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High Court : सोशल मीडिया पर पाकिस्तान जिन्दाबाद फॉरवर्ड करना देशद्रोह नहीं, मेरठ के युवक की जमानत मंजूर

Fri, 03 Oct 2025 07:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 03 Oct 2025 07:45 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान जिन्दाबाद लिखने के आरोपी की जमानत मंजूर कर ली। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी दूसरे की पोस्ट को महज फॉरवर्ड करना, सीधे-सीधे देश की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ अपराध नहीं माना जा सकता।

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Forwarding Pakistan Zindabad on social media is not treason, Meerut youth granted bail
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान जिन्दाबाद लिखने के आरोपी की जमानत मंजूर कर ली। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी दूसरे की पोस्ट को महज फॉरवर्ड करना, सीधे-सीधे देश की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ अपराध नहीं माना जा सकता।

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यह आदेश न्यायमूर्ति संतोष राय की अदालत ने मेरठ के युवक साजिद चौधरी की जमानत अर्जी पर दिया है। कोर्ट ने कहा सोशल मीडिया मैसेज को अपराध मानने से पहले इसे एक मजबूत और समझदार व्यक्ति की दृष्टि से परखना जरूरी है, न कि कमजोर मानसिकता से। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भारतीय संविधान की रीढ़ है और इसका दुरुपयोग रोकते हुए भी इसे संकीर्ण दृष्टि से नहीं देखा जा सकता।

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मामला मेरठ के परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र का है। याची पर आरोप लगा कि उसने किसी व्यक्ति की पोस्ट पर टिप्पणी लिखी कि ''कामरान भट्टी, मुझे आप पर गर्व है, पाकिस्तान जिंदाबाद। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर याची को जेल भेज दिया। सत्र अदालत से जमानत खारिज होने के बाद याची ने हाईकोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने याची की सशर्त जमानत मंजूर कर ली।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

कोर्ट ने अपने आदेश में इमरान प्रतापगढ़ी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिए फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी नागरिक की सोशल मीडिया पोस्ट को अपराध मानने से पहले कसौटी पर कसना जरूरी है।

जेलों की भीड़भाड़ और मानवाधिकार

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि जेलों में कैदियों की संख्या उनकी क्षमता से 5-6 गुना अधिक है। ऐसे में, मुकदमे के लंबा खिंचने की स्थिति में किसी विचाराधीन कैदी को लंबे समय तक सलाखों के पीछे रखना उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।

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