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Prayagraj News: इविवि के छात्रों को गांधी दिलाएंगे रोजगार
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान में सत्र 2024-25 से ‘गांधी विचार एवं शांति अध्ययन’ विषय पर शुरू होने जा रहे परास्नातक (पीजी) पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाले छात्रों को महात्मा गांधी को नजदीक से समझने का मौका मिलेगा और यह विषय उन्हें रोजगार दिलाने में भी सहायक होगा। स्थापना के 63 वर्षों बाद इस संस्थान में कोई पाठ्यक्रम शुरू होने जा रहा है।
इस दो वर्षीय पाठ्यक्रम में पीजी प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दाखिले लिए जाएंगे। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 30 सीटें निर्धारित की गई हैं। यह पाठ्यक्रम रोजगार के मामले में भी छात्रों के लिए उपयोगी साबित होगा। मानवाधिकार आयोग में गांधी विचार एवं शांति अध्ययन की पढ़ाई करने वालों को प्राथमिकता दी जाती है। वहीं, समाज कल्याण से जुड़े सरकारी और गैर सरकारी संगठनों में भी इस विषय को काफी महत्व दिया जाता है।
यूएनओ और यूनेस्को में भी गांधी विचार एवं शांति अध्ययन विषय को प्राथमिकता दी जाती है। इस विषय से अभ्यर्थी यूजीसी नेट और जेआरएफ भी कर सकते हैं। वहीं, इस विषय के अभ्यर्थी राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र जैसे विषयों में शिक्षक भर्ती के लिए भी आवेदन कर सकते हैं, क्योंकि इन विषयों में गांधी विचार एवं शांति अध्ययन को जगह दी जाती है।
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स्थापना के 63 वर्षों बाद संस्थान के मिले दो स्थायी शिक्षक
कुलपति प्रो.संगीता श्रीवास्तव के प्रयासों का नतीजा है कि इस संस्थान को अपनी स्थापना के 63 वर्षों बाद स्थायी शिक्षक के रूप में दो असिस्टेंट प्रोफेसर मिले। भविष्य में दो अन्य पदों पर भी भर्ती प्रस्तावित है। शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति के कारण ही संस्थान में एमए का पाठ्यक्रम शुरू किए जाने का रास्ता साफ हो सका। दो वर्षीय का पाठ्यक्रम जिन शिक्षकों ने तैयार किया है, उनमें हिंदी विभाग के शिक्षक एवं संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो.संतोष भदौरिया की प्रमुख भूमिका रही।
मदर टेरेसा ने रखी थी गांधी भवन की आधार शिला
गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान की स्थापना तो वर्ष 1961 में ही हो गई थी, लेकिन इसके परिसर ‘गांधी भवन’ की आधारशिला वर्ष 1976 में नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा ने रखी थी। इसके बाद यहां मोरार ही देसाई, सीमांत गांधी जैसी हस्तियां आईं। महादेवी वर्मा और सुमित्रानंद पंत भी अक्सर यहां आया करते थे। हिंदी के जाने-माने उपन्यासकार जैनेंद्र कुमार भी यहां आ चुके हैं।
80 क्रेडिट के होंगे चार सेमेस्टर
पाठ्यक्रम दो साल की अवधि का है और इसे चार सेमेस्टर में विभाजित किया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य नए शिक्षार्थी को सामाजिक उत्थान, सामाजिक कार्यों के लिए गांधीवादी अध्ययन, शांति संघर्ष प्रबंधन में सैद्धांतिक और व्यावहारिक अनुसंधान से परिचित कराना है। चार सेमेस्टर के कुल क्रेडिट 80 हैं। प्रत्येक सेमेस्टर 20 क्रेडिट का है और प्रत्येक पाठ्यक्रम चार क्रेडिट का है। पहले एवं दूसरे सेमेस्टर में पांच मुख्य पाठ्यक्रम हैं और तीसरे एवं चौथे सेमेस्टर में चार मुख्य पाठ्यक्रम है। प्रत्येक में तीन वैकल्पिक पाठ्यक्रम हैं।
सेमेस्टवार सिलेबस
(प्रथम सेमेस्टर)
गांधीवादी दर्शन, शांति अध्ययन का परिचय और संघर्ष एवं संघर्ष समाधान विधियों को समझने पर पांच बुनियादी मुख्य पाठ्यक्रम शामिल हैं।
(द्वितीय सेमेस्टर)
गांधीवादी पाठ, महात्मा गांधी के राजनीतिक दर्शन, प्रमुख शांति विचारकों और शांति कार्यकर्ताओं पर मुख्य पेपर से संबंधित है। शांति और अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं शांति का गांधीवादी दर्शन।
(तृतीय सेमेस्टर)
गांधीवादी अर्थशास्त्र, गांधी और ग्रामीण विकास, वैश्विक शासन और शांति निर्माण पर मुख्य पाठ्यक्रम और अनुसंधान पद्धति पर भी मुख्य पाठ्यक्रम शामिल हैं। वैकल्पिक पाठ्यक्रमों में गांधी और उनके समकालीन, नारीवादी शांति सिद्धांत और भारतीय शांति आंदोलन शामिल हैं।
(अंतिम सेमेस्टर)
गांधीवादी शिक्षा, भारत और विश्व में शांति आंदोलन, मानवाधिकार, सुरक्षा और विकास पर मुख्य पाठ्यक्रम शामिल हैं। अंतिम सेमेस्टर में अनुभवजन्य पद्धति के माध्यम से शिक्षार्थियों के अनुसंधान कौशल में सुधार करने के लिए शोध प्रबंध, परियोजना, सर्वेक्षण आदि के रूप में परियोजना कार्य के रूप में एक मुख्य पाठ्यक्रम भी शामिल है। राजनीतिक विचारों में शांति और संघर्ष परिप्रेक्ष्य, विश्व शांति में समकालीन मुद्दे और सामाजिक विज्ञान में अकादमिक लेखन पर वैकल्पिक पाठ्यक्रम भी शामिल हैं।
