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ओएमआर शीट में निर्धारित खाने से अधिक रोल नंबर पर अफरातफरी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 28 May 2018 01:07 AM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
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68500 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्रों पर तब अफरातफरी मच गई जब अभ्यर्थियों को मुहैया कराई गई ओएमआर शीट में रोल नंबर भरने के कॉलम संख्या में कम निकले। रोल नंबर 11 अंकों का और ओएमआर शीट पर 10 अंक के लिए ही जगह होने से अभ्यर्थी हल्ला मचाने लगे। हंगामा बढ़ने पर इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई। ऊपर से तय हुआ कि अभ्यर्थी ओएमआर शीट पर रोल नंबर भरने के लिए बने कॉलम के आगे एक अतिरिक्त कॉलम बढ़ाकर आखिरी अंक दर्ज कर दें। इसके बाद भी काफी देर तक अव्यवस्था की स्थिति बनी रही। कुछ परीक्षा केंद्रों से ऐसी भी सूचना आई कि अभ्यर्थियों ने कॉलम के हिसाब से रोल नंबर लिखने में पीछे का ही एक अंक छोड़ दिया। जबकि रोल नंबर का पहला अंक छोड़ने को कहा गया था।
परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय व एनआईसी के बीच समन्वय न होने से उक्त समस्या सामने आई है। इसे बड़ी चूक माना जा रहा है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय का कहना है कि दूसरी सभी परीक्षाओं में रोल नंबर 10 अंकों के होते हैं, लेकिन इस बार एनआईसी ने रोल नंबर की संख्या बढ़ाकर 11 कर दी और इस बदलाव से अवगत भी नहीं कराया। हालांकि विभाग द्वारा यह भी कहा जा रहा है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन मैनुअल कराया जाना है, ऐसे में अभ्यर्थियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है लेकिन, सवाल यह है कि इतनी अहम परीक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। साथ ही उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन अगर मैनुअल कराया जाना था तो फिर ओएमआर शीट की व्यवस्था लागू करने की क्या जरूरत थी। परीक्षा को लेकर लंबे समय से तैयारी चलने के बावजूद इस बड़ी अनदेखी से मामले के न्यायालय तक जाने की संभावना बढ़ गई है। भर्ती परीक्षा में शामिल चिंतित हैं कि कहीं उनकी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में दिक्कत न हो। कई परीक्षार्थियों ने सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकार को पत्र लिखकर अपनी आशंका से अवगत कराया है। उधर, कई प्रतियोगी छात्र संगठनों ने इसे मुद्दा बनाने का मन बनाया है।
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जिन परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों ने रोल नंबर नहीं भरा था, उन्हें आगे से एक अंक छोड़कर तथा जिन्होंने भरना शुरू कर दिया था, उनको पीछे एक खाना बढ़ाकर रोल नंबर पूरा करने को कहा गया था। इसके चलते कोई अभ्यर्थी इनवैलिड नहीं होगा। अभ्यर्थियों की संख्या कम है। सभी उत्तर पुस्तिकाओं को मैनुअल चेक भी कराया जाना है। अभ्यर्थियों को परेशान होने की बिलकुल जरूरत नहीं है।
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-सुत्ता सिंह, सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी
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परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय व एनआईसी के बीच समन्वय न होने से उक्त समस्या सामने आई है। इसे बड़ी चूक माना जा रहा है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय का कहना है कि दूसरी सभी परीक्षाओं में रोल नंबर 10 अंकों के होते हैं, लेकिन इस बार एनआईसी ने रोल नंबर की संख्या बढ़ाकर 11 कर दी और इस बदलाव से अवगत भी नहीं कराया। हालांकि विभाग द्वारा यह भी कहा जा रहा है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन मैनुअल कराया जाना है, ऐसे में अभ्यर्थियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है लेकिन, सवाल यह है कि इतनी अहम परीक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। साथ ही उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन अगर मैनुअल कराया जाना था तो फिर ओएमआर शीट की व्यवस्था लागू करने की क्या जरूरत थी। परीक्षा को लेकर लंबे समय से तैयारी चलने के बावजूद इस बड़ी अनदेखी से मामले के न्यायालय तक जाने की संभावना बढ़ गई है। भर्ती परीक्षा में शामिल चिंतित हैं कि कहीं उनकी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में दिक्कत न हो। कई परीक्षार्थियों ने सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकार को पत्र लिखकर अपनी आशंका से अवगत कराया है। उधर, कई प्रतियोगी छात्र संगठनों ने इसे मुद्दा बनाने का मन बनाया है।
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जिन परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों ने रोल नंबर नहीं भरा था, उन्हें आगे से एक अंक छोड़कर तथा जिन्होंने भरना शुरू कर दिया था, उनको पीछे एक खाना बढ़ाकर रोल नंबर पूरा करने को कहा गया था। इसके चलते कोई अभ्यर्थी इनवैलिड नहीं होगा। अभ्यर्थियों की संख्या कम है। सभी उत्तर पुस्तिकाओं को मैनुअल चेक भी कराया जाना है। अभ्यर्थियों को परेशान होने की बिलकुल जरूरत नहीं है।
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-सुत्ता सिंह, सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी