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छोटे स्टेशनों पर ईटीएम से मिलेंगे जनरल टिकट
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Tue, 17 Mar 2015 11:53 PM IST
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राज्य परिवहन निगम की बसों में इस्तेमाल की जा रही ईटीएम की तरह रेलवे भी छोटे स्टेशनों पर इलेक्ट्रानिक टिकटिंग मशीन का प्रयोग शुरू करने जा रहा है। प्री-प्रिंटेड टिकटों की व्यवस्था को खत्म कर अनारक्षित टिकटों की बिक्री इन्हीं मशीनों से की जाएगी। इसके लिए रेलवे कर्मचारियों को हैंड हेल्ड टर्मिनल (एचएचटी) दिए जाएंगे। शुरुआत में इस प्रणाली का इस्तेमाल ई कैटेगरी और हॉल्ट स्टेशनों से शुरू किया जाएगा। बाद में इसे विस्तार भी दिया जा सकता है। सेंटर फॉर रेलवे इन्फार्मेशन सिस्टम ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
रेलवे के 16 जोनों में 57 सौ लोकेशन पर अनारक्षित टिकट प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही जनरल टिकटों के लिए ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (एटीवीएम), जनसाधारण टिकट बुकिंग सेवक (जेटीबीएस) और स्टेशन टिकट बुकिंग सेवक (एसटीबीएस) भी यात्रियों को अनारक्षित टिकट बांट रहे हैं। यह सभी सुविधाएं ए-1, ए, बी, सी, डी श्रेणी के स्टेशनों तक ही सीमित हैं। ई श्रेणी के स्टेशनों पर यूटीएस लगाने की शुरुआत हो चुकी है लेकिन एफ श्रेणी और हॉल्ट स्टेशनों पर अब भी प्रिंटेड टिकट का प्रयोग हो रहा है।
वहां यूटीएस मशीनें नहीं पहुंच सकी हैं। रेलवे अफसरों का तर्क है कि अनरिजर्व टिकटिंग प्रणाली (यूटीएस) की स्थापना में भारी खर्च और केबल कटने से होने वाली दिक्कतों को देखते हुए रेलवे नई व्यवस्था की जा रही है। अफसर बताते हैं कि ईटीएम प्रणाली जीपीआरएस आधारित होगी। डाटा ट्रांसफर के लिए जीपीआरएस का इस्तेमाल किया जाएगा। एचएचटी से बुक होने वाले हर टिकट के रिकार्ड सेंट्रल सर्वर में दर्ज होंगे। बाद में यह आंकड़े जोनल रेलवे को ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। अफसर मानते हैं कि ईटीएम से जनरल टिकटों की बिक्री होने पर बाद में इसका विस्तार किया जा सकता है।
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रेलवे के 16 जोनों में 57 सौ लोकेशन पर अनारक्षित टिकट प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही जनरल टिकटों के लिए ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (एटीवीएम), जनसाधारण टिकट बुकिंग सेवक (जेटीबीएस) और स्टेशन टिकट बुकिंग सेवक (एसटीबीएस) भी यात्रियों को अनारक्षित टिकट बांट रहे हैं। यह सभी सुविधाएं ए-1, ए, बी, सी, डी श्रेणी के स्टेशनों तक ही सीमित हैं। ई श्रेणी के स्टेशनों पर यूटीएस लगाने की शुरुआत हो चुकी है लेकिन एफ श्रेणी और हॉल्ट स्टेशनों पर अब भी प्रिंटेड टिकट का प्रयोग हो रहा है।
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वहां यूटीएस मशीनें नहीं पहुंच सकी हैं। रेलवे अफसरों का तर्क है कि अनरिजर्व टिकटिंग प्रणाली (यूटीएस) की स्थापना में भारी खर्च और केबल कटने से होने वाली दिक्कतों को देखते हुए रेलवे नई व्यवस्था की जा रही है। अफसर बताते हैं कि ईटीएम प्रणाली जीपीआरएस आधारित होगी। डाटा ट्रांसफर के लिए जीपीआरएस का इस्तेमाल किया जाएगा। एचएचटी से बुक होने वाले हर टिकट के रिकार्ड सेंट्रल सर्वर में दर्ज होंगे। बाद में यह आंकड़े जोनल रेलवे को ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। अफसर मानते हैं कि ईटीएम से जनरल टिकटों की बिक्री होने पर बाद में इसका विस्तार किया जा सकता है।
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