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स्थापना दिवसः इलाहाबाद विश्वविद्यालय सरस्वती का प्रतीक
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Foundation Day: Allahabad University Saraswati symbol
- फोटो : CITY DESK
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प्रयागराज। कौन कहता है कि संगमनगरी में सरस्वती अदृश्य हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय सरस्वती का ही प्रतीक है। सरस्वती यहां के हर शख्स के भीतर हैं। यह बात राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने सोमवार को आयोजित इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के स्थापना दिवस समारोह में कही।
हालांकि, समारोह के अंत में राज्यपाल कलराज मिश्र इविवि प्रशासन के अफसरों एवं शिक्षकों से यह अनुरोध कर गए कि सबको साथ लेकर चलने की मानसिकता से काम करें और दूसरों को सिखाने से पहले खुद सीखें। अगर खुद नहीं सीखेंगे तो दूसरों का क्या सिखाएंगे। उन्होंने 1857 की क्रांति से लेकर अब तक की उन सभी महान विभूतियों को याद किया जो इविवि से जुड़े रहे और विज्ञान, राजनीति समेत तमाम अलग-अलग क्षेत्रों में ख्याति अर्जित की। इविवि के स्वर्णिम इतिहास को याद करते हुए उन्होंने मदन मोहन मालवीय का नाम लिया और यह भी कहा कि बीएचयू इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ही देन है।
राज्यपाल ने तेजी से बदल रहे शिक्षा के स्वरूप पर भी चर्चा की और कहा कि पुस्तकों की जगह इंटरनेट ने ले ली है, लेकिन जो ज्ञान पुस्तक से मिलता है, वह नेट से नहीं मिल सकता है। इसलिए पुस्तकीय ज्ञान अवश्य प्राप्त करना चाहिए। कहा कि विश्वविद्यालय निरंतर आगे बढ़ता रहा है और प्रतिभा, ज्ञान एवं अच्छे आचरण से इसे और तेजी से आगे ले जाना है। कहा कि वह भले ही यहां के छात्र न रहे हों, लेकिन यहां पढ़े लोगों से हमेशा वह संपर्क में रहे हैं। संस्कार युक्त एवं अनुशासन परायण शिक्षा ही यहां की विशिष्टता है।
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अध्यक्षता करते हुए कुलपति ने इविवि के पिछले कुछ वर्षों की उपलब्धियां गिनाईं और कहा कि हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या स्टाफ की कमी है। विशिष्ट अतिथि सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने भी शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। प्रो. आरके सिंह ने स्वागत एवं रजिस्ट्रार डॉ. एनके शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संगीत विभाग के छात्र-छात्राओं ने कुलगीत एवं लोकगीत प्रस्तुत किया। समारोह में प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भइया राज्य विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति अरुण टंडन, आरएसएस के कन्हैया सिंह, चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसवेक दुबे, डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार आदि मौजूद रहे।
डॉ. रीता बोलीं, कैंपस से बाहर राजनीति करें शिक्षक
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह की विशिष्ट अतिथि डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने बतौर पूर्व शिक्षिका समारोह में शामिल शिक्षकों को सलाह दी कि कैंपस में राजनीति न करें। राजनीति करनी ही है तो कैंपस से बाहर जाकर चुनाव लड़ें।
डॉ. रीता जोशी ने कहा कि वह यहां चार साल बतौर छात्रा रहीं और इसके बाद 32 साल तक शिक्षिका के रूप में पढ़ाया। इविवि में उनके 36 साल बीत गए और उन्होंने शिक्षा के इस मंदिर में कभी राजनीति नहीं की। कहा, आज वह जो भी हैं, इसी विश्वविद्यालय की बदौलत हैं। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि अपना दिमाग किसी को उठाने और गिराने में नहीं बल्कि विभाग को उठाने में लगाना होगा। कार्यक्षेत्र में राजनीति करना ठीक नहीं है। कहा कि हमें ताकाझांकी बंद करनी चाहिए और अपना काम करना चाहिए।
इविवि ने हमें रोजगार के साथ जिम्मेदारी भी दी है, जिसका हमें निर्वहन करना होगा। उन्हीं के वक्तव्य को आगे बढ़ाते हुए बाद में मुख्य अतिथि राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि राजनीति अगर सकारात्मक भाव से की जाए तो चीजों को अच्छा कर देती है, लेकिन नकारात्मक भाव से की गई राजनीति सबसे के लिए हानिकारक होती है। उन्होंने चरैवेति-चरैवेति के सिद्धांत पर आगे बढ़ने और इविवि को बुलंदियों पर ले जाने का आह्वान किया।
समारोह में शामिल होने से वंचित रह गए आम छात्र
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के तमाम छात्र-छात्राएं समारोह में शामिल होने से वंचित रह गए। सीनेट हाल में सीटों की संख्या सीमित है और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं समारोह में शामिल होने पहुंचे थे लेकिन जैसे ही सीटें भरीं, बाहर मौजूद छात्र-छात्राओं को सुरक्षा कर्मियों ने रोक दिया। इससे छात्र-छात्राओं में काफी नाराजगी थी।
चार साल के इतिहास में सिमट गया स्थापना दिवस
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय का 133वां स्थापना दिवस समारोह महज चार साल के इतिहास में सिमटकर रह गया। प्रो. आरके सिंह ने स्वागत भाषण में इविवि के इतिहास को स्वर्णिम बताते हुए केवल कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के चार वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियां ही गिनाईं। हालांकि, मुख्य अतिथि राज्यपाल कलराज मिश्र और विशिष्ट अतिथि डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने अपने वक्तव्य में विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर अब तक की उन तमाम बड़ी हस्तियों को याद किया, जिनकी वजह से इलाहाबाद विश्वविद्यालय को ‘पूरब के ऑक्सफोर्ड’ की संज्ञा दी गई।
