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अरदास करने जुटी संगत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 05 Dec 2016 01:51 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : allahabad
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सिखों के नवें गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस रविवार को गुरुद्वारा पक्की संगत में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। गुरुग्रंथ साहिब के अखंड साहब के पाठ की लड़ी पूरी होने के बाद पूजन अर्चन और अरदास हुई। खुले पंडाल में दीवान सजाया गया। पंचायती अखाड़ा निर्मल के मुकामी महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री समेत गुरुद्वारों के रागी जत्थों ने शबद कीर्तन सुनाकर संगत को निहाल किया।
वाराणसी से आए दर्शन सिंह ने गुरु इतिहास पर प्रकाश डाला। कहा, पांच भाई बहन में सबसे छोटे गुरु तेग बहादुर लड़कपन से ही भक्तिभाव परोपकार की भावना से ओतप्रोत थे। सन 1664 में उन्हें गुरु गद्दी मिली। संगमनगरी से उन्हें विशेष अनुराग रहा। यहां पर उन्होंने ने छह माह प्रवास किया। इसके पहले निर्मल अखाड़े के महंत देवेंद्र सिंह ने आनंद साहिब का पाठ किया। शबद ‘झूठी देखी प्रीति जगत में’ सुनाकर संगत को निहाल किया। हरविंदर सिंह, संत जसविंदर सिंह ने गुरुवाणी सुनाई।
गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष सरदार जोगिंदर सिंह ने गुरु गोविंद सिंह के 350 प्रकाश दिवस पूरे होने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम कवि दरबार के बारे में जानकारी दी। इसके बाद गुरु लंगर बरता गया। प्रसाद छकने को देर रात तक लोगों का तांता लगा रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीपंचायती निर्मल अखाड़े के सभापति महंत स्वामी ज्ञानदेव ने की। महंत ज्ञान सिंह गुरुद्वारा पक्की संगत ने आभार व्यक्त किया।
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वाराणसी से आए दर्शन सिंह ने गुरु इतिहास पर प्रकाश डाला। कहा, पांच भाई बहन में सबसे छोटे गुरु तेग बहादुर लड़कपन से ही भक्तिभाव परोपकार की भावना से ओतप्रोत थे। सन 1664 में उन्हें गुरु गद्दी मिली। संगमनगरी से उन्हें विशेष अनुराग रहा। यहां पर उन्होंने ने छह माह प्रवास किया। इसके पहले निर्मल अखाड़े के महंत देवेंद्र सिंह ने आनंद साहिब का पाठ किया। शबद ‘झूठी देखी प्रीति जगत में’ सुनाकर संगत को निहाल किया। हरविंदर सिंह, संत जसविंदर सिंह ने गुरुवाणी सुनाई।
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गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष सरदार जोगिंदर सिंह ने गुरु गोविंद सिंह के 350 प्रकाश दिवस पूरे होने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम कवि दरबार के बारे में जानकारी दी। इसके बाद गुरु लंगर बरता गया। प्रसाद छकने को देर रात तक लोगों का तांता लगा रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीपंचायती निर्मल अखाड़े के सभापति महंत स्वामी ज्ञानदेव ने की। महंत ज्ञान सिंह गुरुद्वारा पक्की संगत ने आभार व्यक्त किया।
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