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Prayagraj News: सीजीएचएस का सॉफ्टवेयर बदलने से महंगी पड़ रहीं मुफ्त दवाएं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Apr 2025 01:56 AM IST
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Free medicines are getting costlier due to change in CGHS software
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) में नया सॉफ्टवेयर लागू किए जाने से मरीजों का रजिस्ट्रेशन, दवा वितरण और ओपीडी संचालन मुश्किल हो गया है। मरीजों के साथ डॉक्टर भी परेशान हैं। हालांकि, सीजीएचएस प्रशासन का दावा है कि एक हफ्ते में व्यवस्था पूरी तरह से पटरी पर आ जाएगी।
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सीजीएचएस की डिस्पेंसरियों में केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनरों व आश्रितों मुफ्त ओपीडी व दवाओं की सुविधा मिलती है। साथ ही संबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाती है। सीजीएचएस के स्टोर में अगर दवा नहीं है तो इंडेंट के माध्यम से दवाएं बाजार से मंगाकर मरीजों को वितरित की जाती हैं। प्रयागराज में सीजीएचएस की सात डिस्पेंसरियों में तकरीबन एक लाख लाभार्थी पंजीकृत हैं।
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पूर्व में सीजीएचएस में एनआईसी का सॉफ्टवेयर काम करता था लेकिन बेहतर कार्यप्रणाली व पारदर्शी व्यवस्था के लिए एनआईसी की जगह सी-डैक का सॉफ्टवेयर लागू कर दिया गया है। सॉफ्टवेयर पर काम होने के कारण 26 अप्रैल (शनिवार) को सीजीएचएस की डिस्पेंसरियां बंद थीं और दवा एवं ओपीडी के लिए पहुंचे मरीजों को नोटिस देखकर खाली हाथ लौटना पड़ा।
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इसके बाद 27 अप्रैल को रविवार का साप्ताहिक अवकाश था और 28 अप्रैल (सोमवार) को डिस्पेंसरी खुलने पर नए सॉफ्टवेयर के माध्यम से मरीजों का रजिस्ट्रेशन करने में दिक्कत आ रही थी। जिन मरीजों का जैसे-तैसे रजिस्ट्रेशन हुआ, उन्हें ओपीडी में दिक्कत हुई। डॉक्टरों को कंप्यूटर के माध्यम से दवा लिखनी होती है। सॉफ्टवेयर ठीक से काम न करने कारण डॉक्टर भी जूझते नजर आए।
रजिस्ट्रेशन व ओपीडी के लिए लंबी लाइन
- कर्मचारियों व डॉक्टरों के लिए सॉफ्टवेयर नया है, सो डिस्पेंसरियों में काम भी बहुत धीमे हो गया है और ऐसे में रजिस्ट्रेशन काउंटर व ओपीडी में मरीजों की लंबी लाइन लग रही है। इनमें बड़ी संख्या पेंशनरों की है, जिन्हें भीषण गर्मी में दवा के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
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डॉक्टरों को नए सिरे से लिखनी पड़ रहीं दवाएं
- सीजीएचएस आने वाले ऐसे मरीजों की संख्या काफी अधिक है, जिन्हें डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, गठिया, हृदय रोग, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हैं और इनकी दवाओं की लिस्ट भी काफी लंबी होती है। मरीजों को डिस्पेंसरी से एक माह की दवा दी जाती है और शहर से बाहर जाने की स्थिति में दो से तीन माह तक की दवाएं भी उपलब्ध करा दी जातीं हैं। पहले लागू सॉफ्टवेयर में यह सुविधा थी कि कंप्यूटर पर मरीज की आईडी संख्या अंकित करते ही दवा का पुराना पर्चा कंप्यूटर स्क्रीन पर खुल जाता था और एक क्लिक पर दवाएं स्वीकृत हो जातीं थीं और मरीज उसका प्रिंट दिखाकर वितरण काउंटर से दवाएं लेते थे लेकिन नए सॉफ्टवेयर में पुराना पर्चा प्रदर्शित नहीं हाे रहा। डॉक्टरों को एक-एक दवा नए सिरे से लिखनी पड़ रही हैं और इसी वजह से ओपीडी में लंबी लाइन लग रही है।
इंडेंट न होने पर मरीज बाजार से खरीद रहे दवाएं
- जो महत्वपूर्ण व महंगी दवाएं सीजीएचएस के स्टाेर में उपलब्ध नहीं होती हैं, उन्हें इंडेंट के माध्यम से बाजार से मंगाया जाता है और मरीजों को उपलब्ध कराया जाता है। नए सॉफ्टवेयर में इंडेंट का कॉलम भी नहीं दिख रहा है। ऐसे में जिन मरीजों की दवाएं खत्म हो चुकी हैं, उन्हें बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रहीं हैं। इसके साथ ही डॉक्टरों द्वारा लिखी जा रहीं स्टोर में उपलब्ध दवाएं भी तकनीकी कारणों से वितरण काउंटर के कंप्यूटर पर प्रदर्शित नहीं हो रहीं, जिसकी वजह से मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रहीं हैं।
मरीजों को रेफर करने में भी दिक्कत
- सीजीएचएस की डिस्पेंसरियों से मरीजों को विशेषज्ञों या संबद्ध निजी अस्पतालों में रेफर किए जाने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन है। नए सॉफ्टवेयर से रेफर किए जाने की प्रक्रिया में भी बाधा आ रही है।
सॉफ्टवेयर के कई फायदे भी
- वितरण काउंटर से दवा लेने वाले का अब नाम व फोन नंबर भी दर्ज किया जाएगा, ताकि वितरण में किसी तरह की गड़बड़ी न हो
- एक बार दवा लेने के बाद रिकॉर्ड सॉफ्टवेयर पर उपलब्ध रहेगा और अगली बार आने पर मरीजों को दवा के लिए इंतजार नहीं करना होगा
- नए सॉफ्टवेयर के जरिये वितरित की गई दवाओं का पूरा रिकॉर्ड सरकार के पास भी उपलब्ध रहेगा और किसी तरह की धांधली नहीं होगी
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मरीजों से सहयोग के लिए लगाया नोटिस
- सीजीएचएस की सभी डिस्पेंसरियों के नोटिस बोर्ड पर मरीजों से सहयोग की अपील की गई। इस पर लिखा है कि हम एनआईसी आधारित सॉफ्टवेयर से सी-डैक आधारित सॉफ्टवेयर पर हस्तांतरित हो रहे हैं, इसलिए इस प्रक्रिया के दौरान कुछ तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं। आप सभी से निवेदन है कि स्थिति को समझते हुए डॉक्टरों और स्टाफ सदस्यों के साथ सहयोग करें।

वर्जन
‘पूरे देश में नया सॉफ्टवेयर लागू किया गया है। जो दिक्कतें आ रहीं हैं, उनके बारे में तुरंत संबंधित एजेंसी को सूचित किया जा रहा है। नए सॉफ्टवेयर ने 28 अप्रैल से काम करना शुरू किया है। पहले दिन जो दिक्कतें सामने आईं, उनमें से 80 फीसदी समस्याओं का निराकरण 29 अप्रैल तक कर लिया गया। एक हफ्ते के अंदर व्यवस्था पूरी तरह से पटरी पर आ जाएगी। मरीजों से सहयोग की अपील की गई है।’
डॉ. रितु अग्रवाल, अपर निदेशक, सीजीएचएस, प्रयागराज
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