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हालांकि, समारोह के अंत में राज्यपाल कलराज मिश्र इविवि प्रशासन के अफसरों एवं शिक्षकों से यह अनुरोध कर गए कि सबको साथ लेकर चलने की मानसिकता से काम करें और दूसरों को सिखाने से पहले खुद सीखें। अगर खुद नहीं सीखेंगे तो दूसरों का क्या सिखाएंगे। उन्होंने 1857 की क्रांति से लेकर अब तक की उन सभी महान विभूतियों को याद किया जो इविवि से जुड़े रहे और विज्ञान, राजनीति समेत तमाम अलग-अलग क्षेत्रों में ख्याति अर्जित की। इविवि के स्वर्णिम इतिहास को याद करते हुए उन्होंने मदन मोहन मालवीय का नाम लिया और यह भी कहा कि बीएचयू इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ही देन है।
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राज्यपाल ने तेजी से बदल रहे शिक्षा के स्वरूप पर भी चर्चा की और कहा कि पुस्तकों की जगह इंटरनेट ने ले ली है, लेकिन जो ज्ञान पुस्तक से मिलता है, वह नेट से नहीं मिल सकता है। इसलिए पुस्तकीय ज्ञान अवश्य प्राप्त करना चाहिए। कहा कि विश्वविद्यालय निरंतर आगे बढ़ता रहा है और प्रतिभा, ज्ञान एवं अच्छे आचरण से इसे और तेजी से आगे ले जाना है। कहा कि वह भले ही यहां के छात्र न रहे हों, लेकिन यहां पढ़े लोगों से हमेशा वह संपर्क में रहे हैं। संस्कार युक्त एवं अनुशासन परायण शिक्षा ही यहां की विशिष्टता है।
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अध्यक्षता करते हुए कुलपति ने इविवि के पिछले कुछ वर्षों की उपलब्धियां गिनाईं और कहा कि हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या स्टाफ की कमी है। विशिष्ट अतिथि सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने भी शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। प्रो. आरके सिंह ने स्वागत एवं रजिस्ट्रार डॉ. एनके शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संगीत विभाग के छात्र-छात्राओं ने कुलगीत एवं लोकगीत प्रस्तुत किया। समारोह में प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भइया राज्य विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति अरुण टंडन, आरएसएस के कन्हैया सिंह, चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसवेक दुबे, डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार आदि मौजूद रहे।
डॉ. रीता बोलीं, कैंपस से बाहर राजनीति करें शिक्षक
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह की विशिष्ट अतिथि डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने बतौर पूर्व शिक्षिका समारोह में शामिल शिक्षकों को सलाह दी कि कैंपस में राजनीति न करें। राजनीति करनी ही है तो कैंपस से बाहर जाकर चुनाव लड़ें।
डॉ. रीता जोशी ने कहा कि वह यहां चार साल बतौर छात्रा रहीं और इसके बाद 32 साल तक शिक्षिका के रूप में पढ़ाया। इविवि में उनके 36 साल बीत गए और उन्होंने शिक्षा के इस मंदिर में कभी राजनीति नहीं की। कहा, आज वह जो भी हैं, इसी विश्वविद्यालय की बदौलत हैं। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि अपना दिमाग किसी को उठाने और गिराने में नहीं बल्कि विभाग को उठाने में लगाना होगा। कार्यक्षेत्र में राजनीति करना ठीक नहीं है। कहा कि हमें ताकाझांकी बंद करनी चाहिए और अपना काम करना चाहिए।
इविवि ने हमें रोजगार के साथ जिम्मेदारी भी दी है, जिसका हमें निर्वहन करना होगा। उन्हीं के वक्तव्य को आगे बढ़ाते हुए बाद में मुख्य अतिथि राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि राजनीति अगर सकारात्मक भाव से की जाए तो चीजों को अच्छा कर देती है, लेकिन नकारात्मक भाव से की गई राजनीति सबसे के लिए हानिकारक होती है। उन्होंने चरैवेति-चरैवेति के सिद्धांत पर आगे बढ़ने और इविवि को बुलंदियों पर ले जाने का आह्वान किया।
समारोह में शामिल होने से वंचित रह गए आम छात्र
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के तमाम छात्र-छात्राएं समारोह में शामिल होने से वंचित रह गए। सीनेट हाल में सीटों की संख्या सीमित है और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं समारोह में शामिल होने पहुंचे थे लेकिन जैसे ही सीटें भरीं, बाहर मौजूद छात्र-छात्राओं को सुरक्षा कर्मियों ने रोक दिया। इससे छात्र-छात्राओं में काफी नाराजगी थी।
चार साल के इतिहास में सिमट गया स्थापना दिवस
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय का 133वां स्थापना दिवस समारोह महज चार साल के इतिहास में सिमटकर रह गया। प्रो. आरके सिंह ने स्वागत भाषण में इविवि के इतिहास को स्वर्णिम बताते हुए केवल कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के चार वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियां ही गिनाईं। हालांकि, मुख्य अतिथि राज्यपाल कलराज मिश्र और विशिष्ट अतिथि डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने अपने वक्तव्य में विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर अब तक की उन तमाम बड़ी हस्तियों को याद किया, जिनकी वजह से इलाहाबाद विश्वविद्यालय को ‘पूरब के ऑक्सफोर्ड’ की संज्ञा दी गई।