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वेतन संरक्षण देना सरकार का नीतिगत निर्णय

Wed, 22 Apr 2020 12:39 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 22 Apr 2020 12:39 AM IST
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govermwnts policy decision on salary protection
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा कर्मचारियों को दिया जाने वाला वेतन संरक्षण का लाभ सरकार का नीतिगत निर्णय होता है। अदालतों को इसमें हस्तक्षेप करने का सीमित अधिकार है। हाईकोर्ट ने मेडिकल कॉलेज में नियुक्त एक प्रवक्ता की वेतन संरक्षण की मांग को खारिज करते हुए उनके हक में दिए एकल जज के आदेश से असहमति व्यक्त कर यूपी सरकार की विशेष अपील को मंजूर कर लिया। यह निर्णय हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विश्वनाथ सोमद्दर व न्यायमूर्ति डॉ. वाई के श्रीवास्तव की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार द्वारा एकल जज के आदेश के खिलाफ दाखिल विशेष अपील को मंजूर करते हुए दिया है।
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एकल जज ने झांसी मेडिकल कॉलेज में नियुक्त प्रवक्ता डॉ. राज कमल सिंह की वेतन संरक्षण की मांग को को मंजूर कर लिया था, जिसके खिलाफ सरकार ने विशेष अपील दो जजों के समक्ष दायर की थी। कोर्ट के समक्ष विचारणीय मुद्दा यह था कि क्या याची प्रवक्ता को 24 सितंबर 15 के शासनादेश के तहत उसकी नियुक्ति को देखते हुए वेतन संरक्षण का लाभ मिलेगा अथवा नहीं। मामले के अनुसार यूपी लोकसेवा आयोग द्वारा जारी विज्ञापन के तहत याची का चयन सर्वप्रथम 26 अगस्त 2015 को मेडिकल कॉलेज आजमगढ़ में हुआ। इसके तहत उसे एक माह में ज्वाइन करना था। याची ने ऐसा नहीं किया, बाद में उसे दोबारा नियुक्तिपत्र पूर्व के क्रम में 20 सितंबर 16 को जारी हुआ, जिसके आधार पर याची ने मेडिकल कॉलेज झांसी में प्रवक्ता के पद पर 7 अक्तूबर 16 को ज्वाइन कर लिया। वेतन संरक्षण के संबंध में जारी शासनादेश 24 सितंबर 15 के अनुसार वेतन संरक्षण का लाभ उन्हीं को मिलेगा, जिनकी नियुक्ति शासनादेश के बाद हुई है न कि पहले नियुक्ति प्राप्त सरकारी सेवक को। याची का कहना था कि उसकी नियुक्ति 20 सितंबर 16 की है, इस कारण वह उक्त शासनादेश के तहत वेतन संरक्षण का लाभ पाने का हकदार है। कोर्ट ने सरकार की दलील को स्वीकार कर कहा कि याची की पहली नियुक्ति आयोग के विज्ञापन के तहत 26 अगस्त 15 में मेडिकल कॉलेज आजमगढ़ में हुई थी और उसने वहां ज्वाइन नहीं किया। दोबारा नियुक्तिपत्र प्रथम नियुक्ति के क्रम में जारी हुआ है, ऐसे में यह माना जाएगा कि याची की पहली नियुक्ति शासनादेश के पहले की है। इस कारण शासनादेश के शर्तों के तहत वह वेतन संरक्षण का लाभ पाने का हकदार नहीं है।
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