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खराब गुणवत्ता पर एफसीआई ने गेहूं लेने से किया मना
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भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने क्रय केंद्रों पर खरीदे गए गेहूं को लेने से इनकार कर दिया है। गेहूं की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं बताई जा रही है। देर शाम तक उच्चाधिकारियों के बीच बात होती रही, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका। इससे गेहूं खरीद प्रभावित होने की भी आशंका बन गई है।
गेहूं की खरीद 15 अप्रैल से शुरू है। बृहस्पतिवार से एफसीआई के गोदाम में गेहूं भेजने की शुरुआत भी हुई। विपणन विभाग के सोरांव क्रय केंद्र से एक ट्रक गेहूं एफसीआई के अलोपीबाग स्थित गोदाम में भेजा गया, लेकिन अध्ययन में यह फेल पाया गया। बताया जा रहा है कि प्राथमिक जांच में गेहूं में सिकुड़न और टूटन की मात्रा 11 प्रतिशत से ज्यादा पाई गई। जबकि, मानक अधिकतम छह प्रतिशत का है। ऐसे में एफसीआई के अफसरों ने गेहूं लेने से इनकार कर दिया और ट्रक गोदाम पर ही खड़े रहे। शुक्रवार शाम तक एफसीआई के वरिष्ठ अफसरों की संभागीय खाद्य नियंत्रक, क्षेत्रीय खाद्य विपणन अधिकारी दुर्गेश समेत अन्य संबंधित अधिकारियों संग बैठक हुई। हालांकि, संभागीय खाद्य नियंत्रक देवराज यादव का कहना है कि रास्ता निकाला जा रहा है। वार्ता हुई है, शनिवार से सबकुछ सामान्य हो जाएगा। उधर, इस विवाद के बाद क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद प्रभावित होने की भी आशंका बन गई हे।
गेहूं खरीद के मानक में शिथिलता के लिए लिखा गया है पत्र
गेहूं की गुणवत्ता को लेकर शुरू से ही सवाल उठ रहे हैं। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की वजह से गेहूं के दाने काफी पतली हो गए हैं। शिकायत बढ़ने पर प्रयागराज में 11 तथा कौशाम्बी में छह नमूनों की जांच कराई गई। इनमें से प्रयागराज में मात्र दो नमूने सही पाए गए। इनमें सिकुड़न और टूटन की मात्रा 11 फीसदी से भी अधिक पाई गई, जबकि अधिकतम छह प्रतिशत होनी चाहिए। इस बाबत डीएम की ओर से प्रमुख सचिव एवं खाद्य आयुक्त को पत्र लिखकर सिकुड़न एवं टूटन की मात्रा नौ प्रतिशत किए जाने की मांग की गई, लेकिन अभी शासन से कोई जवाब नहीं आया है।
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एफसीआई ने ट्रकों को भी रोका, नहीं उठा चावल
अनाज की गुणवत्ता को लेकर एफसीआई के साथ विवाद बढ़ता ही जा रहा है। एफसीआई तथा अन्य संस्थाओं के गोदामों से शुक्रवार को खाद्यान्न का उठान भी नहीं हुआ। गोदाम के आगे ट्रकों की लाइन लगी रही, लेकिन गेट ही नहीं खुले। हालांकि, देर शाम को वार्ता के बाद समाधान की बात कही जा रही है।
कंट्रोल पर इन दिनों मुफ्त राशन का वितरण हो रहा है। इस समय मई महीने के लिए चावल का उठान जारी है, लेकिन शुक्रवार को नया विवाद खड़ा हो गया। अनाज की गुणवत्ता तथा अन्य कारणों से एफसीआई, सीडब्ल्यूसी तथा अन्य संस्थाओं के गोदाम से चावल की आपूर्ति नहीं हुई। इसकी वजह से गोदामों के सामने ट्रकों की लंबी कतार लगी रही। इस तरह से कंट्रोल के लिए चावल की आपूर्ति रोके जाने से अफसरों में हड़कंप मच गया। दिन भर वार्ता होती रही लेकिन समाधान नहीं निकल सका। इस दौरान दो अफसरों के बीच विवाद की बात भी कही जा रही है। शाम को सभी संबंधित विभाग के अफसरों की बैठक हुई। फिलहाल समझौता होने के दावे किए जा रहे हैं। संभागीय खाद्य नियंत्रक का कहना है कि शनिवार से गोदामों से खाद्यान्न का उठान शुरू हो जाएगा।
धान मिल मामले में भी बनाई गई जांच कमेटी
