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आईटी के पर्चे में हिंदी-अंग्रेजी भाषा में पूछे प्रश्नों के अर्थ अलग-अलग
Fri, 21 Feb 2020 06:49 PM IST
विनोद सिंह
डॉ. अखिलेश मिश्र, अमर उजाला, प्रयागराज
डॉ. अखिलेश मिश्र, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 21 Feb 2020 06:49 PM IST
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सीबीएसई
- फोटो : अमर उजाला
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आईटी (इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी) के पेपर में हिंदी और अंग्रेजी भाषा में प्रश्न के अलग-अलग अर्थ निकलने से सीबीएसई दसवीं के परीक्षार्थी असमंजस में दिखे। बृहस्पतिवार को हुई परीक्षा में 10 वां सवाल था ‘आत्म विश्वास को प्रभावित करने वाले किन्हीं चार कारकों की सूची बनाइए’। वहीं, अंग्रेजी माध्यम में इसी पेपर में 10 वां सवाल था ‘लिस्ट एनी टू फैक्टर्स दैट एफेक्ट सेल्फ कान्फीडेंस’। यूपी बोर्ड की ओर से इंटरमीडिएट सामान्य हिंदी में गलत सवाल पूछने के बाद सीबीएसई ने भी परीक्षार्थियों से गलत सवाल पूछा है।
जगत तारन गोल्डन जुबली, वाईएमसीए केंद्र से परीक्षा देकर निकले छात्रों ने बताया कि आईटी के प्रश्न संख्या 10 में हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम के अलग-अलग अर्थ निकल रहे हैं। छात्रों ने बताया कि हिंदी माध्यम में सवाल था कि आत्मविश्वास को प्रभावित करनेवाले किन्हीं चार कारकों की सूची बनाइए, वहीं अंग्रेजी माध्यम वाले परीक्षार्थियों से केवल दो कारक पूछे गए। बोर्ड की ओर से इस प्रकार गलती देखकर परीक्षार्थी परेशान रहे कि उन्हें चार कारक लिखना है या दो कारक।
परीक्षार्थियों ने जब कक्ष निरीक्षक से इस बारे में सवाल किया तो उनका कहना था कि वह जिस माध्यम से परीक्षा दे रहे हैं, उसी से जुड़े सवाल का उत्तर दें। देश की सर्वोच्च परीक्षा संस्था की ओर से इस प्रकार से प्रश्नपत्र के हिंदी और अंग्रेजी वर्जन में अलग-अलग प्रश्न पूछे जाने पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। वरिष्ठ मनोविज्ञानी डॉ. कमलेश तिवारी का कहना है कि बोर्ड की ओर से इस प्रकार से सवाल पूछने से परीक्षार्थियों का मनोबल प्रभावित होता है। सीबीएसई के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि प्रश्नपत्र की जांच के बाद बोर्ड के विशेषज्ञ इस संबंध में निर्णय लेंगे कि आखिर इस प्रश्न के बारे में क्या करना है।
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जगत तारन गोल्डन जुबली, वाईएमसीए केंद्र से परीक्षा देकर निकले छात्रों ने बताया कि आईटी के प्रश्न संख्या 10 में हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम के अलग-अलग अर्थ निकल रहे हैं। छात्रों ने बताया कि हिंदी माध्यम में सवाल था कि आत्मविश्वास को प्रभावित करनेवाले किन्हीं चार कारकों की सूची बनाइए, वहीं अंग्रेजी माध्यम वाले परीक्षार्थियों से केवल दो कारक पूछे गए। बोर्ड की ओर से इस प्रकार गलती देखकर परीक्षार्थी परेशान रहे कि उन्हें चार कारक लिखना है या दो कारक।
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परीक्षार्थियों ने जब कक्ष निरीक्षक से इस बारे में सवाल किया तो उनका कहना था कि वह जिस माध्यम से परीक्षा दे रहे हैं, उसी से जुड़े सवाल का उत्तर दें। देश की सर्वोच्च परीक्षा संस्था की ओर से इस प्रकार से प्रश्नपत्र के हिंदी और अंग्रेजी वर्जन में अलग-अलग प्रश्न पूछे जाने पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। वरिष्ठ मनोविज्ञानी डॉ. कमलेश तिवारी का कहना है कि बोर्ड की ओर से इस प्रकार से सवाल पूछने से परीक्षार्थियों का मनोबल प्रभावित होता है। सीबीएसई के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि प्रश्नपत्र की जांच के बाद बोर्ड के विशेषज्ञ इस संबंध में निर्णय लेंगे कि आखिर इस प्रश्न के बारे में क्या करना है।
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