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इंदिरा मैराथन में सेना का दबदबा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 20 Nov 2017 01:45 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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अखिल भारतीय प्राइजमनी इंदिरा मैराथन में रविवार को नया रिकार्ड बना। पुरुषों के वर्ग में सेना के खिलाड़ियों का दबदबा रहा। पहले तीन स्थान पर सेना का कब्जा रहा। इसके अलावा प्रथम 14 में भी उन्हीं का दबदबा रहा। पुरुष वर्ग में 2013 के विजेता रशपाल ने वापसी की तो महिला में महाराष्ट्र की ज्योति शंकर राव गवते ने लगातार पांचवीं जीत का रिकार्ड बनाया। कुल 9.70 लाख रुपये इनामी राशि वाली इस प्रतियोगिता के लिए 10 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने दौड़ लगाई तो उनके स्वागत में लोगों की भी भीड़ उमड़ पड़ी। सड़क के दोनों तरफ खड़े लोग लगातार तालियां बजाकर धावकों का हौसला बढ़ाते रहे। इसमें हर उम्र वर्ग के लोग शामिल रहे। समापन समारोह में कुल 88 खिलाड़ियों को पदक और सांत्वना पुरस्कार दिए गए।
कानपुर के रशपाल सिंह ने धमाकेदार वापसी करते हुए दूसरी बार इंदिरा मैराथन जीती है। इलाहाबाद के अनिल कुमार सिंह दूसरे तथा कानपुर के आनंद सिंह तीसरे स्थान पर रहे। वहीं महिलाओं में हाथरस की अनिता चौधरी और वाराणसी की रानी यादव क्रमश: उपविजेता और द्वितीय उपविजेता रहीं। 2012 की विजेता तथा इसके बाद लगातार तीन बार उपविजेता रहीं भदोही की ज्योति सिंह चौथे स्थान पर रहीं। अर्जुन एवार्डी एथलीट प्रमोद तिवारी ने आनंद भवन पर मैराथन को हरी झंडी दिखाई। 42.195 किमी का मैराथन, कैंट, मेयोहाल चौराहा, सर्किट हाउस, बैहराना, नया यमुना पुल, नैनी, मामा-भांजा तालाब होते हुए मदन मोहन मालवीय स्टेडियम पर खत्म हुई। महिला और पुरुष दोनों ही वर्ग में काफी नजदीकी मुकाबला रहा। पूरे रास्ते सड़क के दोनों तरफ खड़े लोग धावकाें का लगातार हौसला बढ़ाते रहे।
आयोजन समिति की ओर से भी खिलाड़ियों के स्वागत, जलपान, चिकित्सा आदि की व्यवस्था की गई थी। खिलाड़ियों के पहुंचने पर स्टेडियम में जोरदार स्वागत हुआ और लगातार तालियां बजती रहीं। स्टेडियम में आयोजित समारोह में अर्जुन एवार्डी ओलंपियन अभिन्न श्याम गुप्त के हाथों विजेताओं को मेडल और पुरस्कार की राशि प्रदान की गई। दोनों वर्ग के विजेता खिलाड़ियों को दो-दो लाख रुपये के चेक दिए गए। द्वितीय स्थान वालों को एक-एक तथा तृतीय रहने वालाें को 75 हजार रुपये के चेक दिए गए। दोनों वर्ग में चार से 14 स्थान तक रहने वाले 11-11 धावकों को 10-10 हजार रुपये के चेक प्रदान किए गए। अतिथियों ने क्रास कंट्री के विजेताओं को भी पुरस्कार वितरित किए। उद्घाटन और समापन समारोह में खेल निदेशक आरपी सिंह, पीके डीएम सुहास एलवाई, सीडीओ सैमुअल पॉल एन., क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी चंचल मिश्रा, उप क्रीड़ाधिकारी रुस्तम खान आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ.रंजना त्रिपाठी ने किया।
