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एसआरएन अस्पताल के गॉयनी विभाग ने 100वें कोविड पॉजिटिव महिला का कराया प्रसव
Sat, 19 Sep 2020 12:31 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 19 Sep 2020 12:31 AM IST
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prayagraj news
- फोटो : prayagraj
स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ गई है। गॉयनी विभाग ने शुक्रवार को कोविड पॉजिटिव महिला का ऑपरेशन कर प्रसव कराने का शतक पूरा कर लिया। चिकित्सालय में अब तक सौ कोविड पॉजिटिव महिलाओं का प्रसव हो चुका है। विभाग की इस उपलब्धि पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह और चिकित्सालय के एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव ने चिकित्सकों को बधाई दी।
प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि विभाग के चिकित्सकों ने बेखौफ होकर काम किया है। उधर, गॉयनी विभागाध्यक्ष प्रो. अमृता चौरसिया ने बताया कि शुक्रवार को प्रसव कराने वाली महिला भी प्रतापगढ़ के सुबेदार का पुर्वा इलाके की रहने वाली है। उनकी देखरेख में देर रात डॉ. शक्ति जैन, डॉ. श्वेता, डॉ. निहारिका ने ऑपरेशन कर प्रसव कराया। महिला ने तीन किलोग्राम स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। बच्चे को अलग वार्ड में रखा गया है। उसकी 24 घंटे बाद कोविड की जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि चिकित्सालय में प्रसव कराने वाला पहला कोविड पॉजिटिव केस 12 मई को आया था वह भी प्रतापगढ़ का था और 100वां केस भी वहीं से आया। 100 केसों में सबसे बड़ी बात जो सामने आई कि जन्म के दौरान शिशुओं में संक्रमण की संभावना मात्र दो फीसदी है। यहां 100 केसों में दो बच्चे जन्म के तुरंत बाद कोविड संक्रमित पाए गए। हालांकि, ऐसे बच्चों की रिकवरी भी बहुत तेज होती है। सुखद बात यह भी है कि इतने केस होने के बाद अभी तक प्रसव कराने वाली कोविड पॉजिटिव महिलाओं की कोई शिकायत सामने नहीं आई।
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प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि विभाग के चिकित्सकों ने बेखौफ होकर काम किया है। उधर, गॉयनी विभागाध्यक्ष प्रो. अमृता चौरसिया ने बताया कि शुक्रवार को प्रसव कराने वाली महिला भी प्रतापगढ़ के सुबेदार का पुर्वा इलाके की रहने वाली है। उनकी देखरेख में देर रात डॉ. शक्ति जैन, डॉ. श्वेता, डॉ. निहारिका ने ऑपरेशन कर प्रसव कराया। महिला ने तीन किलोग्राम स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। बच्चे को अलग वार्ड में रखा गया है। उसकी 24 घंटे बाद कोविड की जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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उन्होंने बताया कि चिकित्सालय में प्रसव कराने वाला पहला कोविड पॉजिटिव केस 12 मई को आया था वह भी प्रतापगढ़ का था और 100वां केस भी वहीं से आया। 100 केसों में सबसे बड़ी बात जो सामने आई कि जन्म के दौरान शिशुओं में संक्रमण की संभावना मात्र दो फीसदी है। यहां 100 केसों में दो बच्चे जन्म के तुरंत बाद कोविड संक्रमित पाए गए। हालांकि, ऐसे बच्चों की रिकवरी भी बहुत तेज होती है। सुखद बात यह भी है कि इतने केस होने के बाद अभी तक प्रसव कराने वाली कोविड पॉजिटिव महिलाओं की कोई शिकायत सामने नहीं आई।
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