UP Board : फर्जी हस्ताक्षर कांड- कुशीनगर के 700 निजी परीक्षार्थियों की बोर्ड परीक्षा पर संकट
माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा से कुशीनगर जिले के करीब 700 व्यक्तिगत परीक्षार्थी वंचित हो सकते हैं। जांच में उनके परीक्षा आवेदन-पत्रों पर प्रधानाचार्य की जगह लिपिक द्वारा किए गए हस्ताक्षर पाए गए हैं।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा से कुशीनगर जिले के करीब 700 व्यक्तिगत परीक्षार्थी वंचित हो सकते हैं। जांच में उनके परीक्षा आवेदन-पत्रों पर प्रधानाचार्य की जगह लिपिक द्वारा किए गए हस्ताक्षर पाए गए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कुशीनगर ने अपनी जांच रिपोर्ट संबंधित पत्राचार शिक्षण संस्थान प्रयागराज को भेज दी है, जिसे आगे कार्रवाई के लिए यूपी बोर्ड को प्रेषित कर दिया गया है। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में है। प्रथम दृष्टया गड़बड़ी मिलने पर परीक्षार्थियों की परीक्षा रोकते हुए संबंधित नोडल सेंटर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फर्जी हस्ताक्षर प्रकरण ने सैकड़ों छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है। अब अंतिम निर्णय यूपी बोर्ड की जांच और कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
ऐसे सामने आया मामला
आरोप है कि कुशीनगर जिले के एक गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट (कक्षा 12) परीक्षा के लिए किए गए पंजीकरण फार्मों पर प्रधानाचार्य के हस्ताक्षर नहीं कराए गए, बल्कि लिपिक ने स्वयं हस्ताक्षर कर दिए। शिकायत मिलने पर डीआईओएस श्रवण कुमार ने जांच टीम गठित की। जांच में हस्ताक्षर फर्जी पाए गए। इसके बाद रिपोर्ट क्षेत्रीय बोर्ड कार्यालय गोरखपुर भेजी गई, जहां से क्षेत्रीय सचिव ने प्रकरण पत्राचार शिक्षण संस्थान को सत्यापन हेतु भेजा। संस्थान ने अपनी आख्या सहित पूरी रिपोर्ट माध्यमिक शिक्षा परिषद को कार्रवाई के लिए भेज दी है।
प्रदेश भर में मची हलचल
मामले की जानकारी सामने आने के बाद प्रदेश के पत्राचार शिक्षा संस्थानों में खलबली मच गई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रदेश के अग्रसारण केंद्रों की जांच कराई जाए तो ऐसे और मामले सामने आ सकते हैं।
क्या है पत्राचार शिक्षा प्रणाली
अपर सचिव सी.एल. चौरसिया के अनुसार पत्राचार शिक्षण संस्थान की स्थापना वर्ष 1980 में हुई थी और यह यूपी बोर्ड के अधीन संचालित है। इसमें कक्षा 11 और 12 में पंजीकरण होता है। यह व्यवस्था मुख्यतः उन विद्यार्थियों के लिए है जो नियमित विद्यालय नहीं जा पाते। अध्ययन सामग्री विद्यार्थियों को डाक से भेजी जाती है और वे अपने प्रोजेक्ट / असाइनमेंट वापस भेजते हैं, जिससे शिक्षक और विद्यार्थी के बीच निर्देशित शैक्षिक संवाद स्थापित होता है।