरंगाबाद से डॉ.अतुल देश पांडेय ने व्याख्यान दिया। इस मौके पर डॉ. संतोष सिंह, डॉ. राजकुमार चौधरी, डॉ. कृष्णा सिंह, डॉ.अखिलेश यादव, डॉ.अशोक अग्रवाल, डॉ.सुजीत सिंह व डॉ.अभिनव अग्रवाल रहे। शनिवार सुबह सात बजे से शाम तीन बजे तक एमएलएन मेडिकल कॉलेज परिसर में फेलोशिप कोर्स की परीक्षा होगी। इसमें 43 चिकित्सक प्रतिभाग करेंगे।

बवासीर है कि कैंसर इसकी खून की जांच से जानकारी हो सकती है। क्योंकि,अक्सर देखा जाता है कि मरीज को इस संबंध में सही जानकारी नहीं हो पताी है। इस कारण स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे में मरीज को चाहिए कि वह इस समस्या को लेकर सर्जन से जरूर मिलें। - डॉ. प्रबाल नियोगी, प्रोफेसर, एमएलएन मेडिकल कॉलेज

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