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Prayagraj News: जुगनू ... गांव की जमीं पर अब नहीं उतरते ये नन्हे सितारे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 01 Nov 2025 01:58 AM IST
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Fireflies... these little stars no longer descend on the village soil
फोटो हरिसेनगंज - फोटो : samvad
कभी गांव की गलियों, कांटेदार पेड़ों और खेत के मेड़ों के इर्द-गिर्द रात होते ही झिलमिलाती रोशनी बिखेरने वाले जुगनू अब अंधेरे में खोते जा रहे हैं। अब इनकी टिमटिमाहट यदाकदा ही देखने को मिलती है। बढ़ते प्रदूषण, कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग और कृत्रिम रोशनी इनके विलुप्त होने के प्रमुख कारण हैं।
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कभी हर गांव की चौखट पर टिमटिमाने वाले ये जीव अब केवल किसी दुर्लभ रात में ही दिखाई देते हैं। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) के कीट विज्ञानी नरेंद्र मौर्या बताते हैं कि जुगनू कीटों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके विलुप्त होने से कीटों की आबादी बढ़ सकती है, जिससे फसलों और वनस्पतियों को नुकसान हो सकता है। इनके विलुप्त होने से पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ता है। जिससे अन्य प्रजातियों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। यही नहीं जुगनू कई अन्य प्रजातियों के लिए भोजन का स्रोत भी है। उनके विलुप्त होने से इन प्रजातियों की आबादी पर बुरा असर पड़ रहा है। जानकारों का कहना है कि जुगनू जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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सांस्कृतिक पहचान भी खतरे में
प्राचीन काल से जुगनुओं को सौभाग्य और शुभ संकेत का प्रतीक माना गया है। लोक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं में इन्हें दिव्य संदेशवाहक के रूप में देखा गया। नवरात्र जैसे पर्वों पर माना जाता था कि ये इच्छाएं देवी मां तक पहुंचाते हैं। अब इनका गायब होना हमारी सांस्कृतिक स्मृतियों से एक सुंदर अध्याय के मिटने जैसा है।
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चकाचौंध से अस्तित्व पर संकट
शहरों से लेकर गांवों तक बढ़ता प्रकाश प्रदूषण जुगनुओं के जीवन चक्र को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है। जुगनू प्रकाश संकेतों के आधार पर साथी चुनते हैं, लेकिन कृत्रिम रोशनी उनके संकेतों को धुंधला कर देती है। परिणामस्वरूप, उनका प्रजनन और अस्तित्व दोनों संकट में पड़ रहे हैं। 5 जुलाई 2025 को जुगनू दिवस के अवसर पर भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से सर्वे कराया गया था। इसमें सामने आया कि देश में जुगनू की संख्या में करीब 76 प्रतिशत कम हुई है। यह सर्वे 22 राज्यों में किया गया था। सर्वे करने वाली टीम में कुल 224 लोग शामिल हुए थे।

क्यों चमकता है
जुगनू के शरीर में ल्यूसिफेरिन नामक रासायनिक पदार्थ होता है, जो ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर प्रकाश उत्पन्न करता है। यही गुण वैज्ञानिक अनुसंधान में भी उपयोगी है। कैंसर अनुसंधान से लेकर पर्यावरणीय बदलावों के अध्ययन तक में इसका इस्तेमाल किया जाता है।


कीटनाशकों और प्लास्टिक का कम उपयोग, कचरा प्रबंधन और प्रकाश प्रदूषण पर नियंत्रण से ही जुगनुओं को विलुप्त होने से बचाया जा सकता है। ये न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि पारिस्थितिक संतुलन के लिए भी आवश्यक हैं। डॉ. वीरेंद्र बहादुर द्विवेदी, मुख्य उद्यान निदेशक, प्रयागराज
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