Fake Currency Factory : दो रुपये में तैयार करते थे 100 रुपये का जाली नोट, थोक के भाव से खरीदकर लाते थे कागज
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी नोट छापने के लिए कागज ए-फोर साइज के अच्छे कागज का इस्तेमाल करते थे। हल्के क्रीम रंग का यह कागज अन्य कागजों के मुकाबले कम फटता है। इसे किसी भी स्टेशनरी की दुकान से खरीदा जा सकता है।
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मदरसे में नकली नोट छापने के मामले में पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में कई अहम खुलासे किए हैं। आरोपियों ने बताया कि 100 रुपये का नोट बनाने में मात्र दो रुपये का खर्च आता था। इसके लिए थोक भाव सामग्री खरीदकर लाते थे। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के लिए आरोपियों को ओडिशा ले जाया सकता है।
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी नोट छापने के लिए कागज ए-फोर साइज के अच्छे कागज का इस्तेमाल करते थे। हल्के क्रीम रंग का यह कागज अन्य कागजों के मुकाबले कम फटता है। इसे किसी भी स्टेशनरी की दुकान से खरीदा जा सकता है। थोक भाव से खरीदने के कारण यह काफी सस्ता मिलता था।
एक रुपये से भी कम कीमत पर एक ए-4 साइज का पेपर मिलता था। नोट को काटने के लिए कटर ब्लेड का इस्तेमाल करते थे। आरोपी नोटों के साइज के कई टुकड़े निकाल लेते थे। किसी कागज से दो तो किसी तीन नोटों के साइज निकल आते थे।
एक के एवज में देते थे तीन नोट
आरोपी कमाई में तेजी से इजाफा करने के लिए एक के एवज में तीन नोट देते थे। ऐसे में वह हर तीन नोट पर लगभग छह रुपये खर्च करके 94 रुपये कमा लेते थे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपी नोट छापने के लिए दिन-रात काम करते थे। गिरोह में इनके अलावा और कौन-कौन शामिल है पुलिस इसकी तफ्तीश में जुटी हुई है।
इस तरह सस्ते में नोट बनाते थे आरोपी
सौ रुपये का नोट बनाने के लिए आरोपी दो कटर ब्लेड, एक कैंची, प्रिंटर, लैपटॉप, सीधा काटने के लिए दो स्केल (पटरी), हरा टेप और कागज के बंडल इस्तेमाल करते थे।