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विगत वर्षों में महिला और पुरुष दोनों वर्ग में प्रथम तीन में जगह बनाने वाले कई खिलाड़ी पुरानी उपलब्धि तो नहीं दोहरा पाए लेकिन पुरस्कार पाने वाले 14 धावकों की सूची में शामिल हैं। विगत वर्ग तृतीय रहे नवीन हुड्डा दसवें तथा 2014 के उपविजेता इंद्रजीत यादव इस बार 12वें स्थान पर रहे। वहीं महिलाओं में 2012 की विजेता तथा इसके बाद लगातार तीन बार उपविजेता रहीं भदोही की ज्योति सिंह चौथे स्थान पर रहीं। 2012 की उपविजेता रंजना ने आठवां तथा 2014 में तृतीय रहीं राजकुमार ने 11वां स्थान हासिल किया।
33वीं इंदिरा मैराथन काफी रोचक रही। इस बार मुकाबला नजदीकी रहा और हार-जीत का फैसला आखिरी क्षणों में हुआ। पुरुष वर्ग में प्रथम पांच स्थान पर रहने वाले खिलाड़ियों ने मात्र एक मिनट 31 सेकेंड के भीतर फिनिश लाइन को पार किया। जबकि, पिछले वर्ष के विजेता और तृतीय स्थान पर रहने वाले खिलाड़ी के बीच एक मिनट 59 सेकेंड का अंतर था। वहीं महिलाओं के वर्ग में दूसरे स्थान पर रहीं अनिता चौधरी ने रानी यादव को स्टेडियम में पहुंचने के बाद पीछे छोड़ा।
पुरुष वर्ग में शुरू से ही मुकाबला काफी नजदीकी रहा। धावक समूह में चल रहे थे। कोई भी धावक बहुत आगे नहीं निकला। यह स्थिति वापसी में मेडिकल कालेज चौराहे तक रही। इसके बाद स्टेडियम से कुछ दूर सिविल लाइंस हनुमान मंदिर पर भी प्रथम पांच धावक एक-दूसरे के साथ चल रहे थे लेकिन इसके बाद रशपाल ने बढ़त बना ली लेकिन अंतर किसी भी समय बहुत ज्यादा नहीं हुआ। रशपाल ने दो घंटे 25 मिनट 33 सेकेंड में दौड़ पूरी की। वहीं उपविजेता अनिल कुमार सिंह मात्र छह सेकेंड पीछे रह गए। तीसरे स्थान पर रहे आनंद कुमार सिंह ने दो घंटे 25 मिनट 51 सेकेंड, चतुर्थ रहे धर्मेंद्र सिंह ने दो घंटे 26 मिनट 35 सेकेंड तथा पांचवें स्थान पर रहे पाटले ने दो घंटे 27 मिनट चार सेकेंड में मैराथन पूरी की। महिला वर्ग की विजेता ज्योति ने दो घंटे 54 मिनट 26 सेकेंड में दौड़ पूरी की।
दूसरे स्थान पर अनिता चौधरी वाराणसी की रानी यादव से पीछे चल रही थीं लेकिन स्टेडियम में प्रवेश करने के बाद अनिता ने अचानक रफ्तार बढ़ा दी और रानी को पीछे छोड़ दिया। अनिता ने तीन घंटे सात मिनट 40 सेकेंड तथा रानी ने तीन घंटे आठ मिनट छह सेकेंड में दौड़ पूरी की।
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कानपुर के रशपाल सिंह ने धमाकेदार वापसी करते हुए दूसरी बार इंदिरा मैराथन जीती है। इलाहाबाद के अनिल कुमार सिंह दूसरे तथा कानपुर के आनंद सिंह तीसरे स्थान पर रहे। वहीं महिलाओं में हाथरस की अनिता चौधरी और वाराणसी की रानी यादव क्रमश: उपविजेता और द्वितीय उपविजेता रहीं। 2012 की विजेता तथा इसके बाद लगातार तीन बार उपविजेता रहीं भदोही की ज्योति सिंह चौथे स्थान पर रहीं। अर्जुन एवार्डी एथलीट प्रमोद तिवारी ने आनंद भवन पर मैराथन को हरी झंडी दिखाई। 42.195 किमी का मैराथन, कैंट, मेयोहाल चौराहा, सर्किट हाउस, बैहराना, नया यमुना पुल, नैनी, मामा-भांजा तालाब होते हुए मदन मोहन मालवीय स्टेडियम पर खत्म हुई। महिला और पुरुष दोनों ही वर्ग में काफी नजदीकी मुकाबला रहा। पूरे रास्ते सड़क के दोनों तरफ खड़े लोग धावकाें का लगातार हौसला बढ़ाते रहे।
