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गंगा के बाद यमुना भी खतरे के निशान को पार

Sun, 21 Aug 2016 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 21 Aug 2016 01:51 AM IST
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Ganga Yamuna crossed the danger mark
मानसून
इलाहाबाद। गंगा के बाद शनिवार को यमुना भी खतरे के निशान को पार कर गईं। इससे शहर के कई और नए इलाकों में पानी अंदर तक घुस गया है। दोनों नदियों ने अपनी रफ्तार भी बढ़ा ली है। शुक्रवार तक जहां दोनों नदियां प्रति घंटे एक सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहीं थी वहीं शनिवार को दोनों की रफ्तार दो सेंटीमीटर प्रति घंटा हो गई। अंदेशा जताया जा रहा है कि ऐसी स्थिति आने वाले चार दिनों तक बनी रहेगी। क्योंकि बुंदेलखंड स्थित माताटीला डैम से शनिवार को जहां सवा चार लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है, वहीं रविवार को पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की बात कही जा रही है। इससे यमुना नदी के किनारे बसे कई नए इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी से गंगा का पानी संगम से नहीं निकल नहीं पाएगा। बारिश के चलते इसमें बढ़ोत्तरी भी जारी है। उधर, मध्य प्रदेश में हो रही बारिश से टोंस नदी भी उफान पर है। इससे सिरसा में ओवर फ्लो बना रहेगा, जिसके चलते दोनों नदियों का बहाव सामान्य नहीं हो पाएगा।
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गंगा में 41 सेमी तो यमुना में 61 सेमी की बढ़ोत्तरी
इलाहाबाद । खतरे के निशान को पार कर चुकीं गंगा पिछले 26 घंटे के दौरान (शनिवार रात आठ बजे तक) फाफामऊ में 41 सेंटीमीटर बढ़ी हैं जबकि छतनाग में 41 सेंटीमीटर की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। शाम छह बजे फाफामऊ में गंगा का जलस्तर यहां 85.220 मीटर पर पहुंच गया था जबकि छतनाग में गंगा का जलस्तर 84.530 मीटर रिकार्ड किया गया। वहीं, शनिवार को यमुना के जलस्तर में 48 सेमी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यमुना का जलस्तर 85.100 मीटर पर पहुंच गया है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार सिंह कहते हैं कि दोनों नदियाें में उफान जारी हैं और यह अभी बढ़ता रहेगा।  
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 खतरे का निशान - 84.734 मीटर
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जलस्तर की रिपोर्ट (शाम छह बजे तक)
फाफामऊ में - 85.220 मीटर
छतनाग में  - 84.530
यमुना नैनी में - 85.100

आपात स्थिति में इन नंबरों पर करें काल
-  प्रशासन कंट्रोल रूम 253-2641577
- टोल फ्री नंबर-1077
- बाढ़ नियंत्रण कछ-0532-2641577

बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए इन नंबरों पर करें संपर्क
अपर जिलाधिकारी नगर - 9454417809 (शहरी क्षेत्र के लिए)
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व - 9454417588 (ग्रामीण क्षेत्रों के लिए )
अपर जिलाधिकारी नजूल             - 9454417811 (ग्रामीण क्षेत्रों के लिए )

दाह संस्कार करना हुआ मुश्किल
गंगा, यमुना के उफान पर होने से लोगों का दाह संस्कार भी मुश्किल हो गया है। इलाहाबाद और उसके आसपास के जिलों के लोग झूंसी, दारागंज, रसूलाबाद और फाफामऊ के घाटों पर पहुंचते थे लेकिन जबसे बाढ़ आई है तबसे मुश्किलें बढ़ गई हैं। रसूलाबाद घाट पर पानी तीन सौ मीटर अंदर तक तक घुस आया है। इससे वहां अंतिम संस्कार होना बंद हो गया है। यही हाल दारागंज घाट पर भी है। लोग शास्त्री ब्रिज के नीचे अंतिम संस्कार कर रहे थे लेकिन बाढ़ की स्थिति बनने से यहां आना बंद कर दिए हैं। जो लोग अंत्येष्टि के लिए पहुंच भी रहे हैं, उन्हें आबादी के बीच बंधा पर ही दाह संस्कार करना पड़ रहा है। शनिवार को ऐसा नजारा देखने को भी मिला। बाढ़ की वजह से ज्यादातर लोग दाह संस्कार के लिए फाफामऊ और झूंसी ही पहुंच रहे हैं लेकिन वहां भी समस्या है। भीड़ अधिक होने से दाह संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
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मवेशियों ने सड़कों पर बनाया बसेरा
पानी के लगातार बढ़ने से न केवल लोगों के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है बल्कि मवेशियों के जीवन पर भी संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ वाले इलाकों में मवेशी निचले वाले इलाकों से निकलकर ऊंचाई वाले इलाकों में शरण लिए हुए हैं। तेलियरगंज, शिवकुटी, राजापुर, अशोकनगर, छोटा बघाड़ा, दारागंज, गऊघाट, झूंसी, करेली, करेलाबाग समेत कई इलाकों में ऐसा देखा जा सकता है। 

