यूपी: पीईटी में ग्राफ और डीआई के प्रश्नों ने उलझाया, 75 फीसदी रही उपस्थिति
पहली पाली में गणित के ग्राफ और डाटा इंटरप्रिटेशन (डीआई) के प्रश्न उलझाऊ रहे, जबकि दूसरी पाली में प्रश्नों का स्तर सामान्य रहा। हिंदी-अंग्रेजी के लंबे पैराग्राफ ने अभ्यर्थियों का अधिक समय लिया, लेकिन उनसे जुड़े प्रश्न सरल थे।
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उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से आयोजित प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) में रविवार को भी गणित में ग्राफ और डाटा इंटरप्रिटेशन (डीआई) के सवालों ने अभ्यर्थियों को उलझाया। पहली पाली में 74 और दूसरी पाली में 75 फीसदी उपस्थिति रही। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़े विशेषज्ञ वागेश कुमार पांडेय के अनुसार सुबह 10 से दोपहर 12 की पहली पाली के मुकाबले अपराह्न तीन से शाम पांच बजे की दूसरी पाली का पेपर सरल रहा।
पहली पाली में गणित के ग्राफ और डाटा इंटरप्रिटेशन (डीआई) के प्रश्न उलझाऊ रहे, जबकि दूसरी पाली में प्रश्नों का स्तर सामान्य रहा। हिंदी-अंग्रेजी के लंबे पैराग्राफ ने अभ्यर्थियों का अधिक समय लिया, लेकिन उनसे जुड़े प्रश्न सरल थे। पहले और दूसरे दिन की परीक्षा ने संकेत दिए हैं कि अगली बार पीईटी की तैयारी के लिए अभ्यर्थियों को गणित में ग्राफ और डीआई के प्रश्नों की तैयारी पर अतिरिक्त ध्यान देने की जरूरत है। विशेषज्ञ आशुतोष तिवारी के अनुसार विज्ञान और अन्य विषयों से जुड़े सवाल भी सामान्य रहे और अभ्यर्थियों ने इन्हें आसानी से हल कर लिया। शनिवार के मुकाबले रविवार को दोनों पालियों के पेपर आसान रहे।
डीपी गर्ल्स इंटर कॉलेज में दूसरी पाली की परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थी प्रदीप कुमार का कहना है कि सामान्य अध्ययन में ज्यादातर सवाल करेंट अफेयर्स के थे, जो मई से अक्तूबर के बीच के घटनाक्रमों पर आधारित रहे। प्रयागराज के 64 केंद्रों में हुई पहली पाली की परीक्षा में पंजीकृत 30240 अभ्यर्थियों में से 22352 परीक्षार्थी (73.92 फीसदी) और दूसरी पाली की परीक्षा में पंजीकृत 30240 अभ्यर्थियों में से 22668 परीक्षार्थी (74.96 फीसदी) उपस्थित रहे।
पीईटी में अव्यवस्था के खिलाफ फूंका पुतला
प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) में अव्यवस्था का आरोप लगाते हुए एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने रविवार को छात्रसंघ भवन के सामने मुख्यमंत्री का पुतला फूंका। एनएसयूआई पूर्वी यूपी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि छात्र-छात्राओं के सेंटर तीन सौ किमी दूर तक बना दिए गए हैं। बसों-ट्रेनों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। छह लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। मांग की गई कि आगामी परीक्षाओं में छात्राओं के परीक्षा केंद्र उनके गृहजनपद में हों और छात्रों के लिए बेहतर एवं मुफ्त परिवहन की व्यवस्था की जाए। इस मौके पर आदर्श भदौरिया, सत्यम कुशवाहा, अजय पांडेय, हैप्पी पाल अरविंद यादव आदि मौजूद रहे।