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आयोजन समिति की ओर से भी खिलाड़ियों के स्वागत, जलपान, चिकित्सा आदि की व्यवस्था की गई थी। खिलाड़ियों के पहुंचने पर स्टेडियम में जोरदार स्वागत हुआ और लगातार तालियां बजती रहीं। स्टेडियम में आयोजित समारोह में अर्जुन एवार्डी ओलंपियन अभिन्न श्याम गुप्त के हाथों विजेताओं को मेडल और पुरस्कार की राशि प्रदान की गई। दोनों वर्ग के विजेता खिलाड़ियों को दो-दो लाख रुपये के चेक दिए गए। द्वितीय स्थान वालों को एक-एक तथा तृतीय रहने वालाें को 75 हजार रुपये के चेक दिए गए। दोनों वर्ग में चार से 14 स्थान तक रहने वाले 11-11 धावकों को 10-10 हजार रुपये के चेक प्रदान किए गए। अतिथियों ने क्रास कंट्री के विजेताओं को भी पुरस्कार वितरित किए। उद्घाटन और समापन समारोह में खेल निदेशक आरपी सिंह, पीके डीएम सुहास एलवाई, सीडीओ सैमुअल पॉल एन., क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी चंचल मिश्रा, उप क्रीड़ाधिकारी रुस्तम खान आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ.रंजना त्रिपाठी ने किया।
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विगत वर्षों में महिला और पुरुष दोनों वर्ग में प्रथम तीन में जगह बनाने वाले कई खिलाड़ी पुरानी उपलब्धि तो नहीं दोहरा पाए लेकिन पुरस्कार पाने वाले 14 धावकों की सूची में शामिल हैं। विगत वर्ग तृतीय रहे नवीन हुड्डा दसवें तथा 2014 के उपविजेता इंद्रजीत यादव इस बार 12वें स्थान पर रहे। वहीं महिलाओं में 2012 की विजेता तथा इसके बाद लगातार तीन बार उपविजेता रहीं भदोही की ज्योति सिंह चौथे स्थान पर रहीं। 2012 की उपविजेता रंजना ने आठवां तथा 2014 में तृतीय रहीं राजकुमार ने 11वां स्थान हासिल किया।
33वीं इंदिरा मैराथन काफी रोचक रही। इस बार मुकाबला नजदीकी रहा और हार-जीत का फैसला आखिरी क्षणों में हुआ। पुरुष वर्ग में प्रथम पांच स्थान पर रहने वाले खिलाड़ियों ने मात्र एक मिनट 31 सेकेंड के भीतर फिनिश लाइन को पार किया। जबकि, पिछले वर्ष के विजेता और तृतीय स्थान पर रहने वाले खिलाड़ी के बीच एक मिनट 59 सेकेंड का अंतर था। वहीं महिलाओं के वर्ग में दूसरे स्थान पर रहीं अनिता चौधरी ने रानी यादव को स्टेडियम में पहुंचने के बाद पीछे छोड़ा।
पुरुष वर्ग में शुरू से ही मुकाबला काफी नजदीकी रहा। धावक समूह में चल रहे थे। कोई भी धावक बहुत आगे नहीं निकला। यह स्थिति वापसी में मेडिकल कालेज चौराहे तक रही। इसके बाद स्टेडियम से कुछ दूर सिविल लाइंस हनुमान मंदिर पर भी प्रथम पांच धावक एक-दूसरे के साथ चल रहे थे लेकिन इसके बाद रशपाल ने बढ़त बना ली लेकिन अंतर किसी भी समय बहुत ज्यादा नहीं हुआ। रशपाल ने दो घंटे 25 मिनट 33 सेकेंड में दौड़ पूरी की। वहीं उपविजेता अनिल कुमार सिंह मात्र छह सेकेंड पीछे रह गए। तीसरे स्थान पर रहे आनंद कुमार सिंह ने दो घंटे 25 मिनट 51 सेकेंड, चतुर्थ रहे धर्मेंद्र सिंह ने दो घंटे 26 मिनट 35 सेकेंड तथा पांचवें स्थान पर रहे पाटले ने दो घंटे 27 मिनट चार सेकेंड में मैराथन पूरी की। महिला वर्ग की विजेता ज्योति ने दो घंटे 54 मिनट 26 सेकेंड में दौड़ पूरी की।
दूसरे स्थान पर अनिता चौधरी वाराणसी की रानी यादव से पीछे चल रही थीं लेकिन स्टेडियम में प्रवेश करने के बाद अनिता ने अचानक रफ्तार बढ़ा दी और रानी को पीछे छोड़ दिया। अनिता ने तीन घंटे सात मिनट 40 सेकेंड तथा रानी ने तीन घंटे आठ मिनट छह सेकेंड में दौड़ पूरी की।