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कोर्ट की अवमानना में पूर्व डीआईओएस को सजा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 29 Jul 2017 01:58 AM IST
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हाईकोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवमानना करने के मामले में हाईकोर्ट बलिया के पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक रमेश सिंह (बर्खास्त) को दो माह की कैद और 2500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सजा के अमल पर फिलहाल दो सप्ताह के रोक लगाई है, ताकि रमेश सिंह इस आदेश के खिलाफ अपील दाखिल कर सकें।
अमर शहीद कौशल सिंह इंटर मीडिएट कालेज नारायण गढ़ बलिया के मैनेजर भोला पांडेय की अवमानना याचिका पर न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र ने सुनवाई की। याची का पक्ष अधिवक्ता आनंद कुमार पांडेय ने रखा। याचिका में कहा गया कि रमेश सिंह ने बलिया जिले में जिला विद्यालय निरीक्षक के पद पर रहते हुए हाईकोर्ट के 17 नवंबर 2016 और 15 दिसंबर 2016 के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की है। याची के कालेज की प्रबंध समिति का चुनाव हुआ था जिसमें याची प्रबंधक चुना गया। डीआईओएस ने 12 दिसंबर 2014 को इस चुनाव को सत्यापित भी कर दिया। इसके बाद एक शिकायत पर एक अगस्त 2016 को एक आदेश पारित करते हुए उन्होंने 12 दिसंबर के आदेश को वापस ले लिया।
याची ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश के तहत डीआईओएस के आदेश पर रोक लगा दी। इसके खिलाफ दाखिल विशेष अपील भी खारिज हो गई। इसके बावजूद डीआईओएस ने न तो उनको मैनेजर के पद पर काम करने की अनुमति दी और न ही उनका हस्ताक्षर सत्यापित किया। अवमानना याचिका दाखिल होने के बाद उन्होंने याची का हस्ताक्षर सत्यापित कर कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दे दी मगर हस्ताक्षर सत्यापित करने की सूचना बैंक को नहीं दी गई जिससे याची के कालेज के वित्तिय प्रबंधन और वेतन भुगतान नहीं हो सका। कोर्ट ने सभी दस्तावेजों को मंगा कर जांच की तो पता चला कि डीआईओएस ने जानबूझकर कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है। उनको अवमानना का दोषी करार देते हुए दो माह की कैद और 2500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। उल्लेखनीय है कि रमेश सिंह के खिलाफ फर्जी नियुक्तियों की भी शिकायत है जिसे लेकर दाखिल याचिका पर कोर्ट की सख्त को देखते हुए गत माह सरकार ने उनको बर्खास्त कर दिया है।
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अमर शहीद कौशल सिंह इंटर मीडिएट कालेज नारायण गढ़ बलिया के मैनेजर भोला पांडेय की अवमानना याचिका पर न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र ने सुनवाई की। याची का पक्ष अधिवक्ता आनंद कुमार पांडेय ने रखा। याचिका में कहा गया कि रमेश सिंह ने बलिया जिले में जिला विद्यालय निरीक्षक के पद पर रहते हुए हाईकोर्ट के 17 नवंबर 2016 और 15 दिसंबर 2016 के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की है। याची के कालेज की प्रबंध समिति का चुनाव हुआ था जिसमें याची प्रबंधक चुना गया। डीआईओएस ने 12 दिसंबर 2014 को इस चुनाव को सत्यापित भी कर दिया। इसके बाद एक शिकायत पर एक अगस्त 2016 को एक आदेश पारित करते हुए उन्होंने 12 दिसंबर के आदेश को वापस ले लिया।
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याची ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश के तहत डीआईओएस के आदेश पर रोक लगा दी। इसके खिलाफ दाखिल विशेष अपील भी खारिज हो गई। इसके बावजूद डीआईओएस ने न तो उनको मैनेजर के पद पर काम करने की अनुमति दी और न ही उनका हस्ताक्षर सत्यापित किया। अवमानना याचिका दाखिल होने के बाद उन्होंने याची का हस्ताक्षर सत्यापित कर कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दे दी मगर हस्ताक्षर सत्यापित करने की सूचना बैंक को नहीं दी गई जिससे याची के कालेज के वित्तिय प्रबंधन और वेतन भुगतान नहीं हो सका। कोर्ट ने सभी दस्तावेजों को मंगा कर जांच की तो पता चला कि डीआईओएस ने जानबूझकर कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है। उनको अवमानना का दोषी करार देते हुए दो माह की कैद और 2500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। उल्लेखनीय है कि रमेश सिंह के खिलाफ फर्जी नियुक्तियों की भी शिकायत है जिसे लेकर दाखिल याचिका पर कोर्ट की सख्त को देखते हुए गत माह सरकार ने उनको बर्खास्त कर दिया है।
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