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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Fraud in the name of investment: Interim bail granted to the accused

High Court : निवेश के नाम पर ठगी: आरोपी को अंतरिम जमानत, जांच प्रगति रिपोर्ट हाईकोर्ट ने की तलब

Sat, 14 Feb 2026 05:30 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 14 Feb 2026 05:30 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निवेश के नाम पर ठगी के मामले में आरोपी को अंतरिम जमानत दे दी। कोर्ट ने कंपनी और उसके निदेशक के खिलाफ जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी है।

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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निवेश के नाम पर ठगी के मामले में आरोपी को अंतरिम जमानत दे दी। कोर्ट ने कंपनी और उसके निदेशक के खिलाफ जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी है। और मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी प्रस्तुत करने आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने प्रतापगढ निवासी आरोपी मोहम्मद वसीम को ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया।

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आरोपी के खिलाफ प्रयागराज के फूलपुर थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार आरोपी मोहम्मद वसीम ‘मातृ पितृ सहयोग एग्रोटेक लिमिटेड’ कंपनी का एजेंट था। आरोप है कि उसने पीड़ित और उसके परिवार को कंपनी में निवेश के लिए प्रेरित किया, जिस पर लगभग छह लाख रुपये जमा कराए गए। कंपनी की ओर से रसीदें और बॉन्ड जारी किए गए थे। बाद में कंपनी का कार्यालय बंद हो गया और निदेशक फरार हो गया, जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रदीप कुमार श्रीनेत और दीपांकर पांडे की ओर से दलील दी गई कि निवेश की राशि कंपनी को दी गई थी। याची ने स्वयं पांच लाख रुपये वापस कर दिए हैं। और शेष 3,30,000 रुपये (निवेश व ब्याज सहित) देने का आश्वासन दिया है। पैसे का हेरफेर कंपनी ने किया था। पुलिस ने न तो कंपनी के रोल की जांच की और न ही कंपनी के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया।

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इससे पहले कोर्ट ने 14 जनवरी 2026 को आरोपी को अंतरिम जमानत देते हुए शासकीय अधिवक्ता से कहा कि क्या कंपनी और उसके निदेशक के खिलाफ कोई जांच की गई। यदि नहीं, तो उसका कारण और वर्तमान स्थिति बताई जाए।

इस मामले में 29 जनवरी 2026 को विवेचक कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि पूर्व विवेचकों की ओर से कंपनी या उसके निदेशक के खिलाफ कोई जांच नहीं की गई। साथ ही चार्जशीट दाखिल होने तक छह विवेचक बदल चुके थे और बाद में तीन अन्य विवेचक नियुक्त किए गए। इस पर कोर्ट ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही पूछा कि कंपनी के खिलाफ जांच क्यों नहीं हुई और संबंधित विवेचकों के विरुद्ध क्या कार्रवाई प्रस्तावित है।

11 फरवरी 2026 को प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किया। हलफनामा में कहा गया कि कोर्ट के आदेश के बाद जांच कराई गई और गंगा नगर के डीसीपी से रिपोर्ट मांगी गई। रिपोर्ट में कई विवेचकों की गंभीर लापरवाही पाई गई। इस मामले से संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध जांच के आदेश दिए गए। साथ ही कंपनी और उसके निदेशक के खिलाफ आगे की जांच के लिए आवश्यक अभिलेख प्राप्त करने हेतु संबंधित न्यायालय में प्रार्थना पत्र दायर किया गया है।

कोर्ट ने मामले को 26 फरवरी 2026 के लिए सूचीबद्ध करते हुए अपर शासकीय अधिवक्ता से कहा कि अगली तिथि पर कंपनी और उसके निदेशक के खिलाफ जांच की प्रगति रिपोर्ट तथा लापरवाह विवेचकों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का परिणाम प्रस्तुत किया जाए।

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