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पीएमएस डॉक्टरों का शासन के खिलाफ मोर्चा
अमर उजाला ब्यूरो,कौशाम्बी
Updated Tue, 18 Sep 2018 01:32 AM IST
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प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ (पीएमएस) के डॉक्टरों ने लंबित मांगों को पूरा करने के लिए शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वेतन-भत्ते की विसंगतियां जल्द दूर न हुईं तो सरकारी डॉक्टर काम से विरत होंगे। संघ के पदाधिकारियों ने आंदोलन की चेतावनी देते हुए मांगों को अविलंब पूरा करने की मांग उठाई है।
पीएमएस एसोसिएशन की मांग है कि सातवें वेतन आयोग के क्रम में मूल वेतन का 35 प्रतिशत प्रैक्टिस बंदी भत्ता एक जनवरी 2016 से दिया जाए। वर्षों से लंबित विभागीय प्रोनत्तियां, प्रैक्टिस बंदी भत्ता, विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनकी योग्यता के मुताबिक विशेष वेतन, ग्रामीण भत्ता, वाहन भत्ता, दंत सवर्ग के चिकित्सकों को भी विशेष एसीपी का लाभ, कार्य के घंटे का निर्धारण, विकल्प के साथ आयु बढ़ाना, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, पीपीपी मोड, संविदा कर्मियों का वेतन निर्धारण समेत अन्य मांगों पर तुरंत निर्णय लिया जाए।
संघ की स्थानीय इकाई के महामंत्री डॉ. कमलाकर सिंह के मुताबिक विसंगतियों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। विशेषज्ञों को सामान्य एमबीबीएस डॉक्टरों के समकक्ष रखा गया है। पेट्रोल के दाम हर दिन बढ़ रहे हैं, लेकिन महीने का भत्ता 1600 दिया जा रहा है। अस्पतालों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। पोस्टमार्टम ड्यूटी में भी खामियां हैं। रात को पोस्टमार्टम न कराया जाए। ऐसी कई दिक्कतें काम में बाधा है। शासन ने जल्द निर्णय न लिया तो संघ आंदोलन कर सेवाएं बाधित करने को बाध्य होगा। इस संबंध में सोमवार को बेली अस्पताल में हुई बैठक में प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार यादव, महामंत्री डॉ. अमित सिंह की ओर से जारी मांग पत्र पर स्थानीय शाखा अध्यक्ष डॉ. एमएम त्रिपाठी ने विचार व्यक्त किए।
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पीएमएस एसोसिएशन की मांग है कि सातवें वेतन आयोग के क्रम में मूल वेतन का 35 प्रतिशत प्रैक्टिस बंदी भत्ता एक जनवरी 2016 से दिया जाए। वर्षों से लंबित विभागीय प्रोनत्तियां, प्रैक्टिस बंदी भत्ता, विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनकी योग्यता के मुताबिक विशेष वेतन, ग्रामीण भत्ता, वाहन भत्ता, दंत सवर्ग के चिकित्सकों को भी विशेष एसीपी का लाभ, कार्य के घंटे का निर्धारण, विकल्प के साथ आयु बढ़ाना, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, पीपीपी मोड, संविदा कर्मियों का वेतन निर्धारण समेत अन्य मांगों पर तुरंत निर्णय लिया जाए।
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संघ की स्थानीय इकाई के महामंत्री डॉ. कमलाकर सिंह के मुताबिक विसंगतियों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। विशेषज्ञों को सामान्य एमबीबीएस डॉक्टरों के समकक्ष रखा गया है। पेट्रोल के दाम हर दिन बढ़ रहे हैं, लेकिन महीने का भत्ता 1600 दिया जा रहा है। अस्पतालों में सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। पोस्टमार्टम ड्यूटी में भी खामियां हैं। रात को पोस्टमार्टम न कराया जाए। ऐसी कई दिक्कतें काम में बाधा है। शासन ने जल्द निर्णय न लिया तो संघ आंदोलन कर सेवाएं बाधित करने को बाध्य होगा। इस संबंध में सोमवार को बेली अस्पताल में हुई बैठक में प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार यादव, महामंत्री डॉ. अमित सिंह की ओर से जारी मांग पत्र पर स्थानीय शाखा अध्यक्ष डॉ. एमएम त्रिपाठी ने विचार व्यक्त किए।
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