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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Goddess Durga was bid farewell with the ritual of Sindoor Khela, blessings for eternal good fortune were sough

Prayagraj : सिंदूर खेला की रस्म के साथ की गई मां दुर्गा की विदाई, अखंड सौभाग्य का मांगा आशीष

Thu, 02 Oct 2025 01:34 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 02 Oct 2025 01:34 PM IST
सार

Shardiya Navratri 2025 : दुर्गा पूजा पंडालों में विजया दशमी यानी दशहरे के दिन मां की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। इसके पूर्व महिलाओं ने पंडालों में सिंदूर खेला का रस्म अदा किया।

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Goddess Durga was bid farewell with the ritual of Sindoor Khela, blessings for eternal good fortune were sough
प्रयागराज में मां दुर्गा की विदाई के पहले सिंदूर खेला की रस्म अदा करतीं सुहागिन महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

दुर्गा पूजा पंडालों में विजया दशमी यानी दशहरे के दिन मां की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। इसके पूर्व महिलाओं ने पंडालों में सिंदूर खेला का रस्म अदा किया। अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित किया। इसके बाद एक दूसरे को सिंदूर लगाकर अपने पतियों के लंबी उम्र की कामना की गई। ढोल नगाड़ों के बीच महिलाओं ने नृत्य करते हुए सिंदूर खेला का रस्म पूरा किया।

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मान्यता है कि इस रस्म करके महिलाएं मां से अखंड सौभाग्य और लंबी आयु का आशीर्वाद मांगती हैं। यह रस्म विजयादशमी के दिन मूर्तियों के विसर्जन से पहले की जाती है। शहर के सिविल लाइन, चौक, दरभंगा कॉलोनी, जार्जटाउन, मुट्ठीगंज, कटघर, रामबाग, बाईकाबाग, राजरूपपुर, धूमनगंज, सुलेमसराय, जानसेनगंज, कटरा, कटघर आदि स्थानों पर स्थापित दुर्गा पूजा पंडालों में सुबह से ही सिंदूर खेला का रस्म शुरू हो गया। 
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सिंदूर खेला की है पौराणिक मान्यता

दशहरे के दिन माता रानी के पंडालों में मौजूद महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं देती हैं। इसके साथ ही इस रस्म की शुरुआत होती है।  इस रस्म के दौरान महिलाएं एक दूसरे को सिंदूर लगाती हैं और धूमधाम से दुर्गा पूजा का समापन करती हैं। इसी परंपरा को सिंदूर खेला के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने सबसे पहले अपनी मांग में सिंदूर लगाया था, जब उन्होंने भगवान शिव से विवाह किया था। यह सिंदूर उनके सौभाग्य, समर्पण और शिव के प्रति प्रेम का प्रतीक बना। लाल रंग का सिंदूर मां पार्वती की ऊर्जा को भी दर्शाता है। यही कारण है कि सिंदूर लगाने से मां पार्वती से अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद मिलता है।
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