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पूर्व विधायक पवन पांडेय को भेजा जेल
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पूर्व विधायक पवन कुमार पांडेय को भेजा जेल
प्रयागराज। हत्याभियुक्तों को संरक्षण देने के मुकदमे में अकबरपुर के पूर्व विधायक पवन कुमार पांडेय को स्पेशल कोर्ट (एमपीएमएल) ने मंगलवार को जेल भेज दिया है। पूर्व विधायक के खिलाफ पिछले 17 वर्षों से गैर जमानती वारंट जारी था, मगर वह कभी अदालत में हाजिर नहीं हुए। मंगलवार को उन्होंने कोर्ट में उपस्थित होकर अपने खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट निरस्त करने की मांग की। मगर स्पेशल कोर्ट ने उनकी वारंट निरस्त किए जाने की अर्जी मंजूर करने से इंकार कर दिया। इसके बाद उनको न्यायिक अभिरक्षा में लेकर नैनी जेल भेज दिया गया।
जेल जाने से पूर्व पवन पांडेय की ओर से जेल में उच्च श्रेणी की सुविधा देने के लिए भी अर्जी दी गई, जिस पर कोर्ट ने जेल अधीक्षक को जेल मैन्युअल के अनुसार कार्यवाही करने का आदेश दिया है। पूर्व विधायक की जमानत पर तीन जुलाई को सुनवाई होगी। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने एडीजीसी राजेश कुमार गुप्ता और विशेष अधिवक्ता वीरेन्द्र सिंह गोपाल जी और बचाव पक्ष के अधिवक्ता कौशलेश सिंह और पीके तिवारी को सुनकर दिया है।
घटना 24 साल पूर्व 29 अक्तूबर 1995 की लखनऊ के हजरतगंज थाने के जियामऊ की है। वादी विजय कुमार यादव ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि रास्ते के विवाद को लेकर घर में घुस कर उसके पिता लक्ष्मी शंकर यादव की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। हत्या में बसपा नेता और पूर्व मंत्री अंगद यादव, रमेश कालिया और सूरजपाल यादव को अभियुक्त बनाया गया था। पूर्व विधायक पवन कुमार पांडेय पर आरोप है कि उन्होंने अंगद यादव और अन्य अभियुक्तगण को शिव सेना कार्यालय अकबरपुर में छिपा कर रखा था। पुलिस ने पवन कुमार पांडेय के खिलाफ हत्याभियुक्त को संरक्षण देने के अपराध की धारा में आरोप पत्र भेजा था। जिसकी पत्रावली लखनऊ से अंतरित होकर स्पेशल कोर्ट में सुनवाई के लिए आई है। स्पेशल कोर्ट ने 18 मई को पूर्व विधायक के खिलाफ 2001 से चले आ रहे गैर जमानती वारंट के साथ ही कुर्की वारंट जारी किया था।
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प्रयागराज। हत्याभियुक्तों को संरक्षण देने के मुकदमे में अकबरपुर के पूर्व विधायक पवन कुमार पांडेय को स्पेशल कोर्ट (एमपीएमएल) ने मंगलवार को जेल भेज दिया है। पूर्व विधायक के खिलाफ पिछले 17 वर्षों से गैर जमानती वारंट जारी था, मगर वह कभी अदालत में हाजिर नहीं हुए। मंगलवार को उन्होंने कोर्ट में उपस्थित होकर अपने खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट निरस्त करने की मांग की। मगर स्पेशल कोर्ट ने उनकी वारंट निरस्त किए जाने की अर्जी मंजूर करने से इंकार कर दिया। इसके बाद उनको न्यायिक अभिरक्षा में लेकर नैनी जेल भेज दिया गया।
जेल जाने से पूर्व पवन पांडेय की ओर से जेल में उच्च श्रेणी की सुविधा देने के लिए भी अर्जी दी गई, जिस पर कोर्ट ने जेल अधीक्षक को जेल मैन्युअल के अनुसार कार्यवाही करने का आदेश दिया है। पूर्व विधायक की जमानत पर तीन जुलाई को सुनवाई होगी। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने एडीजीसी राजेश कुमार गुप्ता और विशेष अधिवक्ता वीरेन्द्र सिंह गोपाल जी और बचाव पक्ष के अधिवक्ता कौशलेश सिंह और पीके तिवारी को सुनकर दिया है।
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घटना 24 साल पूर्व 29 अक्तूबर 1995 की लखनऊ के हजरतगंज थाने के जियामऊ की है। वादी विजय कुमार यादव ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि रास्ते के विवाद को लेकर घर में घुस कर उसके पिता लक्ष्मी शंकर यादव की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। हत्या में बसपा नेता और पूर्व मंत्री अंगद यादव, रमेश कालिया और सूरजपाल यादव को अभियुक्त बनाया गया था। पूर्व विधायक पवन कुमार पांडेय पर आरोप है कि उन्होंने अंगद यादव और अन्य अभियुक्तगण को शिव सेना कार्यालय अकबरपुर में छिपा कर रखा था। पुलिस ने पवन कुमार पांडेय के खिलाफ हत्याभियुक्त को संरक्षण देने के अपराध की धारा में आरोप पत्र भेजा था। जिसकी पत्रावली लखनऊ से अंतरित होकर स्पेशल कोर्ट में सुनवाई के लिए आई है। स्पेशल कोर्ट ने 18 मई को पूर्व विधायक के खिलाफ 2001 से चले आ रहे गैर जमानती वारंट के साथ ही कुर्की वारंट जारी किया था।
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