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‘हरे रामा चहुं दिसि बदरा छाए पिया नहीं आए’ ने मोहा मन
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 15 Aug 2015 01:28 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद संग्रहालय में चल रहे मानसून उत्सव के चौथे दिन शुक्रवार को वादन और लोक गायन की प्रस्तुति हुई। पं. विजय चंद्रा की की-बोर्ड पर मंगल ध्वनि और शास्त्रीय राग की प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इनके साथ तबले पर आदित्य मिश्रा ने संगत दी। डॉ. सुदर्शन राम के तबला वादन को खूब पसंद किया गया। अनाहिता एवं आंजनेय ने वायलिन, बांसुरी की युगलबंदी प्रस्तुत की। कलाकार पुष्पा श्रीवास्तव ने कजरी ‘हरे रामा चहुं दिसि बदरा छाए पिया नहीं आए’, सावन गीत ‘कैस खेलन जाऊ सावन में कजरिया, ‘झिरझिर बुंदिया’ और उदय चंद्र परदेसी के ‘विनइले शारदा भावानी अब पति राखीं महरानी’ गीत ने खूब तालियां बटोरी। संग्रहालय निदेशक राजेश पुरोहित ने अतिथियों का स्वागत, संयोजन डॉ. रमेश मिश्रा और सह संयोजन डॉ. संजू मिश्रा ने किया। कार्यक्रम में प्रो. अमर सिंह, डॉ. राधेश्याम अग्रवाल, डॉ. विभा मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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