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अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध ज्ञान केंद्र बनेगा हर्षवर्धन बुद्ध विहार
Sat, 18 May 2019 07:11 PM IST
विनोद सिंह
अनिल सिद्धार्थ, अमर उजाला, प्रयागराज
अनिल सिद्धार्थ, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 18 May 2019 07:11 PM IST
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- फोटो : प्रयागराज
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बौद्ध कम्यून इंटरनेशनल की पहल पर अरैल स्थित सम्राट हर्षवर्धन बुद्ध विहार को अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। विहार बौद्ध ज्ञान एवं दर्शन का एकेडेमिक सेंटर बनेगा। विहार के श्रामणेर (प्रशिक्षु) पूरी तरह से बौद्ध ज्ञान में पारंगत होकर श्रेष्ठ भिक्षु के रूप में दीक्षित किए जाएंगे जो दुनिया भर में बौद्ध ज्ञान का संदेश देेंगे।
फिलहाल यहां रह रहे सभी श्रामणेर को संस्कृत में स्नातक के बाद संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय या काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एमएम और फिर पालि से पीएचडी कराई जाएगी। वहां से निकलकर बतौर बौद्ध भिक्षु इन्हें दुनिया को बौद्ध धर्म के ज्ञान और दर्शन से परिचित कराने के लिए अलग-अलग देशों में भेजा जाएगा।
परिसर में तकरीबन आठ वर्ष पहले बोधगया से लाई गई बोधिवृक्ष की टहनी रोपी गई थी जो अब वृक्ष का रूप ले चुका है। इसी तरह तरह-तरह के छह सौ से ज्यादा पौथे भी हैं जिनसे विहार रमणीक बन गया है। विहार में तथागत बुद्ध के संदेश के संवाहक सम्राट अशोक और डॉ.आंबेडकर की प्रतिमाओं के अतिरिक्त चार सिंहशीर्ष की लाट स्थापित है। इसी क्रम में अब सम्राट हर्षवर्धन और कनिष्क की भी प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी क्योंकि प्रयागराज सम्राट हर्षवर्धन की थाती भी है।
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बौद्ध कम्यून इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक कहते हैं, बौद्ध ज्ञान के केंद्र के रूप में विकसित होने वाले विहार का मकसद है कि यहां से प्रशिक्षु विशुद्ध ‘बुद्धिज्म’ सीख कर निकले। कोशिश है कि सारनाथ से आकर कौशाम्बी जाने वाले बौद्ध जिज्ञासुओं, पर्यटकों को प्रयागराज क्षेत्र और बौद्ध धर्म से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। फिलहाल यहां धम्म हाल तथा भिक्षुओं के अध्ययन-आवास की व्यवस्था है।
हर्षवर्धन बुद्ध विहार में बौद्ध साहित्य की वृ़हद लाइब्रेरी भी बनेगी। बीते दिनों तकरीबन डेढ़ लाख रुपये की पॉलि की पुस्तकें मंगाई गई हैं। त्रिपिटक सहित मूल पाली और हिन्दी की किताबों सहित संपूर्ण बौद्ध साहित्य का संग्रह किया जाएगा।
भगवान बुद्ध ने कहा था कि अगर बुद्ध विहार बने तो न तो वह नगर में हो, न ही नगर से दूर हो और संभव हो तो नदी के किनारे हो। यह सुखद संयोग है कि अरैल का बौद्ध विहार तथागत के सूत्र वाक्य के अनुरूप ही है। इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध केंद्र के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया गया है।
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फिलहाल यहां रह रहे सभी श्रामणेर को संस्कृत में स्नातक के बाद संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय या काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एमएम और फिर पालि से पीएचडी कराई जाएगी। वहां से निकलकर बतौर बौद्ध भिक्षु इन्हें दुनिया को बौद्ध धर्म के ज्ञान और दर्शन से परिचित कराने के लिए अलग-अलग देशों में भेजा जाएगा।
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परिसर में तकरीबन आठ वर्ष पहले बोधगया से लाई गई बोधिवृक्ष की टहनी रोपी गई थी जो अब वृक्ष का रूप ले चुका है। इसी तरह तरह-तरह के छह सौ से ज्यादा पौथे भी हैं जिनसे विहार रमणीक बन गया है। विहार में तथागत बुद्ध के संदेश के संवाहक सम्राट अशोक और डॉ.आंबेडकर की प्रतिमाओं के अतिरिक्त चार सिंहशीर्ष की लाट स्थापित है। इसी क्रम में अब सम्राट हर्षवर्धन और कनिष्क की भी प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी क्योंकि प्रयागराज सम्राट हर्षवर्धन की थाती भी है।
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बौद्ध कम्यून इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक कहते हैं, बौद्ध ज्ञान के केंद्र के रूप में विकसित होने वाले विहार का मकसद है कि यहां से प्रशिक्षु विशुद्ध ‘बुद्धिज्म’ सीख कर निकले। कोशिश है कि सारनाथ से आकर कौशाम्बी जाने वाले बौद्ध जिज्ञासुओं, पर्यटकों को प्रयागराज क्षेत्र और बौद्ध धर्म से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। फिलहाल यहां धम्म हाल तथा भिक्षुओं के अध्ययन-आवास की व्यवस्था है।
हर्षवर्धन बुद्ध विहार में बौद्ध साहित्य की वृ़हद लाइब्रेरी भी बनेगी। बीते दिनों तकरीबन डेढ़ लाख रुपये की पॉलि की पुस्तकें मंगाई गई हैं। त्रिपिटक सहित मूल पाली और हिन्दी की किताबों सहित संपूर्ण बौद्ध साहित्य का संग्रह किया जाएगा।
भगवान बुद्ध ने कहा था कि अगर बुद्ध विहार बने तो न तो वह नगर में हो, न ही नगर से दूर हो और संभव हो तो नदी के किनारे हो। यह सुखद संयोग है कि अरैल का बौद्ध विहार तथागत के सूत्र वाक्य के अनुरूप ही है। इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध केंद्र के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया गया है।