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Fraud : नामी कंपनियों के मिलते-जुलते नाम से बने फर्जी एप बैंक बैलेंस कर रहे खाली

Wed, 21 Aug 2024 06:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 21 Aug 2024 06:15 PM IST
सार

साइबर सेल के अफसरों ने बताया कि इन दिनों सबसे ज्यादा ठगी के मामले ट्रेडिंग के नाम पर आ रहे हैं। इस जालसाजी में ठग लोगों को कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का लालच देकर उनके मोबाइल पर एप डाउनलोड करवा देते हैं। खुद ही जालसाज इन एप को संचालित करते हैं।

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Fake apps made with similar names of renowned companies are depleting bank balances.
Cyber Crime - फोटो : FREEPIK

विस्तार

अगर आप अपने मोबाइल पर व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप पर आए लिंक से किसी भी एप को डाउनलोड कर रहे हैं तो सतर्क हो जाइए। क्योंकि, इन दिनों जालसाज ट्रेडिंग के नाम पर नामी कंपनियों के नाम से बने फर्जी एप को मोबाइल में डाउनलोड करवा रहे हैं। जैसे ही आप इन एप को डाउनलोड करेंगे, समझिए बैंक बैलेंस खाली होना शुरू हो जाएगा। साइबर पुलिस ने फर्जी एप को चिह्नित करना शुरू कर दिया है।

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साइबर सेल के अफसरों ने बताया कि इन दिनों सबसे ज्यादा ठगी के मामले ट्रेडिंग के नाम पर आ रहे हैं। इस जालसाजी में ठग लोगों को कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का लालच देकर उनके मोबाइल पर एप डाउनलोड करवा देते हैं। खुद ही जालसाज इन एप को संचालित करते हैं।
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ये जालसाज लोगों को आसानी से ठगी के जाल में फंसाने के लिए नामी कंपनी के मिलते-जुलते नाम से एप बनाते हैं, ताकि किसी का इस पर ध्यान न जाए। इसे सही समझकर मोटी रकम निवेश कर दें। साइबर पुलिस अफसरों ने बताया कि 50 से ज्यादा एप को बंद करवाया जा चुका है। बावजूद इसके जालसाज नये-नये नाम से एप बनाकर लोगों को ठगते रहते हैं।

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इस तरह के नाम से बनाते हैं एप

एचडीएफसी वीआईपी, बीवाईबीआईटी, अडानी, फि्लिपकार्ट, ऑयल प्राॅफिट, डेफ्टर इंवेस्टमेंट, लिजार्ड रेस्ट, जोक्सा, एप स्बॉट, वीकिंग इंवेस्ट, स्विचो हेल्प, जीएसमैक्स समेत अन्य कई माेबाइल एप शामिल हैं। साइबर अफसरों ने बताया कि आए दिन नए-नए नाम से बने एप से लोगों को ठगा जा रहा है।
लिंक भेजकर कराते हैं डाउनलोड

साइबर पुलिस की जांच में सामने आया कि ज्यादातर एप को लिंक भेजकर डाउनलोड कराया जाता है। यह लिंक व्हाट्सएप टेलीग्राम, फेसबुक समेत अन्य सोशल प्लेटफॉर्म पर मुहैया करवाया जाता है। वहीं, यूपी पुलिस के साइबर सलाहकार राहुल मिश्रा ने बताते हैं कि जालसाज खुद ही इस तरह के एप को संचालित करते हैं।

इन बातों का रखे ख्याल

 

  • किसी भी अंजान लिंक पर क्लिक करने से बचें
  • सिर्फ उन्हीं एप में पैसा डालें, जिनके बारे में आप जानते हों
  • किसी के कहने पर कोई एप को डाउनलोड करने से बचें
  • इस तरह के एप में सिर्फ नाममात्र की रकम को निवेश करें
  • ठगी का शिकार होने पर फौरन 1930 पर सूचित करें


केस-एक

शांतिपुरम के रहने वाले एम चक्रवती से जालसाजों ने निवेश के नाम पर जोक्सा नामक एप डाउनलोड करवाया। इसके बाद 20 लाख रुपये निवेश कराकर ठगी कर ली। जांच में पता चला कि लिंक के माध्यम से एप डाउनलोड करवाया गया था।

केस-दो

सेवानिवृत्त इंजीनियर ने साइबर पुलिस को बताया था कि डेफ्टर इंवेस्टमेंट के नाम से बने एप को डाउनलोड कराकर 20 लाख रुपये निवेश करवाया गया था। हालांकि,बाद में आरोपी के गिरफ्तार होने पर पता चला कि वह खुद ही इस एप को संचालित करता था।

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