लेड़ियारी की मिल में डंप करोड़ाें रुपये के धान का विवाद भी अभी नहीं सुलझा है। गुणवत्ता ठीक नहीं होने की बात कहते हुए एफसीआई ने मिल का चावल लेने से इनकार कर दिया है। इतनी बड़ी मात्रा में एक मिल पर धान भेजे जाने को लेकर भी सवाल उठ रहा है। अब इसमें कमेटी गठित कर दी गई है। कमेटी यह तय करेगी कि धान का क्या किया जाए। अफसरों का कहना है कि धान दूसरी मिल पर भेजा जा सकता है।
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गेहूं की खरीद 15 अप्रैल से शुरू है। बृहस्पतिवार से एफसीआई के गोदाम में गेहूं भेजने की शुरुआत भी हुई। विपणन विभाग के सोरांव क्रय केंद्र से एक ट्रक गेहूं एफसीआई के अलोपीबाग स्थित गोदाम में भेजा गया, लेकिन अध्ययन में यह फेल पाया गया। बताया जा रहा है कि प्राथमिक जांच में गेहूं में सिकुड़न और टूटन की मात्रा 11 प्रतिशत से ज्यादा पाई गई। जबकि, मानक अधिकतम छह प्रतिशत का है। ऐसे में एफसीआई के अफसरों ने गेहूं लेने से इनकार कर दिया और ट्रक गोदाम पर ही खड़े रहे। शुक्रवार शाम तक एफसीआई के वरिष्ठ अफसरों की संभागीय खाद्य नियंत्रक, क्षेत्रीय खाद्य विपणन अधिकारी दुर्गेश समेत अन्य संबंधित अधिकारियों संग बैठक हुई। हालांकि, संभागीय खाद्य नियंत्रक देवराज यादव का कहना है कि रास्ता निकाला जा रहा है। वार्ता हुई है, शनिवार से सबकुछ सामान्य हो जाएगा। उधर, इस विवाद के बाद क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद प्रभावित होने की भी आशंका बन गई हे।
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गेहूं खरीद के मानक में शिथिलता के लिए लिखा गया है पत्र
गेहूं की गुणवत्ता को लेकर शुरू से ही सवाल उठ रहे हैं। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की वजह से गेहूं के दाने काफी पतली हो गए हैं। शिकायत बढ़ने पर प्रयागराज में 11 तथा कौशाम्बी में छह नमूनों की जांच कराई गई। इनमें से प्रयागराज में मात्र दो नमूने सही पाए गए। इनमें सिकुड़न और टूटन की मात्रा 11 फीसदी से भी अधिक पाई गई, जबकि अधिकतम छह प्रतिशत होनी चाहिए। इस बाबत डीएम की ओर से प्रमुख सचिव एवं खाद्य आयुक्त को पत्र लिखकर सिकुड़न एवं टूटन की मात्रा नौ प्रतिशत किए जाने की मांग की गई, लेकिन अभी शासन से कोई जवाब नहीं आया है।
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एफसीआई ने ट्रकों को भी रोका, नहीं उठा चावल
अनाज की गुणवत्ता को लेकर एफसीआई के साथ विवाद बढ़ता ही जा रहा है। एफसीआई तथा अन्य संस्थाओं के गोदामों से शुक्रवार को खाद्यान्न का उठान भी नहीं हुआ। गोदाम के आगे ट्रकों की लाइन लगी रही, लेकिन गेट ही नहीं खुले। हालांकि, देर शाम को वार्ता के बाद समाधान की बात कही जा रही है।
कंट्रोल पर इन दिनों मुफ्त राशन का वितरण हो रहा है। इस समय मई महीने के लिए चावल का उठान जारी है, लेकिन शुक्रवार को नया विवाद खड़ा हो गया। अनाज की गुणवत्ता तथा अन्य कारणों से एफसीआई, सीडब्ल्यूसी तथा अन्य संस्थाओं के गोदाम से चावल की आपूर्ति नहीं हुई। इसकी वजह से गोदामों के सामने ट्रकों की लंबी कतार लगी रही। इस तरह से कंट्रोल के लिए चावल की आपूर्ति रोके जाने से अफसरों में हड़कंप मच गया। दिन भर वार्ता होती रही लेकिन समाधान नहीं निकल सका। इस दौरान दो अफसरों के बीच विवाद की बात भी कही जा रही है। शाम को सभी संबंधित विभाग के अफसरों की बैठक हुई। फिलहाल समझौता होने के दावे किए जा रहे हैं। संभागीय खाद्य नियंत्रक का कहना है कि शनिवार से गोदामों से खाद्यान्न का उठान शुरू हो जाएगा।
धान मिल मामले में भी बनाई गई जांच कमेटी
लेड़ियारी की मिल में डंप करोड़ाें रुपये के धान का विवाद भी अभी नहीं सुलझा है। गुणवत्ता ठीक नहीं होने की बात कहते हुए एफसीआई ने मिल का चावल लेने से इनकार कर दिया है। इतनी बड़ी मात्रा में एक मिल पर धान भेजे जाने को लेकर भी सवाल उठ रहा है। अब इसमें कमेटी गठित कर दी गई है। कमेटी यह तय करेगी कि धान का क्या किया जाए। अफसरों का कहना है कि धान दूसरी मिल पर भेजा जा सकता है।