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नहीं रहे पूर्व कुलपति प्रो. सुरेश चंद्र श्रीवास्तव
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former au vc prof suresh chandra shrivastav demise
- फोटो : ALDCOMPACT
संस्कृत में लिखे कई महत्वपूर्ण ग्रंथ, ज्योतिष से भी था लगाव
निधन की सूचना से इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शोक की लहर
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में जून 1994 से 1997 तक कुलपति रहे प्रो. सुरेश चंद्र श्रीवास्तव का बृहस्पतिवार सुबह देहरादून में निधन हो गया। उनके निधन की सूचना से इविवि में शोक की लहर है। 88 वर्षीय प्रो. श्रीवास्तव पिछले एक वर्ष से बीमार चल रहे थे। एक सप्ताह से उनकी अस्वस्थता बढ़ गई थी। अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उस समय उनके चारों पुत्र प्रो. सजय श्रीवास्तव, डॉ. विवेक श्रीवास्तव, पीसीएस अफसर डॉ. आनंद श्रीवास्तव, आईपीएस अफसर डॉ. असीम श्रीवास्तव एवं अन्य स्वजन उपस्थित थे।
प्रो. सुरेश का अंतिम संस्कार ऋषिकेश के गंगा तट पर चंद्रशेखर घाट पर किया गया। ज्येष्ठ पुत्र प्रो. संजय श्रीवास्तव ने मुखाग्नि दी। उत्तराखंड की राज्यपाल समेत अनेक गणमान्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रो. सुरेश चंद्र का जन्म 19 अगस्त 1932 को कौशाम्बी के रकसराई गांव में हुआ था। वह शुरू से ही मेधावी छात्र रहे। बीए और एमए की परीक्षा उन्होंने इविवि से उत्तीर्ण की। 1956 में इविवि के संस्कृत विभाग में प्रवक्ता के पद पर चयनित हुए। 1973 में रीडर एवं 1984 में प्रोफेसर के पद को सुशोभित किया। उन्होंने कई ग्रंथ लिखे और ज्योतिष से उनका गहरा लगाव रहा।
प्रो. श्रीवास्तव की अध्यापन शैली बेजोड़ थी और वह छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय थे। हाल ही में पद्मश्री से सम्मानित प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र भी उनके शिष्य रहे हैं। उन्होंने अपने गुरु के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की है। वहीं, इविवि में हुई शोक सभा में ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे, महामंत्री प्रो. शिवमोहन प्रसाद, संस्कृत के विभागाध्यक्ष प्रो. उमाकांत यादव, प्रो. मृदुला त्रिपाठी, प्रो. मंजुला जायसवाल, प्रो. सुचित्रा मित्रा, प्रो. राम किशोर शास्त्री, डॉ. गीता बनर्जी, डॉ. कनक लता दुबे, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. अभिनीत श्रीवास्तव, डॉ. राजेश कुमार समेत तमाम शोधार्थियों ने प्रो. श्रीवास्तव को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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एडीसी में भी दी गई श्रद्धांजलि
- प्रो. सुरेश चंद्र श्रीवास्तव के निधन पर इलाहाबाद डिग्री कॉलेज (एडीसी) में भी शोकसभा हुआ और प्रो. श्रीवास्तव को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अपने शोक संदेश में डॉ. राजेंद्र त्रिपाठी ‘रसराज’ ने प्रो. श्रीवास्तव को संस्कृत का प्रखर विद्वान बताया। शोकसभा में डॉ. मीरा सिंह, डॉ. प्रभात कुमार त्रिपाठी, अंशिका, नैंसी, ज्योति, सचिन आदि मौजूद रहे।
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निधन की सूचना से इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शोक की लहर
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में जून 1994 से 1997 तक कुलपति रहे प्रो. सुरेश चंद्र श्रीवास्तव का बृहस्पतिवार सुबह देहरादून में निधन हो गया। उनके निधन की सूचना से इविवि में शोक की लहर है। 88 वर्षीय प्रो. श्रीवास्तव पिछले एक वर्ष से बीमार चल रहे थे। एक सप्ताह से उनकी अस्वस्थता बढ़ गई थी। अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उस समय उनके चारों पुत्र प्रो. सजय श्रीवास्तव, डॉ. विवेक श्रीवास्तव, पीसीएस अफसर डॉ. आनंद श्रीवास्तव, आईपीएस अफसर डॉ. असीम श्रीवास्तव एवं अन्य स्वजन उपस्थित थे।
प्रो. सुरेश का अंतिम संस्कार ऋषिकेश के गंगा तट पर चंद्रशेखर घाट पर किया गया। ज्येष्ठ पुत्र प्रो. संजय श्रीवास्तव ने मुखाग्नि दी। उत्तराखंड की राज्यपाल समेत अनेक गणमान्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रो. सुरेश चंद्र का जन्म 19 अगस्त 1932 को कौशाम्बी के रकसराई गांव में हुआ था। वह शुरू से ही मेधावी छात्र रहे। बीए और एमए की परीक्षा उन्होंने इविवि से उत्तीर्ण की। 1956 में इविवि के संस्कृत विभाग में प्रवक्ता के पद पर चयनित हुए। 1973 में रीडर एवं 1984 में प्रोफेसर के पद को सुशोभित किया। उन्होंने कई ग्रंथ लिखे और ज्योतिष से उनका गहरा लगाव रहा।
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प्रो. श्रीवास्तव की अध्यापन शैली बेजोड़ थी और वह छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय थे। हाल ही में पद्मश्री से सम्मानित प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र भी उनके शिष्य रहे हैं। उन्होंने अपने गुरु के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की है। वहीं, इविवि में हुई शोक सभा में ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे, महामंत्री प्रो. शिवमोहन प्रसाद, संस्कृत के विभागाध्यक्ष प्रो. उमाकांत यादव, प्रो. मृदुला त्रिपाठी, प्रो. मंजुला जायसवाल, प्रो. सुचित्रा मित्रा, प्रो. राम किशोर शास्त्री, डॉ. गीता बनर्जी, डॉ. कनक लता दुबे, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. अभिनीत श्रीवास्तव, डॉ. राजेश कुमार समेत तमाम शोधार्थियों ने प्रो. श्रीवास्तव को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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एडीसी में भी दी गई श्रद्धांजलि
- प्रो. सुरेश चंद्र श्रीवास्तव के निधन पर इलाहाबाद डिग्री कॉलेज (एडीसी) में भी शोकसभा हुआ और प्रो. श्रीवास्तव को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अपने शोक संदेश में डॉ. राजेंद्र त्रिपाठी ‘रसराज’ ने प्रो. श्रीवास्तव को संस्कृत का प्रखर विद्वान बताया। शोकसभा में डॉ. मीरा सिंह, डॉ. प्रभात कुमार त्रिपाठी, अंशिका, नैंसी, ज्योति, सचिन आदि मौजूद रहे।