गन्ना किसानों को ब्याज के भुगतान पर सरकार राजी, हाईकोर्ट में दिया गया हलफनामा
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चीनी मिलों को गन्ना की सप्लाई करने के बाद वर्षों भुगतान का इंतजार करने वाले गन्ना किसानों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश सरकार विलंब से हुए भुगतान पर किसानों को ब्याज देने के लिए राजी हो गई है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने नौ मार्च 2017 के आदेश का अनुपालन करने का आश्वासन दिया है। शुक्रवार को गन्ना आयुक्त की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि सरकार घाटे वाली चीनी मिलों से सात प्रतिशत और फायदे वाली मिलों से 12 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान कराएगी। राज्य के किसानों के बकाए पर ब्याज करीब 2000 करोड़ रुपये है, जिसे सपा की तत्कालीन अखिलेश सरकार ने माफ कर दिया था। बकाया भुगतान 2011 से चार वर्षों का है।
ब्याज माफी के खिलाफ राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कहा गया कि किसान गन्ना की बुआई के लिए बैंक से कर्ज लेता है। जब उसे समय पर चीनी मिलें भुगतान नहीं करती हैं तो किसान को बैंक को ब्याज देना पड़ता है। इस स्थिति में विलंब से हुए भुगतान पर किसान भी ब्याज का हकदार है। हाईकोर्ट ने इस दलील को मंजूर करते हुए नौ मार्च 2017 को सरकार को ब्याज के भुगतान का आदेश दिया था।
सरकार ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया तो वीएम सिंह ने अवमानना याचिका दाखिल की। 25 फरवरी को राज्य सरकार ने हलफनामे में कहा कि वह ब्याज का भुगतान नहीं कर पाएगी। इस पर न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने गन्ना आयुक्त को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि पांच अप्रैल तक कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं होता है तो गन्ना आयुक्त पर अवमानना का आरोप तय कर दिया जाएगा। इसके बाद राज्य के गन्ना आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने हलफ नामा देकर बकाया पर ब्याज देना स्वीकार कर लिया है। हलफनामे के अनुसार राज्य की जो चीनी मिलें फायदे में हैं, वे किसानों को बकाए पर 12 फीसदी का ब्याज तथा जो चीनी मिलें घाटे में चल रही है वे सात फीसदी ब्याज देंगी।
फैसले से 42 लाख किसानों को मिलेगा फायदा
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह ने बताया कि सरकार की मंजूरी के बाद राज्य के 42 लाख किसानों को फायदा होगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की ओर से यह स्वीकारोक्ति अदालत में केस दायर होने के 25 महीने बाद आई है। इसका सबसे बड़ा फायदा किसानों को यह होगा कि भविष्य में उनको विलंब से भुगतान होना बंद हो जाएगा क्योंकि चीनी मिलों को अब विलंब पर ब्याज देना होगा।
40.42 लाख किसान परिवारों का है बकाया
वीएम सिंह के मुताबिक राज्य के करीब 40 से 42 लाख किसान परिवारों का गन्ने का ब्याज बकाया है। अदालत ने साल 2011-12, 2012-13 और 2013-14 तथा 2014-15 के जिस बकाए पर ब्याज देने को कहा है वह रकम 2000 करोड़ रुपये से अधिक है।