माघ के साथ ही खत्म हुआ गंगा मुद्दा
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माघ मास पर्यंत संगम की रेती पर मुखर गंगा की अविरलता, निर्मलता का मुद्दा माघी पूर्णिमा स्नान के साथ समाप्त हो गया। संत-महात्मा उज्जैन महाकुंभ के लिए प्रस्थान कर गए। गंगा की अविरलता-निर्मलता को लेकर बड़े-बडे़ दावे, घोषणाएं की गईं, लेकिन मेला बीतने के साथ ही मुद्दे भी गंगा में बह गए।
यह बात अलग है कि बीते माघ मेला के दौरान गंगा आंदोलनों की घोषणा करने के बजाए संत-महात्मा केंद्र सरकार के नमामि गंगे मिशन पर सवालिया निशान अपने मंचों से उठाते रहे।
ज्योतिष एवं द्वारकाशारदापीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारी शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के गंगा सेवा अभियानम का अभियान प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजने तक सीमित रहा। उनका कहना है कि गंगा पर बांध केंद्र सरकार बना रही है। गंगा को प्रदूषण से मुक्त कराने की पहल सरकार को ही करनी चाहिए। केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना ने निराश ही किया है। सरकार नदी के आसपास के वातावरण को बतौर पिकनिक स्पॉट विकसित करने पर ही जोर दे रही है, जबकि गंगा को प्रदूषणमुक्त करने के लिए उसकी अविरलता जरूरी है। इस बावत पीएम मोदी को लगातार पत्र भी भेजा जा रहा है लेकिन उनकी ओर से कोई उत्तर नहीं मिला।
पुरीपीठाधीश्वर शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती की आदित्यवाहिनी ने भी गंगा के मुद्दे पर इस बार खामोशी ही बरती। दंडीबाड़ा प्रबंधन समिति के प्रवक्ता आचार्य कुशमुनि का कहना है कि गंगा के महात्म्य को जन-जन तक पहुंचाने का काम संतों ने ही सनातन से किया है माघ मेला में उन्होंने अपने दायित्व का निर्वाह किया है।
इस बार माघ मेला में आए संतों महंतों का जोर त्रिवेणी आरती, गंगा आरती पर ही रहा। गंगा सेवा अभियानम की ओर से संगम तट पर 31 पीठिका से राजोपचार आरती हुई। गंगा सेना की ओर से बहुपात्रों से आरती की गई। वहीं अखिल भारतीय दंडी संन्यासी प्रबंधन समिति के पदाधिकरियों की ओर से मोरी मार्ग गंगा तट पर आरती की गई। संगम की रेती पर माघी पूर्णिमा स्नान कर कल्पवासी प्रस्थान कर गए हैं। त्रिजटा स्नान से ‘पूर्ण कल्पवास’ की मान्यता वाले संत, श्रद्धालु बुधवार को संगम स्नान के बाद ही रेती से विदा लेंगे। खाक चौक के महामंत्री सतुआबाबा संतोषदास के मुताबिक जिस प्रकार ‘तीर्थक्षेत्रे कृतं पापं बज्र लेपो भविष्यति’ यानी तीर्थक्षेत्र में किया गया पाप बज्रलेप की भांति कभी नहीं मिटता, उसी प्रकार त्रिजटा स्नान के बाद ‘तीर्थक्षेत्रे कृतं पुण्यं बज्र लेपो भविष्यति’ यानी तीर्थक्षेत्र में किए गए पुण्य का भी बज्रलेप की भांति कभी क्षय नहीं होता है।
श्रीमद्आर्यावर्त विद्वत्परिषद की ओर से बायोवेद संस्थान के सभागार में मंगलवार को स्वामी ओंकारानंद सरस्वती को सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया गया। अध्यक्ष डॉ. रामजी मिश्र ने शाल, श्रीफल देकर अभिनंदन किया। संचालन डॉ. शम्भूनाथ त्रिपाठी अंशुल, स्वागत दुकान जी और आभार बायोवेद के निदेशक डॉ. बीके यादव ने व्यक्त किया। इस मौके पर डॉ. बाबू लाल मिश्र, वाचस्पति मिश्र, डॉ. भागवत प्रसाद मिश्र, राधारमण पांडेय आदि उपस्थित रहे।