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गंगा-जमुना तहजीब को मिला सम्मान 

Wed, 10 Aug 2016 02:44 AM IST
सरिता, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
सरिता, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 10 Aug 2016 02:44 AM IST
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मशहूर गायिका शुभा मुद्गल भले ही दिल्ली की हो गईं हों, लेकिन उनका दिल इलाहाबाद में रचा-बसा है। राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार के लिए उनके नाम की घोषणा पर उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उस्ताद बिस्मिल्ला खां, लता मंगेश्कर जैसे महान कलाकारों को मिल चुका है। इस सम्मान के लिए उनका चुना जाना उनके लिए गौरव की बात है। कहा, यह सम्मान कला की शक्ति को मिला है, गंगा-जमुना तहजीब को मिला है। 
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अमर उजाला के साथ बातचीत में अपनी खुशी का इजहार करते हुए बोलीं, इलाहाबाद से उनका नाता पुराना है। इलाहाबाद उनके रोम-रोम में बसा है। यहां उनका बचपन बीता, संगीत से नाता जुड़ा है। एक सवाल के जवाब में कहा, इलाहाबाद को यदाकदा याद करने की जरूरत नहीं, क्योंकि याद उसे किया जाता है जो भुला दिया गया हो। उनकी पहचान ही बतौर इलाहाबादी है। 
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शुभा मुद्गल ने शास्त्रीय संगीत के साथ गायकी के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। इस उपलब्धि का श्रेय वह अपने गुरु पंडित रामाश्रय झा को देती हैं। बताया कि उनसे जो कुछ सीखा उसी पूंजी की बदौलत लोगों का बेपनाह प्यार उनको मिला है। संगीत प्रेमियों को मोहने वाले ‘अली मोरे अंगना’, ‘अबके सावन’ जैसे गीतों की गायिका शुभा का मानना है कि देश में सामाजिक सौहार्द हमेशा से बना था और बना ही रहेगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने मशहूर पाकिस्तानी गायक गुलाम अली के साथ हुए बर्ताव को अनुचित ठहराया। कहा, जब उन्हें वीजा दिया गया तो मेहमाननवाजी की जानी चाहिए थी। अगर ऐसा नहीं किया जा सकता तो वीजा ही ना दिया जाता। 
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