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संगम के पास रामघाट पर गंगा जल में कीडे़
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 22 Dec 2017 12:54 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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संगम क्षेत्र मेें रामघाट के पास बने पांटून पुल के नीचे गंगाजल में कीड़े मिले हैं। संगम आने वाले श्रद्धालुओं और साधु-संतों में इस बात को लेकर रोष है। अभी दो दिन पहले दारागंज में मोरी नाले के पास गंगाजल काला दिखा था। यह मामला अभी ठंडा भी नहीं हो पाया था कि बृहस्पतिवार को रामघाट के पास गंगाजल में लाल-लाल कीड़े दिखे। यहां जल में गंध भी आ रही है। साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन मेला शुरू होने से पहले साफ गंगाजल उपलब्ध नहीं करा पाया तो स्नान पर्व का बहिष्कार करेंगे।
माघ मेले की शुरुआत दो जनवरी को पौष पूर्णिमा के साथ हो रही है। ऐसे में गंगाजल में कीड़े मिलना प्रशासन एवं सिंचाई विभाग के लिए चुनौती है। गंगा जल में कीड़ा मिलना, कुंभ मेला-2019 की ब्रांडिंग में लगी प्रदेश सरकार के लिए भी झटका है। वहीं संतों ने प्रशासन से तत्काल गंगा में पानी छोड़ने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पांटून पुल बनाने और चकर्ड प्लेट बिछाने भर से ही मेला पूरा नहीं होगा।
गंगा जल कीड़े मिलने की घटना के बाद प्रयाग पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन मले की व्यवस्था के लिए इस प्रकार से उदासीन रहेगा तो देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं में प्रयाग की क्या छवि बनेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मेले में साफ गंगाजल नहीं मिला तो साधु-संत स्नान का बहिष्कार करेंगे। माघ मेले की प्रधान समिति त्रिवेणी संस्था कल्याण महासमिति के अध्यक्ष फूलचंद दुबे ने बताया कि उन्होंने स्वयं रामघाट के पास गंगाजल में कीड़े देखे। उनका कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि वह मेले की अन्य व्यवस्थाओं के साथ साफ जल भी उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि यदि साफ गंगा जल नहीं मिला तो स्नान का बहिष्कार किया जाएगा। वहीं सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता मनोज कुमार सिंह का कहना है कि रामघाट में पुल के नीचे पानी रुक जाता है, इसलिए वहां कीड़े हो सकते हैं। हालांकि, बहते जल में कीड़े पड़ने की कोई संभावना नहीं है।
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माघ मेले की शुरुआत दो जनवरी को पौष पूर्णिमा के साथ हो रही है। ऐसे में गंगाजल में कीड़े मिलना प्रशासन एवं सिंचाई विभाग के लिए चुनौती है। गंगा जल में कीड़ा मिलना, कुंभ मेला-2019 की ब्रांडिंग में लगी प्रदेश सरकार के लिए भी झटका है। वहीं संतों ने प्रशासन से तत्काल गंगा में पानी छोड़ने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पांटून पुल बनाने और चकर्ड प्लेट बिछाने भर से ही मेला पूरा नहीं होगा।
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गंगा जल कीड़े मिलने की घटना के बाद प्रयाग पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन मले की व्यवस्था के लिए इस प्रकार से उदासीन रहेगा तो देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं में प्रयाग की क्या छवि बनेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मेले में साफ गंगाजल नहीं मिला तो साधु-संत स्नान का बहिष्कार करेंगे। माघ मेले की प्रधान समिति त्रिवेणी संस्था कल्याण महासमिति के अध्यक्ष फूलचंद दुबे ने बताया कि उन्होंने स्वयं रामघाट के पास गंगाजल में कीड़े देखे। उनका कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि वह मेले की अन्य व्यवस्थाओं के साथ साफ जल भी उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि यदि साफ गंगा जल नहीं मिला तो स्नान का बहिष्कार किया जाएगा। वहीं सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता मनोज कुमार सिंह का कहना है कि रामघाट में पुल के नीचे पानी रुक जाता है, इसलिए वहां कीड़े हो सकते हैं। हालांकि, बहते जल में कीड़े पड़ने की कोई संभावना नहीं है।
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