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गंगा प्रदूषण पर राजेंद्र सिंह को कोर्ट की नसीहत, कहा बिना साक्ष्यों के न दाखिल करें याचिका
Mon, 07 Jan 2019 10:10 PM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: राजेश सैनी
Updated Mon, 07 Jan 2019 10:10 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
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गंगा प्रदूषण को लेकर जनहित याचिका दाखिल करने वाले मैगसेसे पुरस्कार विजेता जल पुरुष राजेंद्र सिंह को हाईकोर्ट ने नसीहत दी है। कोर्ट ने कहा कि बिना दस्तावेजी साक्ष्यों को किसी प्रकार का आरोप लगाना उचित नहीं है।
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याची यह किस आधार पर कह सकता है कि उत्तराखंड से लेकर प्रयाग तक गंगा का जल पीने योग्य नहीं है। याची यदि सामाजिक कार्यकर्ता हैं तो याचिका दाखिल करने से पूर्व उन्होंने गंगा प्रदूषण के लिए क्या काम किए हैं, इसका ब्यौरा याचिका में होना चाहिए।
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मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ ने कहा कि जो व्यक्ति यहां आकर हलफनामा नहीं दाखिल कर सकता, वह अलवर में बैठकर जनहित याचिका दाखिल कर रहा है। ऐसा व्यक्ति गंगा क्या साफ करेगा।
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राजेंद्र सिंह ने जनहित याचिका में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने हेतु जनअभियान चलाने का राज्य सरकार को निर्देश देने की मांग की थी। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद याची के वकील ने याचिका वापस ले ली। कोर्ट का कहना था कि याची चाहे तो इस मामले को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में जा सकता है। कुंभ मेला नजदीक है, इसलिए बिना ठोस तथ्य के दाखिल याचिका पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं है।