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Prayagraj News: सड़क के किनारे फेंके कूड़े में लगाई आग
Sat, 01 Nov 2025 01:47 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Sat, 01 Nov 2025 01:47 AM IST
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शाही। कचरा व पराली न जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश को नगर पंचायत प्रशासन मानने के लिए तैयार नहीं है। कर्मचारी कूड़े को न सिर्फ सड़क के किनारे फेंक रहे हैं बल्कि, इसमें आग भी लगा दे रहे हैं। इससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने के साथ ही यहां से गुजरने वाले राहगीर भी परेशान हो रहे हैं।
शुक्रवार को दोपहर के समय शाही-शेरगढ़ रोड पर मुक्ता प्रसाद डिग्री कॉलेज के नजदीक बड़ी मात्रा में कूड़ा जलता मिला। सड़क से गुजरते राहगीर धुएं की वजह से खांसते दिखे। नाक व मुंह पर कपड़ा लगाकर लोग यहां से गुजरे। विद्यार्थी भी परेशान रहे।
स्थानीय लोगों ने बताया कि नगर पंचायत प्रशासन कचरे का सही से प्रबंधन नहीं कर रहा है। एमआरएफ सेंटर के कर्मचारी कचरा क्षमता से अधिक आने पर इसे सड़क के किनारे फेंक देते हैं। इस कचरे में खाने की तलाश में छुट्टा पशु भी इकट्ठा होते हैं। इनके सड़क पर आने से हादसे की आशंका बनी रहती है।
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एमआरएफ सेंटर पर मौजूद कर्मचारियों ने भी बताया कि नगर पंचायत की ओर से कोई स्थान नियत न होने की वजह से सड़क के किनारे अतिरिक्त कूड़ा फेंकना हमारी मजबूरी है। एमआरएफ सेंटर पर मौजूद अधिकांश मशीनें भी पिछले छह से आठ महीनों से जंग खा रही हैं। इस मामले में जब अधिशासी अधिकारी पुष्पेंद्र राठौर को कॉल की गई तो उन्होंने मीटिंग में होने की बात कहकर कॉल काट दी।
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शुक्रवार को दोपहर के समय शाही-शेरगढ़ रोड पर मुक्ता प्रसाद डिग्री कॉलेज के नजदीक बड़ी मात्रा में कूड़ा जलता मिला। सड़क से गुजरते राहगीर धुएं की वजह से खांसते दिखे। नाक व मुंह पर कपड़ा लगाकर लोग यहां से गुजरे। विद्यार्थी भी परेशान रहे।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि नगर पंचायत प्रशासन कचरे का सही से प्रबंधन नहीं कर रहा है। एमआरएफ सेंटर के कर्मचारी कचरा क्षमता से अधिक आने पर इसे सड़क के किनारे फेंक देते हैं। इस कचरे में खाने की तलाश में छुट्टा पशु भी इकट्ठा होते हैं। इनके सड़क पर आने से हादसे की आशंका बनी रहती है।
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एमआरएफ सेंटर पर मौजूद कर्मचारियों ने भी बताया कि नगर पंचायत की ओर से कोई स्थान नियत न होने की वजह से सड़क के किनारे अतिरिक्त कूड़ा फेंकना हमारी मजबूरी है। एमआरएफ सेंटर पर मौजूद अधिकांश मशीनें भी पिछले छह से आठ महीनों से जंग खा रही हैं। इस मामले में जब अधिशासी अधिकारी पुष्पेंद्र राठौर को कॉल की गई तो उन्होंने मीटिंग में होने की बात कहकर कॉल काट दी।