यशस्वी ने सुरों से हासिल किया यश
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यशस्वी ने गुरु अवधेश चंद्र मिश्र से 14 वर्ष की उम्र में संगीत सीखना शुरू किया। वर्ष 2014 में ऑडिशन बोर्ड आफ इंडिया की परीक्षा बी ग्रेड में पास करके सहित उसने 2015 में दूरदर्शन में गायन की प्रस्तुति दी। उसे 2015 में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के कार्यक्रमों में गाने का अवसर मिला। केंद्र के ही कार्यक्रम चलो मन गंगा यमुना तीर में उसकी प्रस्तुति को काफी पसंद किया गया। फरवरी 2016 में त्रिवेणी महोत्सव में भी उसे मंच मिला। यशस्वी 21 मई 2016 को सिंहस्थ कुंभ में सांस्कृतिक केंद्र की ओर से भक्ति संगीत की प्रस्तुति देगी।
यशस्वी के पिता कहते हैं, एक दिन अपनी बेटी को ऐसे ही गाते हुए सुना। फिर उसे उसकी प्रतिभा के अनुरूूप संगीत की शिक्षा दिलानी शुरू की। वह अपने इस सफर का श्रेय अपने गुरु पं. प्रेम कुमार मलिक को देती हैं। कहती है, मेरा सपना सपना संगीत के क्षेत्र में ही सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल करना है।