शिल्प कला : गणपति के आठ हजार से अधिक रूप रचकर सीता बनीं गणेशी अम्मा
गणेशोत्सव के बीच गणेशी अम्मा के गणपति की खूब मांग हो रही है। 87 वर्षीया अम्मा के जज्बे, जोश और जुनून को आप देखते रह जाएंगे। वह किसी को निराश नहीं करतीं। जो भी उनके पास विघ्नहर्ता की मूरत पाने की लालसा से आता है, उसे वह खाली हाथ नहीं जाने देतीं।
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मेहनतकशों ने पत्थरों को इस तरह कसा कि घबरा के पत्थरों ने अजंता उगल दिया...। पत्थरों को तराश कर जिस तरह शिल्पकारों ने कभी अजंता- एलोरा का उपहार दुनिया को दिया, उसी तरह अल्लापुर की सीता श्रीवास्तव रद्दी कागज, दफ्ती पर गणपति के स्वरूपों को आकार दे रही हैं। अब तक 8300 गणपति के रूपों को बनाकर दान करने वालीं सीता गणेशी अम्मा के नाम से जानी जाती हैं।
गणेशोत्सव के बीच गणेशी अम्मा के गणपति की खूब मांग हो रही है। 87 वर्षीया अम्मा के जज्बे, जोश और जुनून को आप देखते रह जाएंगे। वह किसी को निराश नहीं करतीं। जो भी उनके पास विघ्नहर्ता की मूरत पाने की लालसा से आता है, उसे वह खाली हाथ नहीं जाने देतीं। सुबह से शाम तक वह अपनी धुन में रमी रहती हैं। आंखों के सामने सिर्फ गणेश के रूपों की परिकल्पना को साकार करने की जिद रहती है। गणपति बनाने और फिर लोगों को दान करने वाली गणेशी अम्मा के रद्दी कागज से बनाए गणेश देश में ही नहीं दुनिया के कई देशों में सुख-समृद्धि के प्रतीक बने हुए हैं।
सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता रहे एलएन श्रीवास्तव की पत्नी सीता श्रीवास्तव सूखे मेवे, कागज के अलावा नारियल और दफ्ती पर रंगों, धागों, सूखे मेवे के छिलकों और कलावा की मदद से गणेश की आकृतियां रचती हैं। गृहिणी के तौर पर घर में रहने वाली सीता बताती हैं कि करीब 16 साल पहले एक दिन घर पर पूजा के दौरान हाथ में बांधे जाने वाले कलावा (रक्षासूत्र) को देखकर गणेश की आकृति उकेरने की कल्पना मन में आई। फिर क्या था उन्होंने दो नारियल मंगाए। एक बड़ा और दूसरा छोटा।
कलावा की मदद से ही दोनों नारियलों पर उन्होंने गणपति की आकृति बना डाली। इसको परिवार के सदस्यों से लेकर पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने खूब सराहा। इसके बाद वह तरह-तरह के प्रयोग कर गणपति बनाने और लोगों को भेंट करने की मुहिम में जुट गईं।
सीता श्रीवास्तव के बनाए गणेश दुनिया के कई देशों में मंगलमूर्ति के रूप में सुख-समृद्धि प्रदान कर रहे हैं। वह बताती हैं कि टैगोर टाउन की उनकी सहेली इंदिरा स्वरूप के बेटे विकास स्वरूप को उन्होंने अपनी गणेश प्रतिमा भेंट की है। इनके अलावा कनाडा में कृष्णा शाही के पुत्र के अलावा विदेश में रहने वाली शशि जौहरी और शांति मिश्रा भी उनके गणपति को पूज रही हैं।
पिस्ता के छिलके से अम्मा बनातीं हैं गणेश की आंख
गणेशी अम्मा पिस्ता के छिलके से गणेश भगवान की आंख बनाती हैं। इसी तरह कागज से सूंड़ और चतुर्भुज रूप बनाकर तरह-तरह के रंग भरकर आकार देना उनका शौक है। उनके द्वाराबनाए गणपति हजारों घरों की शोभा बने हुए हैं।