त्वचा वाली बीमारियों ने बोला हमला
बाढ़ की चपेट में आने से त्वचा वाली बीमारियों ने हमला बोल दिया है। लोगों के शरीर में दाने निकलना, खुजली, चकत्ते पड़ना जैसी समस्याएं हो रही हैं। जुकाम, बुखार का भी प्रकोप फैला हुआ है। लोग डायरियां की चपेट में भी आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऐसे लोगों को दवाएं बांटी जा रही हैं। जिला संक्रामक रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. एन मिश्र ने बताया कि दवाओं के वितरण के लिए शहर के साथ ग्रामीण इलाकों में 35 टीमों को लगाया गया है। 000000

विद्युत आपूर्ति ठप होने से लोगों में बढ़ा आक्रोश
बाढ़ वाले इलाकों में विद्युत आपूर्ति ठप होने से लोगों में आक्रोश भी है। पॉवर कॉरपोरेशन की ओर से जिन इलाकों में बाढ़ का प्रकोप है, उसके पूरे इलाके की आपूर्ति को एहतियातन ठप कर दिया गया है। लोग विद्युत उपकेंद्रों पर पहुंचकर शिकायत दर्ज करा रहे हैं। विद्युत अधिकारी उन्हें धैर्य रखने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि आपूर्ति होने से किसी भी वक्त हादसा हो सकता है। जैसे ही बाढ़ का खतरा समाप्त होगा आपूर्ति को बहाल कर दिया जाएगा। 

 महबूब अली इंटर कॉलेज में लंच पैकेट बंद
जिला प्रशासन की ओर से शहर में बनाए गए पांच राहत शिविरों में से एक महबूब अली इंटर कॉलेज में शनिवार की सुबह शरणार्थियों को लंच पैकेट देना बंद कर दिया गया है। शरणार्थियों को वहीं पर खाना बनाकर खिलाया जाएगा। जिला प्रशासन की ओर से यह आदेश स्थानीय लेखपाल को दिया गया है। यहां पर डेढ़ सौ से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं। हालांकि एनी बेसेंट सहित दूसरे राहत शिविरों में ऐसा पहले से ही हो रहा है। 

बढ़ाई गई राहत शिविरों की संख्या
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से राहत शिविरों की संख्या बढ़ा दी गई है। पहले पांच राहत शिविर बनाए गए थे लेकिन शनिवार को स्थिति को देखते हुए शिविरों की संख्या सात कर दी गई है। इन शिविरों में एक हजार से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं। प्रशासन की ओर से खाने-पीने के साथ सभी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था कर दी गई है। 

छोटा बघाड़ा में नावों के ले जाने पर रोक
जिला प्रशासन की ओर से छोटा बघाड़ा में बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकलाने के लिए जाने वालीं नावों पर रोक लगा दी गई है। वहां पर बड़ी संख्या में निर्माणाधीन मकान हैं। उन मकानों में बड़ी-बड़ी लोहे की छड़े निकली हुई हैं। ऐसे स्थानों पर नावें जाएंगी तो उनके फंसने की आशंका ज्यादा है। 2013 की बाढ़ में दो नावें क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसी के चलते ऐसा किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने बेली, राजापुर समेत बाढ़ वाले तमाम इलाकों के आउटर वाले मकानों में फंसे लोग को बाहर निकालने के लिए नावों को भेज रहा है। 

नावों से निकलकर लोग जा रहे काम करने
बाढ़ वाले इलाकों में फंसे हजारों लोग सुबह प्रशासन की नावों से निकलकर काम पर जा रहे हैं और शाम को फिर उन्हीं नावों से अपने घरों में लौट जा रहे हैं। सिविल डिफेंस के रविशंकर द्विवेदी कहते हैं कि उनकी टीम बाढ़ वाले इलाकों में लोगों की मदद के लिए नावों से गश्त कर रही है। शनिवार को डेढ़ सौ से अधिक लोगों को बाहर भी निकाला गया। इनमें से बहुत से लोग ऐसे थे जिन्हें अपने काम पर जाना था। शाम को फिर वे नावों के जरिए अपने मकान में पहुंच गए। जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए 198 नावों का संचालन करा रही है। इसके अलावा एनडीआरएफ की 35 सदस्यीय टीम काम कर रही है।


बख्शी बांध में कटान वाले स्थान पर लगाई गईं बोरियां
गंगा के तेज प्रवाह से बख्शी बांध में शुक्रवार की सुबह रिंग रोड के दाई ओर आई कटान पर शनिवार को भी काम जारी रहा। कटान के स्थान पर दिन भर बोरियां डाली जाती रहीं। इस स्थान पर सात मीटर तक कटान होने की बात कही जा रही है। शुक्रवार को इस कटान से हड़कंप मच गया था। हालांकि सिंचाई विभाग के अफसरों ने वहां पत्थर और बालू की बोरियां लगाई तो कटान बंद हो गया। शनिवार को उस पर और बोरियां लगाई गईं, जिससे की दोबारा कटान न हो।
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