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निगम-प्रशासन की नूरा कुश्ती में फंसे‘आजाद’

Thu, 23 Jul 2015 02:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 23 Jul 2015 02:33 AM IST
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Fnse'ajad in little charade of corporate governance '
इलाहाबाद। ‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मरने वालों का यही बाकी निशां होगा’ लेकिन मौजूदा व्यवस्था ने इसके मायने बदल दिए हैं। अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद को यथोचित सम्मान देना तो दूर उनकी प्रतिमा स्थापित करने को लेकर ही निगम और प्रशासन के बीच नूरा कुश्ती जारी है। हालत यह है कि आजाद की प्रतिमा बीते एक दशक से उपेक्षा की शिकार है। यह प्रतिमा नगर निगम मुख्यालय के स्टोर में कबाड़ के साथ एक किनारे पड़ी है। महीनों पहले एक पार्षद ने आजाद प्रतिमा को सरकिट हाउस में लगवाने की मांग की थी। यह मामला शासन तक भी गया था लेकिन मामला जस का तस है।
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वर्ष 2005 में तत्कालीन डीएम अमृत अभिजात ने चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा मंगाई थी, जिसे सरकिट हाउस में लगाया जाना था। किन्हीं कारणों से प्रतिमा वहां नहीं लग सकी तो इसे नगर निगम के इंडियन प्रेस चौराहा के पास वाले स्टोर में कबाड़ में रखवा दिया गया। लंबे समय तक कबाड़ के साथ रखी रहने के बाद सात माह पहले पार्षद किरन जायसवाल ने सदन में फोटोग्राफ प्रस्तुत करते हुए निगम के स्टोर में कबाड़ के साथ बदहाल पड़ी प्रतिमा का मुद्दा नगर निगम सदन में उठाया। बाद में पार्षद किरन ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को जब इस मामले की जानकारी दी तो उन्होंने आजाद प्रतिमा के अपमान का मुद्दा लखनऊ में उठाया।
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मामले को तूल पकड़ता देख तत्कालीन नगर आयुक्त आरपी सिंह ने आजाद प्रतिमा को इंडियन प्रेस स्टोर से नगर निगम मुख्यालय मंगवा लिया लेकिन यहां भी प्रतिमा को स्टोर में ही कबाड़ के साथ एक किनारे रख दिया गया। प्रतिमा की बदहाली से नाराज पार्षद किरन कई अन्य पार्षदों के साथ वहीं धरने पर बैठ गईं। इसकेबाद निगम प्रशासन ने प्रतिमा को स्टोर में एक किनारे रखवाकर ऊपर से टिन शेड लगवा दिया और उसके आसपास सफाई कराके गमले रखवा दिए। वहीं प्रतिमा को पन्नी तिरपाल और तिरंगे से लपेटकर चबूतरे पर रखवा दिया गया।
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इस बीच कई बार प्रतिमा को सरकिट हाउस या किसी अन्य प्रमुख स्थान पर लगाने की मांग उठी लेकिन निगम प्रशासन ने अपनी तरफ से इसके लिए कोई पहल नहीं की। निगम मुख्यालय के स्टोर में रखी प्रतिमा के आसपास पिछले कुछ समय में फिर से कबाड़ का ढेर लग गया। गमले में लगे पेड़ सूख गए। प्रतिमा भी चबूतरे से जमीन पर आ गई। माना जा रहा था कि प्रतिमा 23 जुलाई को आजाद जयंती के पहले सरकिट हाउस या किसी उचित स्थान पर स्थापित कर दी जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पार्षद ने इस मामले में मुख्य सचिव और नगर विकास सचिव को भी पत्र लिखा है। इस मामले में जल्द ही वह राज्यपाल से भी मुलाकात करेंगी।
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