Prayagraj : महाकुंभ-2025 की परियोजनाओं में द्वादश माधव सर्किट शामिल, संत लंबे समय से कर रहे थे मांग
प्रयाग के प्रधान देवता के रूप में भगवान माधव के द्वादश स्वरूपों तक श्रद्धालु आसानी से पहुंच सकें, इसके लिए पहली बार सर्किट का निर्माण कराया जाएगा। आने वाले महाकुंभ से पहले इसे पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है।
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महाकुंभ-2025 के मद्देनजर देश-दुनियां के संतों-भक्तों को तीर्थाटन के रूप में द्वादश माधव सर्किट की सौगात मिलेगी। इस सर्किट का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इस आध्यात्मिक सर्किट में तीर्थ परिक्रमा के साथ ही पर्यटन की मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा। यह सर्किट करीब 125 किमी लंबी होगी।
प्रयाग के प्रधान देवता के रूप में भगवान माधव के द्वादश स्वरूपों तक श्रद्धालु आसानी से पहुंच सकें, इसके लिए पहली बार सर्किट का निर्माण कराया जाएगा। आने वाले महाकुंभ से पहले इसे पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि इस सर्किट के लिए जमीनी स्तर पर अभी बहुत काम करना बाकी है। सबसे बड़ी चुनौती है माधव मंदिरों के आसपास बड़े पैमाने पर अतिक्रमण।
झूंसी में शंख माधव तक पहुंचने के लिए तो सीधा रास्ता ही नहीं है। सदाफल आश्रम से होकर वहां जाना पड़ता है। इसी तरह नैनी में गदा माधव भी अतिक्रमण के घेरे में हैं। वहां तक जाने के लिए महज एक फीट चौड़ा ही रास्ता बचा है। ऐसे कई माधव स्वरूपों के तीर्थ हैं, जहां बिना अतिक्रमण हटाए सर्किट का निर्माण कराना संभव नहीं हो पाएगा। फिलहाल इस सर्किठ पर काम करने के लिए मंडलायुक्त संजय गोयल की ओर से पर्यटन विभाग को निर्देश दिया गया है।
फिलहाल द्वादश माधव मंदिरों के आसपास न तो सफाई का प्रबंध है, ना मंदिर तक पहुंचने के लिए मार्ग ही अभी तक दुरुस्त हो पाए हैं। मंदिर परिसरों में प्रसाधन का भी अभाव है। फिलहाल द्वादश माधव मंदिर उपेक्षित ही हैं। अब जब योगी सरकार ने इन मंदिरों का सर्किट के रूप में विकास करने की योजना बनाई है, तब नए सिरे से वहां की टूटी सड़कों की मरम्मत कराने के साथ ही इन प्राचीन मंदिरों में बेंच, हैंडपंप, सोलर लाइट, शौचालय, शेड बनाने की योजना पर काम शुरू हुआ है। पद्म माधव, असि माधव, अनंत माधव, आदिमाधव मंदिर अभी भी उपेक्षा का शिकार हैं।
अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि सर्किट के स्वरूप पर सीएम से करेंगे मुलाकात
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने द्वादश माधव सर्किट के निर्माण पर खुशी जताई है। उनका कहना है कि इसके लिए वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और सीएम योगी को कई बार प्रस्ताव दे चुके हैं। फिर भी द्वादश माधव मंदिरों की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत कष्टकारी है। माधव मंदिरों का जीर्णोद्धार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं चाहते हैं। अखाड़ा परिषद के सुझाव पर उन्होंने बजट पहले भी पास किया था। अब इस सर्किट के स्वरूप को लेकर वह मुख्यमंत्री से जल्द ही मुलाकात करेंगे।
द्वादश माधव की महिमा पौराणिक काल से
मान्यता है कि त्रेतायुग में महर्षि भारद्वाज के नेतृत्व में परिक्रमा होती थी। लेकिन, धीरे-धीरे परिक्रमा का दौर समाप्त हो गया। मुगल और अंग्रेजी शासनकाल में द्वादश माधव के मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया। देश को आजादी मिलने के बाद संत प्रभुदत्त ब्रह्माचारी ने भ्रमण करके द्वादश माधव की खोज की। फिर शंकराचार्य निरंजन देवतीर्थ ने धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के साथ 1961 में माघ मास में द्वादश माधव की परिक्रमा आरंभ कराई। संतों और भक्तों ने तीन दिन में परिक्रमा पूरी की।
संगम की रक्षा के लिए भगवान माधव ने किया था राक्षसों से युद्ध
पौराणिक मान्यता है कि प्रयागराज में संगम की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने द्वादश स्वरूप धारण किए थे। इनमें से कुछ मंदिर विलुप्त हो चुके हैं। मान्यता है कि भगवान माधव ने प्रयाग में अवतरित होकर गंगा, यमुना और सरस्वती को बचाने के लिए राक्षसों से युद्ध कर उनका वध किया था। बाद में राक्षसों से पवित्र संगम की रक्षा के लिए भगवान माधव 12 रूपों में प्रयागराज में विराजमान हुए। जिन्हें द्वादश माधव मंदिर के रूप में जाना जाता है।