प्रयागराज: सतर्क रहें, नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण बिल से निकल कर बस्तियों में जा रहे हैं अजगर
प्रयागराज में गंगा-यमुना नदि के किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोग सावधान हो जाएं। मॉनसून के मौसम में बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है, जिसके कारण किनारों की गीली मिट्टी, भीटा और बिल में नदि का पानी भर रहा है। जमीन के भीतर और ‘ठीहे’ (स्थान) में पानी भरने से कछार में अजगर निकल कर सूखी जमीन यानी बस्तियों की तरफ जा रहे हैं।
नदियों के किनारे सर्दी-गर्मी में टस से मस न होने वाले अजगर अपना स्थान छोड़कर बस्तियों तक पहुंच रहे हैं। ये अजगर आम लोगों के साथ जानवरों के लिए भी खतरा बन सकते हैं, इसलिए यदि आपको अपने आस-पास अजगर दिखे तो उसे छेड़ें या मारें नहीं, बल्कि जल्द से जल्द वन विभाग को इसकी सूचना दें।
डीएफओ वाईके शुक्ला के मुताबिक यहां पाए जाने वाले अजगर ‘कॉमन पाइसन’ प्रजाति के हैं। ये नदियों के किनारे ही जमीन के भीतर रहते हैं। बिल में पानी भरने की स्थिति में ही ये अपना स्थान छोड़ते हैं। उन्होंने बताया कि आमतौर पर अजगर की उम्र 23 से 25 वर्ष होती है।
घात लगाकर करते हैं शिकार
अजगर से छेड़छाड़ किसी के लिए भी भारी पड़ सकता है। अब तक शहर में निकले अजगरों की लंबाई छह से आठ फीट तक रही है। इनकी उम्र पांच से सात वर्ष तक आंकी गई है। इस उम्र तक ये अजगर शिकार करने लायक हो जाते हैं।
वे किसी भी बकरी, बछिया जैसे छोटे जानवरों को पहले मुंह से फंसाते हैं और पिर धीरे-धीरे पूंछ से कसाव बढ़ाते हैं। इसके बाद वे धीरे-धीरे लार्वा छोड़ना शुरू करते हैं, जिससे शिकार का दम निकल जाता है। छोटे बच्चों के लिए ये अजगर बहुत खतरनाक होते हैं।
पिछले वर्ष पकड़े गए थे 14 अजगर
वन विभाग ने पिछले गंगा-यमुना के कछारी इलाकों में बस्तियों तक पहुंचे वाले 14 अजगर पकड़े थे। इनमें से छह तो राजकीय होम्योपैथिक कॉलेज परिसर के ही वन विभाग ने पिंजड़ों में बंद किए थे। सभी अजगर मेजा, कोरांव और शंकरगढ़ के जंगलों में छोड़े गए थे। इस बार वन विभाग में बस्तियों से छह अजगर पकड़े जा चुके हैं।
इनमें एक दो फीट के बच्चे अजगर भी शामिल थे। तेलियरगंज इलाके में बुधवार को पकड़े गए अजगर को वन विभाग के कर्मचारियों ने गुरुवार को कोरांव के जंगल में ले जाकर छोड़ा। बारिश के दौरान कछार से निकल कर बस्तियों तक पहुंचे अजगरों को पकड़ने के लिए रेंजर के नेतृत्व में टीम बनाई गई है। कहीं अजगर दिखे तो इसकी सूचना वन विभाग को दी जा सकती है। त्वरित कार्रवाई की जाएगी।