{"_id":"575332094f1c1b2a46108d19","slug":"girish-shukla-krcna-killed-in-terrorist-attack","type":"story","status":"publish","title_hn":"आतंकी हमले में करछना के गिरीश शुक्ला शहीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आतंकी हमले में करछना के गिरीश शुक्ला शहीद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 05 Jun 2016 01:28 AM IST
विज्ञापन
आतंकी हमले में जवान शहीद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर बिजबिहाड़ा इलाके में शुक्रवार को बीएसएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में करछना के सुलमई गांव के बीएसएफ जवान गिरीश कुमार शुक्ला (45) शहीद हो गए। वह पंजाब के फरीदपुर से जम्मू-कश्मीर में पोस्टिंग होने के बाद श्रीनगर जा रहे थे। रास्ते में 23 वाहनों के काफिले पर हमला हो गया था। आतंकियों के घात लगाकर किए गए हमले में तीन जवान शहीद हुए थे।
स्वर्गीय प्रभुनाथ शुक्ला के बेटे गिरीश कुमार शुक्ला का कुछ समय पहले तबादला हुआ था। छुट्टी काटने के बाद वह ड्यूटी ज्वायन करने जा रहे थे। शनिवार सुबह शहीद होने की सूचना बीएसएफ की ओर से करछना थाने में दी गई। इसके बाद एसओ करछना अशोक कुमार सिंह ने घरवालों को जानकारी दी तो कोहराम मच गया। पास-पड़ोस के लोग जवान के घर पर शोक संवेदना जताने जुटने लगे। आतंकी हमले में गिरीश शुक्ला के शहीद होने की जानकारी दे रात तक उनकी पत्नी कविता और मां को नहीं दी गई थी। हालांकि उन्हें इस बात की आहट है। अचानक से घर और पड़ोस के लोगों में हलचल देखकर उन्हें शक है।
लेकिन सच्चाई से अंजान हैं। शहीद जवान के पिता की कई साल पहले ही मौत हो चुकी है। शहीद जवान के तीन बेटे हैं। बड़ा बेटा राघवेंद्र शुक्ल भी बीएसएफ में है। इन दिनों उसकी पोस्टिंग मेघालय में है। वह भी सुबह तक गांव पहुंच जाएगा। दूसरे नंबर का बेटा नैनी के एक कॉलेज से बीफार्मा की पढ़ाई कर रहा है। जबकि छोटा बेटा अभी 11 वीं का छात्र है। जवान का शव प्लेन से दिल्ली लाया गया। वहां से सड़क मार्ग से भोर में गांव पहुंचेगा। रविवार सुबह अरैल घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
स्वर्गीय प्रभुनाथ शुक्ला के बेटे गिरीश कुमार शुक्ला का कुछ समय पहले तबादला हुआ था। छुट्टी काटने के बाद वह ड्यूटी ज्वायन करने जा रहे थे। शनिवार सुबह शहीद होने की सूचना बीएसएफ की ओर से करछना थाने में दी गई। इसके बाद एसओ करछना अशोक कुमार सिंह ने घरवालों को जानकारी दी तो कोहराम मच गया। पास-पड़ोस के लोग जवान के घर पर शोक संवेदना जताने जुटने लगे। आतंकी हमले में गिरीश शुक्ला के शहीद होने की जानकारी दे रात तक उनकी पत्नी कविता और मां को नहीं दी गई थी। हालांकि उन्हें इस बात की आहट है। अचानक से घर और पड़ोस के लोगों में हलचल देखकर उन्हें शक है।
विज्ञापन
लेकिन सच्चाई से अंजान हैं। शहीद जवान के पिता की कई साल पहले ही मौत हो चुकी है। शहीद जवान के तीन बेटे हैं। बड़ा बेटा राघवेंद्र शुक्ल भी बीएसएफ में है। इन दिनों उसकी पोस्टिंग मेघालय में है। वह भी सुबह तक गांव पहुंच जाएगा। दूसरे नंबर का बेटा नैनी के एक कॉलेज से बीफार्मा की पढ़ाई कर रहा है। जबकि छोटा बेटा अभी 11 वीं का छात्र है। जवान का शव प्लेन से दिल्ली लाया गया। वहां से सड़क मार्ग से भोर में गांव पहुंचेगा। रविवार सुबह अरैल घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार होगा।
विज्ञापन