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इस दो वर्षीय पाठ्यक्रम में पीजी प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दाखिले लिए जाएंगे। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 30 सीटें निर्धारित की गई हैं। यह पाठ्यक्रम रोजगार के मामले में भी छात्रों के लिए उपयोगी साबित होगा। मानवाधिकार आयोग में गांधी विचार एवं शांति अध्ययन की पढ़ाई करने वालों को प्राथमिकता दी जाती है। वहीं, समाज कल्याण से जुड़े सरकारी और गैर सरकारी संगठनों में भी इस विषय को काफी महत्व दिया जाता है।
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यूएनओ और यूनेस्को में भी गांधी विचार एवं शांति अध्ययन विषय को प्राथमिकता दी जाती है। इस विषय से अभ्यर्थी यूजीसी नेट और जेआरएफ भी कर सकते हैं। वहीं, इस विषय के अभ्यर्थी राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र जैसे विषयों में शिक्षक भर्ती के लिए भी आवेदन कर सकते हैं, क्योंकि इन विषयों में गांधी विचार एवं शांति अध्ययन को जगह दी जाती है।
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स्थापना के 63 वर्षों बाद संस्थान के मिले दो स्थायी शिक्षक
कुलपति प्रो.संगीता श्रीवास्तव के प्रयासों का नतीजा है कि इस संस्थान को अपनी स्थापना के 63 वर्षों बाद स्थायी शिक्षक के रूप में दो असिस्टेंट प्रोफेसर मिले। भविष्य में दो अन्य पदों पर भी भर्ती प्रस्तावित है। शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति के कारण ही संस्थान में एमए का पाठ्यक्रम शुरू किए जाने का रास्ता साफ हो सका। दो वर्षीय का पाठ्यक्रम जिन शिक्षकों ने तैयार किया है, उनमें हिंदी विभाग के शिक्षक एवं संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो.संतोष भदौरिया की प्रमुख भूमिका रही।
मदर टेरेसा ने रखी थी गांधी भवन की आधार शिला
गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान की स्थापना तो वर्ष 1961 में ही हो गई थी, लेकिन इसके परिसर ‘गांधी भवन’ की आधारशिला वर्ष 1976 में नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा ने रखी थी। इसके बाद यहां मोरार ही देसाई, सीमांत गांधी जैसी हस्तियां आईं। महादेवी वर्मा और सुमित्रानंद पंत भी अक्सर यहां आया करते थे। हिंदी के जाने-माने उपन्यासकार जैनेंद्र कुमार भी यहां आ चुके हैं।
80 क्रेडिट के होंगे चार सेमेस्टर
पाठ्यक्रम दो साल की अवधि का है और इसे चार सेमेस्टर में विभाजित किया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य नए शिक्षार्थी को सामाजिक उत्थान, सामाजिक कार्यों के लिए गांधीवादी अध्ययन, शांति संघर्ष प्रबंधन में सैद्धांतिक और व्यावहारिक अनुसंधान से परिचित कराना है। चार सेमेस्टर के कुल क्रेडिट 80 हैं। प्रत्येक सेमेस्टर 20 क्रेडिट का है और प्रत्येक पाठ्यक्रम चार क्रेडिट का है। पहले एवं दूसरे सेमेस्टर में पांच मुख्य पाठ्यक्रम हैं और तीसरे एवं चौथे सेमेस्टर में चार मुख्य पाठ्यक्रम है। प्रत्येक में तीन वैकल्पिक पाठ्यक्रम हैं।
सेमेस्टवार सिलेबस
(प्रथम सेमेस्टर)
गांधीवादी दर्शन, शांति अध्ययन का परिचय और संघर्ष एवं संघर्ष समाधान विधियों को समझने पर पांच बुनियादी मुख्य पाठ्यक्रम शामिल हैं।
(द्वितीय सेमेस्टर)
गांधीवादी पाठ, महात्मा गांधी के राजनीतिक दर्शन, प्रमुख शांति विचारकों और शांति कार्यकर्ताओं पर मुख्य पेपर से संबंधित है। शांति और अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं शांति का गांधीवादी दर्शन।
(तृतीय सेमेस्टर)
गांधीवादी अर्थशास्त्र, गांधी और ग्रामीण विकास, वैश्विक शासन और शांति निर्माण पर मुख्य पाठ्यक्रम और अनुसंधान पद्धति पर भी मुख्य पाठ्यक्रम शामिल हैं। वैकल्पिक पाठ्यक्रमों में गांधी और उनके समकालीन, नारीवादी शांति सिद्धांत और भारतीय शांति आंदोलन शामिल हैं।
(अंतिम सेमेस्टर)
गांधीवादी शिक्षा, भारत और विश्व में शांति आंदोलन, मानवाधिकार, सुरक्षा और विकास पर मुख्य पाठ्यक्रम शामिल हैं। अंतिम सेमेस्टर में अनुभवजन्य पद्धति के माध्यम से शिक्षार्थियों के अनुसंधान कौशल में सुधार करने के लिए शोध प्रबंध, परियोजना, सर्वेक्षण आदि के रूप में परियोजना कार्य के रूप में एक मुख्य पाठ्यक्रम भी शामिल है। राजनीतिक विचारों में शांति और संघर्ष परिप्रेक्ष्य, विश्व शांति में समकालीन मुद्दे और सामाजिक विज्ञान में अकादमिक लेखन पर वैकल्पिक पाठ्यक्रम भी शामिल हैं।