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Prayagraj News: हड़बड़ी में आधे अधूरे जवाब तैयार करने पर सरकार की खिंचाई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 21 Feb 2024 03:26 AM IST
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Government pulled up for preparing half-baked answers in haste
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार की तरफ से जवाबी हलफनामा दाखिल करने में लापरवाही बरतने पर तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार के पास योग्य अधिवक्ताओं की कमी नहीं है। लेकिन, अक्सर देखा जा रहा अधिकांश जवाबी हलफनामे तैयार करने में लापरवाही बरती जा रही है। हलफनामों में जमानत अर्जियों के कथनों का दस्तावेज सहित माकूल जवाब नहीं दिया जाता। बहस के दौरान सरकारी वकील द्वारा सुसंगत दस्तावेज पेश करने के लिए समय की मांग की जाती है। यह चलन न केवल समय की बर्बादी है अपितु न्याय प्रशासन में अड़चन भी है।
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कोर्ट ने कहा कि राज्य के हितों की सुरक्षा की जिम्मेदारी बड़े अधिकारियों की है। वे ऐसा तंत्र विकसित करें जिससे जवाबी हलफनामे उद्देश्य की पूर्ति करने वाले तैयार किए जाए। कोर्ट ने कहा अपर महाधिवक्ता ने विस्तृत बहस की किंतु जवाबी हलफनामे में उनकी बहस का समर्थन करने वाले दस्तावेज ही नहीं थे। इस पर बेहतर हलफनामा दाखिल करने के लिए उन्होंने समय मांगा। सुनवाई तीन मार्च के लिए स्थगित की गई है।
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न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने शुआट्स नैनी के डायरेक्टर विनोद बिहारी लाल की जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान उत्पन्न स्थिति को देखते हुए यह टिप्पणी की है। मामले में 20 जून 2023 को शिकायतकर्ता स्कूटी से प्रयागराज के पुराने नैनी पुल पर जा रहा था। पीछे से दो बाइक पर सवार चार लोगों ने देशी पिस्टल दिखाकर कर लाल बंधुओं के खिलाफ फतेहपुर केस वापस न लेने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। बाइक की टक्कर से स्कूटी गिरा दी। शिकायतकर्ता घायल होकर बेहोश हो गया। उसे जानने वालों ने नैनी के अस्पताल में भर्ती कराया। वहां पर आई पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। याची का कहना था कि घटना के तीन माह बाद दर्ज शिकायतकर्ता के पूरक बयान से उसे झूठा फंसाया गया है। घटना पर कुछ अन्य के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
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कोर्ट ने कहा कि सरकार की तरफ से दाखिल जवाबी हलफनामे में डाॅक्टर के बयान सहित अन्य दस्तावेज नहीं हैं। जबकि, उनको लेकर अपर महाधिवक्ता ने बहस की। हड़बड़ी में आधा अधूरा जवाबी हलफनामा तैयार कर दाखिल कर दिया गया। कोर्ट ने कहा अक्सर ऐसा देखा जा रहा है कि बहस के समय सरकारी वकील दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय मांगते हैं। जबकि, जवाबी हलफनामा तैयार करते समय ही सारे कथनों का जवाब दस्तावेज के साथ दाखिल करना चाहिए। कोर्ट ने बेहतर हलफनामा मांगा और कहा सही जवाबी हलफनामा तैयार करने का तंत्र तैयार किया जाए।
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