फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Even long service cannot make an illegal appointment found through fraud valid

High Court : धोखाधड़ी से पाई गई अवैध नियुक्ति को लंबे समय की सेवा भी वैध नहीं बना सकती

Fri, 03 Apr 2026 07:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 03 Apr 2026 07:15 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने जालसाजी या धोखाधड़ी के माध्यम से सार्वजनिक रोजगार प्राप्त किया है, तो दशकों तक की गई उसकी सेवा उस अवैध नियुक्ति को वैधता प्रदान नहीं कर सकती।

विज्ञापन
Even long service cannot make an illegal appointment found through fraud valid
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने जालसाजी या धोखाधड़ी के माध्यम से सार्वजनिक रोजगार प्राप्त किया है, तो दशकों तक की गई उसकी सेवा उस अवैध नियुक्ति को वैधता प्रदान नहीं कर सकती। धोखाधड़ी और न्याय कभी एक साथ नहीं रह सकते और जालसाजी पर टिकी कोई भी नींव कानून की नजर में शुरुआत से ही शून्य मानी जाती है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने मेरठ की शिक्षिका वीणा मेनन की याचिका को खारिज करते हुए दिया।

विज्ञापन


याची की नियुक्ति वर्ष 1989 में मेरठ के एक स्कूल में सहायक शिक्षक के पद पर हुई थी। विवाद तब शुरू हुआ जब मानव संपदा पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया के दौरान याची ने वर्ष 1984 की अपनी हाई स्कूल की मूल मार्कशीट और प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आवेदन किया, जो लंबे समय से फर्जी टीसी के आधार पर बोर्ड ने रोके गए रिजल्ट की श्रेणी में डाल दिया था।
विज्ञापन


जांच में यह तथ्य सामने आया कि याची ने हाई स्कूल परीक्षा में बैठने के लिए कक्षा 8 का जो स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) लगाया था, वह फर्जी था। इन आधारों पर याची की नियुक्ति को अवैध घोषित करते हुए वेतन रोक दिया। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि शिक्षिका ने 35 वर्षों तक बिना किसी विवाद के सेवा की है। उसकी नियुक्ति के समय दस्तावेजों के सत्यापन में अधिकारियों ने चूक की है। ऐसे में अधिकारियों की चूक के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि जब नियुक्ति का आधार ही धोखाधड़ी हो, तो सेवा की अवधि का कोई महत्व नहीं रह जाता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों की ओर से सत्यापन में हुई कथित देरी या चूक का लाभ उठाकर जालसाजी को जायज नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से याची का वेतन रोकने और उसके दस्तावेजों को रद्द करने की कार्यवाही को पूरी तरह वैध करार दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed